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सूर्य को अर्घ्य देकर तोड़ा उपवास
अमर उजाला/कुशीनगर
Updated Wed, 18 Nov 2015 11:48 PM IST
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पडरौना। तीन दिन तक चला छठ पर्व बुधवार की सुबह भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही समाप्त हो गया। दो दिन निर्जला व्रत करने के बाद महिलाओं ने बुधवार को सुबह पारण किया। कई घरों में भक्तों ने मन्नतें पूरी होने पर बच्चों का मुंडन कराने से लेकर कोसी भराई की रस्म निभाई।
छठ घाटों पर मेला लगा रहा, जहां रातभर आतिशबाजी होती रही। पडरौना के छावनी स्थित भन्नुनाथ पोखरा के दोनों छठ घाटों सहित नौका टोले के सुराजी पोखरा, दरबार स्थित रामधाम पोखरा, बावली पोखरा सहित विभिन्न छठ घाटों पर मंगलवार की शाम से ही मेला लगा रहा। व्रती महिलाओं ने छठ माता की पूजा करने के बाद शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की।
जिन भक्तों की मुरादें पूरी हो गई थीं, उन्होंने छठ घाट पर वेदी बनाने से लेकर बच्चों के मुंडन और कोसी भरने की रस्में निभाईं।
व्रती महिलाएं भोर में पुन: छठ घाटों पर पहुंचीं, जहां उन्होंने छठ माता की पूजा करने के साथ ही सूर्य के उदय होने की प्रतीक्षा की। सूर्योदय होते ही श्रद्धालुओं ने पुरोहितों के मंत्रोच्चारण के बीच अर्घ्य दिया।
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छठ घाट भक्तिगीतों से गूंजते रहे। इसी तरह जनपद के सभी हिस्सों में छठ पर्व परंपरागत ढंग से मनाया गया। कुछ जनप्रतिनिधियों ने छठ घाटों पर जाकर महिला श्रद्धालुओं और उनके परिवार के लोगों से भेंट की।
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छठ घाटों पर मेला लगा रहा, जहां रातभर आतिशबाजी होती रही। पडरौना के छावनी स्थित भन्नुनाथ पोखरा के दोनों छठ घाटों सहित नौका टोले के सुराजी पोखरा, दरबार स्थित रामधाम पोखरा, बावली पोखरा सहित विभिन्न छठ घाटों पर मंगलवार की शाम से ही मेला लगा रहा। व्रती महिलाओं ने छठ माता की पूजा करने के बाद शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की।
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जिन भक्तों की मुरादें पूरी हो गई थीं, उन्होंने छठ घाट पर वेदी बनाने से लेकर बच्चों के मुंडन और कोसी भरने की रस्में निभाईं।
व्रती महिलाएं भोर में पुन: छठ घाटों पर पहुंचीं, जहां उन्होंने छठ माता की पूजा करने के साथ ही सूर्य के उदय होने की प्रतीक्षा की। सूर्योदय होते ही श्रद्धालुओं ने पुरोहितों के मंत्रोच्चारण के बीच अर्घ्य दिया।
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छठ घाट भक्तिगीतों से गूंजते रहे। इसी तरह जनपद के सभी हिस्सों में छठ पर्व परंपरागत ढंग से मनाया गया। कुछ जनप्रतिनिधियों ने छठ घाटों पर जाकर महिला श्रद्धालुओं और उनके परिवार के लोगों से भेंट की।