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Kushinagar News: तीन भाषाओं में लिखीं किताबें, बौद्ध साहित्य को दी नई पहचान
Sat, 01 Nov 2025 02:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Sat, 01 Nov 2025 02:17 AM IST
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भदंत एबी ज्ञानेश्वर के अंतिम दर्शन को उमड़े लोग। स्रोत-सोशल मीडिया
कुशीनगर। बौद्ध धर्म के प्रखर साधक भदन्त एबी ज्ञानेश्वर ने अपने लेखन से न केवल बौद्ध दर्शन को नई दिशा दी, बल्कि उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान भी दिलाई है। उन्होंने तीन भाषाओं हिंदी, अंग्रेजी और नेवारी में रचनाएं कर यह साबित किया है कि धम्म का संदेश भाषा की सीमाओं से परे, मानवता की आत्मा तक पहुंचता है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के हाथों से कई बार सम्मानित हुए और बौद्ध धर्म को ऊंचाई पर पहुंचाने का कार्य किया।
सात समंदर पार तक इससे जुड़े कई यात्राएं भी कीं। भदन्त एबी ज्ञानेश्वर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्थानों व बौद्ध धर्म से जुड़े संगठनों में प्रतिनिधित्व करना का मौका मिला था। वे इन अवसरों को चुनौती समझकर काम करते थे।
उन्होंने बुद्ध के उपदेशों को विश्व में पहुंचाने के लिए धार्मिक यात्राएं कीं। धार्मिक यात्रा के दौरान उन देशों को भारत के संबंध प्रगाढ़ करने के लिए बुद्ध के आष्टांगिक मार्ग के अनुसरण के लिए लोगों को प्रेरित करते रहे। बौद्ध धर्म में चार प्रमुख तीर्थ स्थलों में से कुशीनगर भी प्रमुख है।
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इसके महत्व को भी विदेश में बौद्ध अनुयायियों व उपासक-उपासिकाओं के बीच साझा कर कुशीनगर की तरफ उनका ध्यान आकृष्ट कराने का भी काम किया था। भदन्त एबी ज्ञानेश्वर बुद्ध की धरती कुशीनगर को देश से लेकर विदेश तक पहचान दिलाया। ताउम्र वह भगवान बुद्ध का संदेश जन जन पहुंचाया।
कुशीनगर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनको सम्मानित किया था। सुप्रसिद्ध कृति ‘धम्मपद’ दो भागों में प्रकाशित हुई है, जिसमें उनके जीवन के प्रेरणास्रोत प्रसंगों के साथ बौद्ध धर्म के मूल तत्वों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
हिंदी और अंग्रेजी दोनों संस्करणों में प्रकाशित इस पुस्तक ने न केवल भारत में, बल्कि नेपाल, श्रीलंका और म्यांमार जैसे देशों में भी पाठकों को आकर्षित किया है। इसके अतिरिक्त नेपाल की नेवारी भाषा में ‘कथिन दान का महत्व’ नामक पुस्तक लिखी है, जो बौद्ध परंपरा में दान की पवित्र भावना को उजागर करती है।
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सात समंदर पार तक इससे जुड़े कई यात्राएं भी कीं। भदन्त एबी ज्ञानेश्वर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्थानों व बौद्ध धर्म से जुड़े संगठनों में प्रतिनिधित्व करना का मौका मिला था। वे इन अवसरों को चुनौती समझकर काम करते थे।
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उन्होंने बुद्ध के उपदेशों को विश्व में पहुंचाने के लिए धार्मिक यात्राएं कीं। धार्मिक यात्रा के दौरान उन देशों को भारत के संबंध प्रगाढ़ करने के लिए बुद्ध के आष्टांगिक मार्ग के अनुसरण के लिए लोगों को प्रेरित करते रहे। बौद्ध धर्म में चार प्रमुख तीर्थ स्थलों में से कुशीनगर भी प्रमुख है।
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इसके महत्व को भी विदेश में बौद्ध अनुयायियों व उपासक-उपासिकाओं के बीच साझा कर कुशीनगर की तरफ उनका ध्यान आकृष्ट कराने का भी काम किया था। भदन्त एबी ज्ञानेश्वर बुद्ध की धरती कुशीनगर को देश से लेकर विदेश तक पहचान दिलाया। ताउम्र वह भगवान बुद्ध का संदेश जन जन पहुंचाया।
कुशीनगर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनको सम्मानित किया था। सुप्रसिद्ध कृति ‘धम्मपद’ दो भागों में प्रकाशित हुई है, जिसमें उनके जीवन के प्रेरणास्रोत प्रसंगों के साथ बौद्ध धर्म के मूल तत्वों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
हिंदी और अंग्रेजी दोनों संस्करणों में प्रकाशित इस पुस्तक ने न केवल भारत में, बल्कि नेपाल, श्रीलंका और म्यांमार जैसे देशों में भी पाठकों को आकर्षित किया है। इसके अतिरिक्त नेपाल की नेवारी भाषा में ‘कथिन दान का महत्व’ नामक पुस्तक लिखी है, जो बौद्ध परंपरा में दान की पवित्र भावना को उजागर करती है।