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पांच महीने में भी चालू नहीं हो सकी ब्लड कंपोनेंट यूनिट

Mon, 23 May 2022 11:36 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 23 May 2022 11:36 PM IST
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Blood component unit could not be started even in five months
ब्लड बैंक के प्रथम तल पर बन रहा ब्लड कंपोनेंट यूनिट। - फोटो : KUSHINAGAR
पांच महीने में भी चालू नहीं हो सकी ब्लड कंपोनेंट यूनिट
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ब्लड कंपोनेंट यूनिट लग जाने से एक यूनिट खून से बचाई जा सकेगी चार लोगों की जान
कुशीनगर। जिला अस्पताल में ब्लड कंपोनेंट यूनिट का भवन बनकर हस्तांतरित नहीं हो सका है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक यहां पंखे, एसी और टाइल्स का काम बाकी है। इसके चालू न होने के कारण प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, आरबीसी जैसे तत्वों को अलग से चढ़वाने वाले मरीजों की समस्या बनी हुई है। कई गंभीर बीमारियों में मरीजों के लिए होल ब्लड लेना पड़ता है। जबकि यूनिट चालू हो जाने से एक यूनिट खून से चार लोगों की जान बचाई जा सकेगी।
जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक के ऊपर करीब पांच माह से ब्लड कंपोनेंट यूनिट का निर्माण चल रहा है। इसके चालू हो जाने से होल ब्लड चढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके बाद ब्लड से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा और आरबीसी जैसे तत्वों को अलग करने की सुविधा हो जाएगी। जिस मरीज को खून के जिस तत्व की आवश्यकता होगी, उसे वही चढ़ाया जा सकेगा। इस यूनिट में मशीन लग जाने से थैलीसिमिया, एनीमिया, हीमोफीलिया, डेंगू या किसी अन्य संक्रमण से प्लेट लेट्स घटने के कारण गंभीर हालत में पहुंचे मरीजों के इलाज में भी मदद मिलेगी और उन्हें मेडिकल कॉलेज जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में इस यूनिट को लगाने के लिए 150 वर्गमीटर जमीन की आवश्यकता थी। परिसर में अन्य कहीं जगह न मिलने के कारण इसे ब्लड बैंक के ऊपर बनाया जा रहा है।
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कई रोगों से बचाव में होगा सहायक
ब्लड कंपोनेंट मशीन खून में शामिल तत्वों को अलग-अलग कर देती है। थैलीसिमिया के मरीजों को आरबीसी, डेंगू के मरीजों को प्लेट लेट्स, बर्न के मरीजों को प्लाज्मा, एफएफपी और एड्स के मरीजों को डब्ल्यूबीसी की जरूरत पड़ती है। यह मशीन आरबीसी, श्वेत रक्त कणिकाएं, फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा, एफएफपी, लाल रक्त कणिकाएं, डब्ल्यूबीसी, प्लेट लेट्स, प्लाज्मा को अलग-अलग कर देती है। ऐसी स्थिति में मरीज को एक यूनिट खून चढ़ाने की जगह आवश्यक तत्व ही चढ़ाए जाते हैं। इसका लाभ यह होता है कि एक यूनिट खून में से चार मरीजों की जिंदगी बचाई जा सकती है।
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जनपद में कहीं नहीं है ब्लड कंपोनेंट मशीन
दुर्घटना से लेकर गंभीर बीमारियों, एनीमिया सहित अन्य स्थितियों में मरीजों को खून चढ़ाने की आवश्यकता होती है, लेकिन जनपद में कहीं भी ब्लड कंपोनेंट मशीन नहीं है। ऐसे में प्लेट लेट्स, प्लाज्मा, आरबीसी, डब्ल्यूबीसी आदि चढ़ाने के लिए लोगों को मेडिकल कॉलेज लेकर जाना पड़ता है। इसमें समय और धन खर्च होने के अलावा जोखिम भी रहता है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में कंपोनेंट मशीन लग जाने से यह समस्या दूर होगी।

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कोट
ब्लड कंपोनेेंट यूनिट के लिए 150 वर्गमीटर जमीन की जरूरत थी। जिला अस्पताल परिसर में ब्लड बैंक के ऊपर ही इसे बनाया जा रहा है। ब्लड कंपोनेंट यूनिट का भवन अभी पूरी तरह से नहीं बना है। स्वास्थ्य विभाग के जेई की देखरेख में काम हो रहा है। उन्हें शीघ्र काम पूर्ण कराकर हस्तांतरित करने को कहा गया है। ताकि ब्लड कंपोनेंट यूनिट को जल्द चालू किया जा सके।
डॉ. एसके वर्मा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक,
जिला अस्पताल
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