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Kushinagar News: नहर टूटी
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सुकरौली क्षेत्र के बरवां गांव के पास नहर टूटने से डूबी फसल और बंधे की मरम्मत करते गांव के लोग।
- फोटो : KUSHINAGAR
गनेशपुर रजबाहा में पानी छोड़ने से टूटीं नहरें, फसल हुईं जलमग्न
किसान परेशान, मरम्मत में हो रही लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे लोग
सुकरौली। सिंचाई विभाग की तरफ से नहरों की सफाई न कराए जाने, मरम्मत में हो रही लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। मंगलवार रात गनेशपुर बंचरा रजबाहा में पानी आने से एक के बाद एक करके कई जगहों पर नहर टूट गई। इससे किसानों की फसलों में पानी भर गया है।
सुकरौली, गनेशपुर, अवरवां, बरवां, पिजवहिया और पैकौली गांव के आस पास से होकर गुजरने वाली गनेशपुर रजबाहा के किनारे खेती करने वाले किसानों की फसलें नहर के पानी में डूब गई हैं। किसान रामवृक्ष पटेल, रामदेव, बृजलाल, जगदीश, रामनाथ, जैकुल्ला, जलालुद्दीन, रीता, दिलीप और संतोष कुमार और सत्यप्रकाश आदि का कहना है कि नहर को दुरुस्त किए बिना ही अचानक पानी छोड़ दिया गया है, जिससे पटरियां टूट रही हैं। इससे किसानों की फसल डूब रही हैं। सूचना देने के बाद भी विभागीय स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। कुछ जगहों पर किसानों ने खुद बंधों की मरम्मत की, लेकिन वे ज्यादा मजबूत नहीं है। यदि विभाग के लोग पहले ही नहर की सफाई और बंधों की मरम्मत कर दिए होते तो फसल नहीं डूबती। किसानों ने नहर की मरम्मत कराने की मांग की है।
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किसान परेशान, मरम्मत में हो रही लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे लोग
सुकरौली। सिंचाई विभाग की तरफ से नहरों की सफाई न कराए जाने, मरम्मत में हो रही लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। मंगलवार रात गनेशपुर बंचरा रजबाहा में पानी आने से एक के बाद एक करके कई जगहों पर नहर टूट गई। इससे किसानों की फसलों में पानी भर गया है।
सुकरौली, गनेशपुर, अवरवां, बरवां, पिजवहिया और पैकौली गांव के आस पास से होकर गुजरने वाली गनेशपुर रजबाहा के किनारे खेती करने वाले किसानों की फसलें नहर के पानी में डूब गई हैं। किसान रामवृक्ष पटेल, रामदेव, बृजलाल, जगदीश, रामनाथ, जैकुल्ला, जलालुद्दीन, रीता, दिलीप और संतोष कुमार और सत्यप्रकाश आदि का कहना है कि नहर को दुरुस्त किए बिना ही अचानक पानी छोड़ दिया गया है, जिससे पटरियां टूट रही हैं। इससे किसानों की फसल डूब रही हैं। सूचना देने के बाद भी विभागीय स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। कुछ जगहों पर किसानों ने खुद बंधों की मरम्मत की, लेकिन वे ज्यादा मजबूत नहीं है। यदि विभाग के लोग पहले ही नहर की सफाई और बंधों की मरम्मत कर दिए होते तो फसल नहीं डूबती। किसानों ने नहर की मरम्मत कराने की मांग की है।
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