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सीबी नॉट मशीन डेढ़ महीने से खराब, जांच प्रभावित
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सीबी नॉट मशीन डेढ़ महीने से खराब, जांच प्रभावित
पडरौना। टीबी के गंभीर रोगियों की जांच के लिए जिला क्षय रोग अधिकारी के कार्यालय में स्थित क्लीनिक में लगी सीबी नॉट मशीन लगभग डेढ़ माह से खराब है। इस वजह से ऐसे रोगियों की जांच नहीं हो पा रही है।
टीबी के सामान्य रोगियों की जांच जनपद के सीएचसी-पीएचसी में बनी 35 डीएमसी (डेजीनेटेड माइक्रोस्कोपिक सेंटर) में होती है। वहां जांच के बाद जो मरीज टीबी से ग्रस्त पाया जाता है, उसे दवा दी जाती है। ऐसे मरीजों को छह माह तक डॉट्स नाम की दवा का सेवन करने के बाद पुन: जांच करानी होती है। नियमित दवा का सेवन करने वाले मरीज इलाज के बाद स्वस्थ हो जाते हैं। जो मरीज नियमित दवा का सेवन नहीं करते या बीच-बीच में रुक रुककर दवाइयां खाते हैं, वे स्वस्थ नहीं होते और वे एमडीआर (मेडिकल ड्र्ग्स रेजिस्टेंट) की श्रेणी में आ जाते हैं।
ऐसे मरीजों में बीमारी की स्थिति जानने के लिए सीबी नॉट मशीन से जांच करनी पड़ती है। इस मशीन की विशेषता यह है कि एक बार में चार मरीजों के सैंपल की जांच हो जाती है। इसकी रिपोर्ट तैयार होने में लगभग दो घंटे समय लगता है। इस तरह प्रतिदिन 12 मरीजों के सैंपल की जांच हो सकती है। यह मशीन केवल जिला क्षय रोग अधिकारी कार्यालय में बने टीबी क्लीनिक में लगी है। यह मशीन करीब डेढ़ माह से खराब है। ऐसी दशा में यहां सीबी नॉट मशीन से जांच नहीं हो पा रही है। मरीजों का स्पुटम (बलगम) जांच के लिए उन केंद्रों पर भेजना पड़ता है, जहां ट्रू नॉट मशीन लगी है।
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जिले में छह टीबी क्लीनिक में लगी है ट्रू नॉट मशीन
टीबी के गंभीर रोगियों की जांच के लिए ट्रू नॉट मशीन जनपद में छह टीबी क्लीनिकों में लगाई गई है। हालांकि, सीबी नॉट के मुकाबले इसकी क्षमता एक चौथाई है। एक दिन में केवल चार मरीजों के सैंपल की जांच हो पाती है। यह मशीन एक बार में केवल एक सैंपल की जांच कर पाती है। इसकी रिपोर्ट आने में भी दो से ढाई घंटा समय लगता है। यह ट्रू नॉट मशीन अब तक कप्तानगंज, रामकोला, हाटा, तमकुहीराज, दुदही और जिला अस्पताल के टीबी क्लीनिक में लगी है।
क्या है सीबी नॉट मशीन
सीबी नॉट (कार्टिरिज बेस्ड न्यूक्लिक एसिट एम्पलिफिकेशन टेस्ट) मशीन होती है, जिससे एमडीआर (मेडिकल ड्रग्स रेजिस्टेंट) और एक्सडीआर (एक्सटेंसिवली ड्रग रेजिस्टेंट) टीबी के रोगियों का पता लगाया जाता है। सामान्य टीबी से गंभीर रूप एमडीआर टीबी और अति गंभीर रूप एक्सडीआर टीबी होता है।
डीटीओ कार्यालय स्थित टीबी क्लीनिक में लगी सीबी नॉट मशीन में क्या खराबी है, वह किन कारणों से नहीं बन पा रही है, इस बारे में पता किया जाएगा। सीबी नॉट मशीन ठीक कराई जाएगी, ताकि टीबी के गंभीर रोगियों की जांच भी समय से हो सके।
