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छह माह में भी नहीं लग सकी ब्लड कंपोनेंट यूनिट

Tue, 19 Jul 2022 01:39 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 19 Jul 2022 01:39 AM IST
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Blood componaent seperation Mashine has not intalledBlood componaent seperation Mashine has not intalled
ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन मशीन लगाने का काम सुस्त
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कुशीनगर। जरूरतमंद मरीजों को खून चढ़ाने में आने वाली समस्याओं को दूर करने के लिए जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में ब्लड कंपोनेंट मशीन लगाई जा रही है। लेकिन, इस यूनिट को स्थापित करने का काम लगभग छह माह में भी पूरा नहीं हो सका है। यदि इस यूनिट को तैयार कर चालू करा दिया जाए तो एक यूनिट खून से चार मरीजों की जिंदगी बचाई जा सकेगी।
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में अभी तक इतनी ही सुविधा है कि जरूरतमंद मरीज को उसके किसी सगे संबंधी या रक्तदाता का खून निकालकर चढ़ा दिया जाता है या फिर उस ग्रुप का खून न होने पर ब्लड बैंक में एक्सचेंज (अदला-बदली) कर दी जाती है। मरीज को अभी तक यहां होल ब्लड ही चढ़ाने की सुविधा है। वहीं, यदि ब्लड कंपोनेंट यूनिट चालू कर दी जाए तो यहां होल ब्लड से लाल रक्त कणिकाएं (आरबीसी), श्वेत रक्त कणिकाएं (डब्ल्यूबीसी), प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा (एफएफपी) को अलग करके मरीज को चढ़ाया जा सकेगा।
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डेंगू सहित कई रोगों में इस तरह के खून की आवश्यकता होती है, लेकिन जिला अस्पताल में सिर्फ होल ब्लड के आदान-प्रदान की ही सुविधा होने की वजह से लोगों को मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है।
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खून में शामिल तत्वों को अलग कर देती है ब्लड कंपोनेंट मशीन
ब्लड बैंक से जुड़े जानकारों के मुताबिक, ब्लड कंपोनेंट मशीन खून में शामिल तत्वों को अलग-अलग कर देती है। थैलेसीमिया के मरीजों को आरबीसी, डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स, बर्न के मरीजों को प्लाज्मा, एफएफपी और एड्स के मरीजों को डब्ल्यूबीसी की जरूरत पड़ती है। यह मशीन आरबीसी, श्वेत रक्त कणिकाएं, फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा, एफएफपी, लाल रक्त कणिकाएं, डब्ल्यूबीसी, प्लेटलेट्स, प्लाज्मा को अलग-अलग कर देती है। ऐसी स्थिति में मरीज को एक यूनिट खून चढ़ाने की जगह आवश्यक तत्व ही चढ़ाए जाते हैं। इसका लाभ यह होता है कि एक यूनिट खून में से चार मरीजों की जिंदगी बचाई जा सकती है।
जनपद में कहीं नहीं है ब्लड कंपोनेंट मशीन
दुर्घटना से लेकर गंभीर बीमारियों, एनीमिया सहित अन्य स्थितियों में मरीजों को खून चढ़ाने की आवश्यकता होती है, लेकिन जनपद में कहीं भी ब्लड कंपोनेंट मशीन नहीं है। ऐसे में प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, आरबीसी, डब्ल्यूबीसी आदि चढ़ाने के लिए लोगों को मेडिकल कॉलेज लेकर जाना पड़ता है। इसमें समय और धन खर्च होने के अलावा जोखिम भी अधिक रहता है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में कंपोनेंट मशीन लग जाने से यह समस्या दूर होगी।

जिला अस्पताल में स्थित ब्लड बैंक के ऊपर ही ब्लड कंपोनेंट यूनिट स्थापित की जा रही है। इस यूनिट के लिए भवन का काम पूरा नहीं हो पाया है। उपकरण भी लगने हैं। यहां रक्तदाताओं के बैठने के लिए कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है। अभी इस मद में रकम भी पड़ी हुई है। कार्यदायी संस्था को इसे पूर्ण कराने के लिए कई बार कहा जा चुका है।
-डॉ. एसके वर्मा, सीएमएस जिला, अस्पताल
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