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जिस राह से आए भगवान बुद्ध, उस पर घूम सकेंगे पर्यटक

Thu, 14 Jan 2021 12:12 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 14 Jan 2021 12:12 AM IST
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जिस राह से आए भगवान बुद्ध, उस पर घूम सकेंगे पर्यटक
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पुरैना घाट से कुशीनगर के बुद्धा घाट तक बनेगा कच्चा रास्ता, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की निगरानी में शुरू हुआ काम
संवाद न्यूज एजेंसी
कसया। भगवान बुद्ध ने पावानगर (फाजिलनगर) से कुशीनगर आने के लिए जिस रास्ते का उपयोग किया था, उसे सुव्यवस्थित किया जाएगा। घाघी नदी (कुकुत्था) के पुरैना घाट से लेकर कुशीनगर में हिरण्यवती नदी के बुद्धा घाट तक प्रशासन नदी के एक किनारे की सफाई करा रहा है। इसे एक तरफ मधुरिया में फोरलेन से भी जोड़ा जाएगा। करीब 13 किलोमीटर लंबे इस रास्ते को फिलहाल कच्चा ही रखा जाएगा। इस पर काम शुरू हो गया है।
अपने जीवन के अंतिम दिनों में भगवान बुद्ध उपदेश देते हुए वापस अपने घर की ओर लौट रहे थे। तत्कालीन मल्ल राज्य पावानगर (वर्तमान फाजिलनगर) में विश्राम के बाद वे कुशीनारा (कुशीनगर) के लिए चले थे। दोनों राज्यों की सीमा पर घाघी (कुकुत्था) नदी के पुरैना घाट पर ही हिरण्यवती नदी भी जाकर मिलती है। यहां आसपास आज भी विशाल जंगल है। जिसमें मां कुलकुला देवी का मंदिर भी है। इतिहासकारों के मतानुसार, भगवान बुद्ध पुरैना घाट को पार करने के बाद हिरण्यवती नदी के किनारे चलते हुए कुशीनगर पहुंचे थे। इसे इतिहासकार बुद्ध गमन मार्ग का हिस्सा मानते हैं। हाल में प्रशासन और टेंपल एरिया मैनेजमेंट कमेटी के सदस्यों की बैठक में कुकुत्था नदी से हिरण्यवती नदी के बुद्धा घाट तक हेरिटेज वॉक की योजना पर चर्चा की गई थी। तय हुआ कि पहले नदी के किनारे की सफाई कराकर एक कच्चा रास्ता बनाया जाए जिस पर भगवान बुद्ध के अनुयायी चलकर पूजा कर सकेंगे। इस रास्ते को फोरलेन के मधुरिया पुल से जोड़ा जाएगा। बुधवार को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कसया पूर्ण बोरा की अगुवाई मधुरिया के पास स्थित कुकुत्था नदी के घाट से सफाई शुरू हुई।
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डीएम एस राजलिंगम की अध्यक्षता में मंगलवार को कुशीनगर के एक होटल में टेंपल एरिया मैनेजमेंट कमेटी के सदस्यों के साथ बैठक हुई थी। इसमें बुद्ध गमन मार्ग पर भी चर्चा हुई थी। मधुरिया से पुरैना घाट और वहां से कुशीनगर के बुद्धा घाट तक 13 किलोमीटर लंबे हेरिटेज वॉक वे को सुव्यवस्थित करने का काम शुरू करा दिया गया है। जेसीबी से सफाई कर भूमि के समतल किया जा रहा है। पहले यह वॉक-वे कच्चा ही रहेगा। यह वॉक-वे पर्यटकों को इतिहासकारों को भगवान बुद्ध के कुशीनगर आगमन की कहानी से परिचित कराएगा।
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- पूर्ण वोरा- ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कसया
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