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‘बुद्ध की जीवन पद्धति से विश्व शांति संभव’
अमर उजाला/कुशीनगर
Updated Mon, 23 Nov 2015 11:41 PM IST
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कसया (कुशीनगर)। केंद्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय सारनाथ के कुलपति प्रो. एलएन शास्त्री ने सोमवार को यहां कहा कि बुद्ध की जीवन पद्धति से ही विश्व में शांति की स्थापना की जा सकती है।
विश्व के सभी देशों में अशांति का माहौल कायम है। इससे निजात दिलाने के लिए बुद्ध के उपदेशों को जन-जन तक पहुंचाना होगा। उन्होंने कहा कि अशांति के रोग को पहचान कर उसका सही इलाज करना होगा।
प्रोफेसर शास्त्री मुख्य अतिथि के रूप में कुशीनगर में आयोजित तीन दिवसीय बौद्ध महोत्सव का शुभारंभ करने के बाद समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध ने सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाया था। मौजूदा समय में हिंसा का बोलबाला है, इससे छुटकारा पाने के लिए बुद्ध के शरण में जाना होगा और उनके बताए गए मार्ग को अपनाना होगा।
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उन्होंने कहा कि कुशीनगर के बाद लुंबिनी, बोधगया और सारनाथ में भी बौद्ध महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इससे समाज के सभी वर्ग के लोगों तक भगवान बुद्ध के उपदेशों को पहुंचाने में मदद मिलेगी। समारोह का शुभारंभ अतिथियों की ओर से दीप जलाकर किया गया।
इसके बाद बौद्ध भिक्षुओं की ओर से बुद्ध वंदना प्रस्तुत की गई। इस मौके पर केंद्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यायल सारनाथ के प्रोफेसर वंगचुक दोरजे नेगी, केंद्रीय बौद्ध विद्या संस्थान लेह-लद्दाख के डॉ. रमेशचंद्र नेगी, डॉ. कुंद छेम रिगझिन, केंद्रीय हिमालयी संस्कृति शिक्षण संस्थान के केमो पादो ने विचार व्यक्त किए।
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विश्व के सभी देशों में अशांति का माहौल कायम है। इससे निजात दिलाने के लिए बुद्ध के उपदेशों को जन-जन तक पहुंचाना होगा। उन्होंने कहा कि अशांति के रोग को पहचान कर उसका सही इलाज करना होगा।
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प्रोफेसर शास्त्री मुख्य अतिथि के रूप में कुशीनगर में आयोजित तीन दिवसीय बौद्ध महोत्सव का शुभारंभ करने के बाद समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध ने सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाया था। मौजूदा समय में हिंसा का बोलबाला है, इससे छुटकारा पाने के लिए बुद्ध के शरण में जाना होगा और उनके बताए गए मार्ग को अपनाना होगा।
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उन्होंने कहा कि कुशीनगर के बाद लुंबिनी, बोधगया और सारनाथ में भी बौद्ध महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इससे समाज के सभी वर्ग के लोगों तक भगवान बुद्ध के उपदेशों को पहुंचाने में मदद मिलेगी। समारोह का शुभारंभ अतिथियों की ओर से दीप जलाकर किया गया।
इसके बाद बौद्ध भिक्षुओं की ओर से बुद्ध वंदना प्रस्तुत की गई। इस मौके पर केंद्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यायल सारनाथ के प्रोफेसर वंगचुक दोरजे नेगी, केंद्रीय बौद्ध विद्या संस्थान लेह-लद्दाख के डॉ. रमेशचंद्र नेगी, डॉ. कुंद छेम रिगझिन, केंद्रीय हिमालयी संस्कृति शिक्षण संस्थान के केमो पादो ने विचार व्यक्त किए।