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धूमधाम से मनाई थाई होली सोंगक्रान
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
Updated Sun, 15 Apr 2018 11:00 PM IST
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त्योहार।
- फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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कसया। रविवार को कुशीनगर के थाई मंदिर में रविवार को थाई होली सोंगक्रान मनाई गई। इसी के साथ थाई नव वर्ष का शुभारंभ हो गया। इस अवसर पर थाई और क्षेत्रीय लोगों ने एक दूसरे को नए साल की बधाई दी और उपहार भेंट किया।
सुबह थाई नव वर्ष का आगाज होते ही थाई वाट परिसर में विशेष पूजा शुरू हो गई। थाई वाट मंदिर के मुख्य पुजारी फ्रा प्रथमा बोधियोंग व डीएम आंद्रा वामसी की अगुवाई में थाई और भारतीय बौद्ध भिक्षुओं ने विशेष पूजा संपन्न कराई। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए काफी तादाद में थाई नागरिक भी आए हुए थे। विशेष पूजा अनुष्ठान के बाद फूलों और इत्र से बने रंग डालकर होली खेली गई। दोपहर तक एक दूसरे को बधाई देने का सिलसिला चला।
मंदिर के बौद्ध भिक्षुओं ने कहा कि थाई और भारतीय संस्कृति परंपरा में काफी समानता है। बौद्ध भिक्षु भदंत ज्ञानेश्वर ने कहा कि किसी भी धर्म, संस्कृति और परंपरा एक दूसरे से मिलकर मानवता के काम करने का संदेश देती है। भंते महेंद्र ने कहा कि दुनिया के अनेक देशों में भारतीय संस्कृति और परंपरा किसी न किसी रूप में स्थापित है। थाई होली सोंगक्रान भी इसी का अंग है।
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बता दें कि थाई में नव वर्ष का त्योहार प्रत्येक वर्ष 13 अप्रैल से 15 अप्रैल तक मनाया जाता है। यह भी माना जाता है कि सोंगक्रोन शब्द की उत्पत्ति देवनागरी लिपि और संस्कृत भाषा के शब्द संक्रांति से हुई है। संचालन टीके राय ने किया। अंत में आए हुए आगंतुकों के प्रति भंते सोंक्रान ने आभार ज्ञापित किया।
इस मौके पर भंते नंदरतन, भंते अस्सीजी, एसडीएम श्रीप्रकाश शुक्ल, दिनेश शुक्ल, राजन गोंड, रामअधार, वीरेंद्र तिवारी, राजेश मणि त्रिपाठी, डॉक्टर बीएन सिंह, डॉक्टर आलोक चतुर्वेदी, श्वेता सिंह, सुमित त्रिपाठी, अंबिकेश तिवारी, ओमप्रकाश कुशवाहा, हरिवंश यादव, मनोज पांडेय, अनिल राव, सर्वेश यादव आदि मौजूद रहे।
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सुबह थाई नव वर्ष का आगाज होते ही थाई वाट परिसर में विशेष पूजा शुरू हो गई। थाई वाट मंदिर के मुख्य पुजारी फ्रा प्रथमा बोधियोंग व डीएम आंद्रा वामसी की अगुवाई में थाई और भारतीय बौद्ध भिक्षुओं ने विशेष पूजा संपन्न कराई। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए काफी तादाद में थाई नागरिक भी आए हुए थे। विशेष पूजा अनुष्ठान के बाद फूलों और इत्र से बने रंग डालकर होली खेली गई। दोपहर तक एक दूसरे को बधाई देने का सिलसिला चला।
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मंदिर के बौद्ध भिक्षुओं ने कहा कि थाई और भारतीय संस्कृति परंपरा में काफी समानता है। बौद्ध भिक्षु भदंत ज्ञानेश्वर ने कहा कि किसी भी धर्म, संस्कृति और परंपरा एक दूसरे से मिलकर मानवता के काम करने का संदेश देती है। भंते महेंद्र ने कहा कि दुनिया के अनेक देशों में भारतीय संस्कृति और परंपरा किसी न किसी रूप में स्थापित है। थाई होली सोंगक्रान भी इसी का अंग है।
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बता दें कि थाई में नव वर्ष का त्योहार प्रत्येक वर्ष 13 अप्रैल से 15 अप्रैल तक मनाया जाता है। यह भी माना जाता है कि सोंगक्रोन शब्द की उत्पत्ति देवनागरी लिपि और संस्कृत भाषा के शब्द संक्रांति से हुई है। संचालन टीके राय ने किया। अंत में आए हुए आगंतुकों के प्रति भंते सोंक्रान ने आभार ज्ञापित किया।
इस मौके पर भंते नंदरतन, भंते अस्सीजी, एसडीएम श्रीप्रकाश शुक्ल, दिनेश शुक्ल, राजन गोंड, रामअधार, वीरेंद्र तिवारी, राजेश मणि त्रिपाठी, डॉक्टर बीएन सिंह, डॉक्टर आलोक चतुर्वेदी, श्वेता सिंह, सुमित त्रिपाठी, अंबिकेश तिवारी, ओमप्रकाश कुशवाहा, हरिवंश यादव, मनोज पांडेय, अनिल राव, सर्वेश यादव आदि मौजूद रहे।