- डॉ. सुरेश पटारिया, सीएमओ
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पडरौना। टीबी के गंभीर रोगियों की जांच के लिए जिला क्षय रोग अधिकारी के कार्यालय में स्थित क्लीनिक में लगी सीबी नॉट मशीन लगभग डेढ़ माह से खराब है। इस वजह से ऐसे रोगियों की जांच नहीं हो पा रही है।
टीबी के सामान्य रोगियों की जांच जनपद के सीएचसी-पीएचसी में बनी 35 डीएमसी (डेजीनेटेड माइक्रोस्कोपिक सेंटर) में होती है। वहां जांच के बाद जो मरीज टीबी से ग्रस्त पाया जाता है, उसे दवा दी जाती है। ऐसे मरीजों को छह माह तक डॉट्स नाम की दवा का सेवन करने के बाद पुन: जांच करानी होती है। नियमित दवा का सेवन करने वाले मरीज इलाज के बाद स्वस्थ हो जाते हैं। जो मरीज नियमित दवा का सेवन नहीं करते या बीच-बीच में रुक रुककर दवाइयां खाते हैं, वे स्वस्थ नहीं होते और वे एमडीआर (मेडिकल ड्र्ग्स रेजिस्टेंट) की श्रेणी में आ जाते हैं।
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ऐसे मरीजों में बीमारी की स्थिति जानने के लिए सीबी नॉट मशीन से जांच करनी पड़ती है। इस मशीन की विशेषता यह है कि एक बार में चार मरीजों के सैंपल की जांच हो जाती है। इसकी रिपोर्ट तैयार होने में लगभग दो घंटे समय लगता है। इस तरह प्रतिदिन 12 मरीजों के सैंपल की जांच हो सकती है। यह मशीन केवल जिला क्षय रोग अधिकारी कार्यालय में बने टीबी क्लीनिक में लगी है। यह मशीन करीब डेढ़ माह से खराब है। ऐसी दशा में यहां सीबी नॉट मशीन से जांच नहीं हो पा रही है। मरीजों का स्पुटम (बलगम) जांच के लिए उन केंद्रों पर भेजना पड़ता है, जहां ट्रू नॉट मशीन लगी है।
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जिले में छह टीबी क्लीनिक में लगी है ट्रू नॉट मशीन
टीबी के गंभीर रोगियों की जांच के लिए ट्रू नॉट मशीन जनपद में छह टीबी क्लीनिकों में लगाई गई है। हालांकि, सीबी नॉट के मुकाबले इसकी क्षमता एक चौथाई है। एक दिन में केवल चार मरीजों के सैंपल की जांच हो पाती है। यह मशीन एक बार में केवल एक सैंपल की जांच कर पाती है। इसकी रिपोर्ट आने में भी दो से ढाई घंटा समय लगता है। यह ट्रू नॉट मशीन अब तक कप्तानगंज, रामकोला, हाटा, तमकुहीराज, दुदही और जिला अस्पताल के टीबी क्लीनिक में लगी है।
क्या है सीबी नॉट मशीन
सीबी नॉट (कार्टिरिज बेस्ड न्यूक्लिक एसिट एम्पलिफिकेशन टेस्ट) मशीन होती है, जिससे एमडीआर (मेडिकल ड्रग्स रेजिस्टेंट) और एक्सडीआर (एक्सटेंसिवली ड्रग रेजिस्टेंट) टीबी के रोगियों का पता लगाया जाता है। सामान्य टीबी से गंभीर रूप एमडीआर टीबी और अति गंभीर रूप एक्सडीआर टीबी होता है।
डीटीओ कार्यालय स्थित टीबी क्लीनिक में लगी सीबी नॉट मशीन में क्या खराबी है, वह किन कारणों से नहीं बन पा रही है, इस बारे में पता किया जाएगा। सीबी नॉट मशीन ठीक कराई जाएगी, ताकि टीबी के गंभीर रोगियों की जांच भी समय से हो सके।
- डॉ. सुरेश पटारिया, सीएमओ