फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kushinagar News ›   By putting up boards of well-known doctors, they provide treatment through quacks.

Kushinagar News: नामी डॉक्टरों का बोर्ड लगाकर झोलाझाप से कराते हैं इलाज

Sun, 29 Oct 2023 12:12 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Sun, 29 Oct 2023 12:12 AM IST
विज्ञापन
By putting up boards of well-known doctors, they provide treatment through quacks.
- विभागीय लापरवाही से निजी अस्पतालों पर नहीं हो रही कार्रवाई
विज्ञापन

- पटल बाबू और नोडल सिर्फ नाम के, शिकायत के बावजूद नहीं होती कार्रवाई
- अस्पतालों में हंगामा या कोई घटना होने के बाद सक्रिय होता है स्वास्थ्य महकमा, अस्पताल को करता सील

पडरौना/तमकुहीराज। नामी गिरामी डॉक्टरों का बोर्ड लगाकर मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करने का कुछ निजी अस्पताल संचालकों का धंधा रुकने का नाम नहीं ले रहा है। कार्रवाई के नाम पर स्वास्थ्य महकमा खानापूर्ति कर लेता है। सीएमओ कार्यालय के आंकड़े के अनुसार जिले में महज 172 निजी अस्पतालों का पंजीकरण है, लेकिन संचालित अस्पतालों की संख्या काफी अधिक है।
जिले के बाकी अवैध निजी अस्पताल सीएमओ के चहेते एक मलेरिया इंस्पेक्टर के रहमोकरम पर संचालित होते हैं। क्योंकि निजी अस्पताल रजिस्ट्रेशन का पटल देखने वाले बाबू का सिर्फ नाम है। तमकुहीराज में दो नवजातों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से अवैध निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कोई अभियान शुरू नहीं किया जा सका है।
विज्ञापन

तमकुहीराज के धुरिया इमिलिया निवासी विकास यादव के जुड़वा नवजातों की मौत तो स्वास्थ्य महकमे के लिए एक बानगी है। तीन माह के अंदर 12 से अधिक लोगों की जान निजी अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही से जा चुकी है। अफसरों तक मामला पहुंचने के बाद कुछ दिनों तक अस्पताल बंद रहा। फिर से चालू हो गया। दोबारा शिकायत पर सीएमओ कार्यालय के पटल देखने वाले बाबू राजकिशोर सिंह का तर्क रहता है कि कागजी कार्रवाई पूरी हो चुकी है। इसलिए निजी अस्पताल संचालित हो रहा है। इसके पूर्व सीएमओ कार्यालय में निजी अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन का पटल बाबू कादिर हाशमी के पास था। अवैध निजी अस्पताल संचालकों की मिलीभगत की भूमिका सामने आने के बाद यह पटल सीएमओ ने बाबू राजकिशोर सिंह को दे दिया, लेकिन राजकिशोर सिंह का नाम भर है। बाकी काम चर्चित एक मलेरिया इंस्पेक्टर देखता है। निजी अस्पतालों पर होने वाली कार्रवाई में नोडल एसीएमओ डॉ. आरके गुप्ता के साथ मलेरिया इंस्पेक्टर भी मौजूद रहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन



00000
शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
-अक्तूबर में तमकुहीराज कस्बे के निजी अस्पताल में बिहार के पंचदेउरी निवासी एक मरीज 18 हजार रुपये में पूरा इलाज कराने की शर्त पर भर्ती किया। 50 हजार से अधिक इलाज के नाम पर लूट लिया गया। इसे लेकर हंगामा और शिकायत भी हुई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। वहीं श्रीसाई अस्पताल बलुआ में मरीज की मौत के बाद हंगामा हुआ और 25 अगस्त को सील किया गया था। तीमारदारों का आरोप था कि इस अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही के कारण मरीज की हालत बिगड़ी थी, जिससे दूसरे अस्पताल में ले गए और वहां मरीज की मौत हो गई। उसके बाद घरवालों ने इस अस्पताल पर शव रखकर प्रदर्शन किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed