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Kushinagar News: बड़े तस्करों ने बदला रुख, मुख्य मार्ग के बजाय ग्रामीण रास्तों का कर रहे प्रयोग
Mon, 25 Sep 2023 01:27 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Mon, 25 Sep 2023 01:27 AM IST
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चोरी और तस्करी के सामानों को अपराधी गियरबॉक्स के बगल में खाली बॉक्स बनवाकर छिपाते हैं। स्रोत: स
- चरस, गांजा, शराब सहित अन्य मादक पदार्थों की जनपद के रास्ते होती है तस्करी
- शनिवार को हाटा कोतवाली क्षेत्र के झांगा के पास चार करोड़ की चरस के साथ पकडे गए थे पांच तस्कर
- टोल प्लाजा से आगे बढ़ने पर बदल देते हैं गाड़ी, नंबर और चालक भी
- गियर बॉक्स के बगल में बनवा लेते हैं लोहे या स्टिल की बॉक्स, रखते हैं तस्करी का सामान
- गाड़ी के इंटीरियल में रखते हैं तस्करी का सामान, सटीक मुखबीरी से ही पकड़ में आ पाते हैं तस्कर
- बिहार और नेपाल से कुशीनगर की दूरी कम होने के कारण अपराध करने के बाद आसानी से भाग निकलते हैं
कुशीनगर। जनपद से होकर चरस, शराब, गांजा सहित अन्य मादक वस्तुओं की तस्करी अभी भी जारी है। तस्कर अपने मंसूबों को सफल बनाने के लिए तरह-तरह के तरीके अपना रहे हैं। लग्जरी गाड़ियों में नीचे गियर बॉक्स के बगल में लोहे या स्टील की स्कीम (बॉक्स) बनवा ले रहे हैं, जिसमें तस्करी का सामान रख ले रहे हैं। इसके अलावा गाड़ियों के फाटक, सीट के नीचे और अन्य गोपनीय जगह तस्करी का सामान छिपाकर चल रहे हैं। बड़े तस्कर तो लक्जरी गाड़ियों से तस्करी कर रहे हैं। जब तक पुलिस की मुखबीरी सटीक नहीं होती, तब तक किसी गाड़ी को पुलिस छूती भी नहीं है।
इसके अलावा यदि मुख्य रास्ते से गुजरते हैं तो टोल प्लाजा के बाद गाड़ी, नंबर और चालक तक बदल देते हैं या फिर इन झंझटों से बचने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के प्रमुख मार्गों का प्रयोग करते हैं। ग्रामीण क्षेत्र की प्रमुख सड़क पर तस्करों के पकड़े जाने का ताजा उदाहरण शनिवार को हाटा कोतवाली क्षेत्र के झांगा बाजार का मामला है, जहां पुलिस ने सटीक मुखबीरी के आधार पर चार करोड़ की चरस के साथ पांच तस्करों को गिरफ्तार किया था।
कुशीनगर जनपद की तीन तहसीलें बिहार से लगती हैं। खड्डा, पडरौना और तमकुहीराज। इनमें खड्डा और तमकुहीराज पहले मादक पदार्थों से लगायत पशुओं की तस्करी के लिए कुख्यात था। नेपाल से मसालों तक की तस्करी होती थी। धीरे-धीरे पुलिस प्रशासन की सक्रियता बढ़ी तो इस तरह की अपराधिक घटनाओं में कुछ कमी आई, लेकिन अभी पूरी तरह बंद नहीं हुई है। पडरौना तहसील क्षेत्र के जटहां बाजार और बांसी के रास्ते भी बिहार के चौतरवा, बेतिया, पश्चिमी चंपारण और अन्य जगह शराब व अन्य मादक पदार्थ ले जाते समय तस्कर पकड़े जा चुके हैं। हाल के दिनों में ही गांजा, शराब की कई बड़ी खेप जिले में पकड़ी जा चुकी है। यहां तक कि चरस तक पकड़ा जा रहा है।
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तस्करी में बदला है ट्रांसपाेटेशन का तरीका
तस्कर पहले बाइक, पिकअप और अन्य ऐसे वाहनों का उपयोग करते थे, जो चेकिंग के दौरान आसानी से पकड़ लिए जाते थे, लेकिन तस्करों ने अपना तरीका बदल दिया है। अब लग्जरी गाड़ियों से चल रहे हैं। कुछ शातिर तस्कर तो किसी पार्टी का झंडा भी गाड़ी पर लगा लेते हैं, ताकि उन पर पुलिस को शक न होने पाए। अगर गाड़ी रोक भी ली गई तब भी बिना गहन जांच के पकड़े नहीं जाते। पुलिसकर्मी ऊपर से देखकर ही उन्हें आगे बढ़ने की हरी झंडी दे देते हैं।
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बड़े तस्कर बड़ी गाड़ियों का करते हैं प्रयोग
बड़े स्तर के तस्कर जो चरस या अन्य मादक पदार्थों की तस्करी कर रहे हैं, वे गाड़ियां भी लग्जरी रख रह रहे हैं। ताकि उन पर पुलिस को आसानी से शक न होने पाए। पहनावे और गाड़ियों की स्थिति देख पुलिस भी उन पर हाथ नहीं डालती और वे आगे बढ़ते जाते हैं।
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बदलते जाते हैं चालक और गाड़ी का नंबर-
पुलिस की जांच पड़ताल में सामने आया है कि बड़े तस्कर यदि मुख्य मार्ग से गुजरते हैं तो टोल प्लाजा पार करने के बाद चालक और गाड़ी का नंबर बदल देते हैं। क्योंकि टोल प्लाजा के कैमरे में उनकी तस्वीर आ चुकी होती है। अगले टोल प्लाजा पर उन्हें पकड़ा न जा सके, इसलिए ऐसा पैतरा आजमाते हैं। इसके अलावा गाड़ी भी बदलनी पड़ती है।
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लग्जरी गाड़ियों में स्कीम (बॉक्स) इंटीरियल में छिपाकर रखते हैं तस्करी का सामान
तस्करों ने गाड़ियों को ही इस ढंग से तैयार करा लिया है कि उसके अंदर चरस, गांजा और शराब तक छिपा लेते हैं और जल्दी पकड़ में नहीं आते। क्योंकि एक तो लग्जरी गाड़ी, दूसरे उनका पहनावा देखकर पुलिस संदेह नहीं कर पाती और अगर वाहन चेकिंग के नाम पर रोक भी लिया तो गाड़ी के अंदर झांककर हल्की-फुल्की जांच के बाद छोड़ देती है। गाड़ी के अंदर स्कीम को गाड़ी के नीचे गियर बॉक्स के बगल में नटबोल्ट या वेल्डिंग से जोड़ा जाता है। इसलिए भी संदेह नहीं होता। गाड़ी की विधिवत जांच में ही तस्करी का सामान बरामद होता है।
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तस्करी का ट्रेंड हाइटेक होता जा रहा है, इसलिए पुलिस के लिए चुनौतियां भी बढ़ती जा रही हैं। सामान्य रूप से तस्करों को पकड़ना मुश्किल हो गया है। लक्जरी गाड़ियां और उनके पहनावे से पहचानना मुश्किल होता है। इसलिए बिना सटीक मुखबीरी के पकड़े भी नहीं जाते। कुशीनगर में तस्करों के कई सदस्य पकड़े गए हैं, जिन्हांने पूछताछ में बताया है कि मुख्य मार्ग से जाते समय गाड़ी, उसका नंबर और चालक बदल देते हैं, ताकि पकड़े न जाएं। ग्रामीण क्षेत्रों के रास्तों से भी तस्कर आते-जाते पकड़े जा रहे हैं।
-धवल जायसवाल, पुलिस अधीक्षक
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- शनिवार को हाटा कोतवाली क्षेत्र के झांगा के पास चार करोड़ की चरस के साथ पकडे गए थे पांच तस्कर
- टोल प्लाजा से आगे बढ़ने पर बदल देते हैं गाड़ी, नंबर और चालक भी
- गियर बॉक्स के बगल में बनवा लेते हैं लोहे या स्टिल की बॉक्स, रखते हैं तस्करी का सामान
- गाड़ी के इंटीरियल में रखते हैं तस्करी का सामान, सटीक मुखबीरी से ही पकड़ में आ पाते हैं तस्कर
- बिहार और नेपाल से कुशीनगर की दूरी कम होने के कारण अपराध करने के बाद आसानी से भाग निकलते हैं
कुशीनगर। जनपद से होकर चरस, शराब, गांजा सहित अन्य मादक वस्तुओं की तस्करी अभी भी जारी है। तस्कर अपने मंसूबों को सफल बनाने के लिए तरह-तरह के तरीके अपना रहे हैं। लग्जरी गाड़ियों में नीचे गियर बॉक्स के बगल में लोहे या स्टील की स्कीम (बॉक्स) बनवा ले रहे हैं, जिसमें तस्करी का सामान रख ले रहे हैं। इसके अलावा गाड़ियों के फाटक, सीट के नीचे और अन्य गोपनीय जगह तस्करी का सामान छिपाकर चल रहे हैं। बड़े तस्कर तो लक्जरी गाड़ियों से तस्करी कर रहे हैं। जब तक पुलिस की मुखबीरी सटीक नहीं होती, तब तक किसी गाड़ी को पुलिस छूती भी नहीं है।
इसके अलावा यदि मुख्य रास्ते से गुजरते हैं तो टोल प्लाजा के बाद गाड़ी, नंबर और चालक तक बदल देते हैं या फिर इन झंझटों से बचने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के प्रमुख मार्गों का प्रयोग करते हैं। ग्रामीण क्षेत्र की प्रमुख सड़क पर तस्करों के पकड़े जाने का ताजा उदाहरण शनिवार को हाटा कोतवाली क्षेत्र के झांगा बाजार का मामला है, जहां पुलिस ने सटीक मुखबीरी के आधार पर चार करोड़ की चरस के साथ पांच तस्करों को गिरफ्तार किया था।
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कुशीनगर जनपद की तीन तहसीलें बिहार से लगती हैं। खड्डा, पडरौना और तमकुहीराज। इनमें खड्डा और तमकुहीराज पहले मादक पदार्थों से लगायत पशुओं की तस्करी के लिए कुख्यात था। नेपाल से मसालों तक की तस्करी होती थी। धीरे-धीरे पुलिस प्रशासन की सक्रियता बढ़ी तो इस तरह की अपराधिक घटनाओं में कुछ कमी आई, लेकिन अभी पूरी तरह बंद नहीं हुई है। पडरौना तहसील क्षेत्र के जटहां बाजार और बांसी के रास्ते भी बिहार के चौतरवा, बेतिया, पश्चिमी चंपारण और अन्य जगह शराब व अन्य मादक पदार्थ ले जाते समय तस्कर पकड़े जा चुके हैं। हाल के दिनों में ही गांजा, शराब की कई बड़ी खेप जिले में पकड़ी जा चुकी है। यहां तक कि चरस तक पकड़ा जा रहा है।
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तस्करी में बदला है ट्रांसपाेटेशन का तरीका
तस्कर पहले बाइक, पिकअप और अन्य ऐसे वाहनों का उपयोग करते थे, जो चेकिंग के दौरान आसानी से पकड़ लिए जाते थे, लेकिन तस्करों ने अपना तरीका बदल दिया है। अब लग्जरी गाड़ियों से चल रहे हैं। कुछ शातिर तस्कर तो किसी पार्टी का झंडा भी गाड़ी पर लगा लेते हैं, ताकि उन पर पुलिस को शक न होने पाए। अगर गाड़ी रोक भी ली गई तब भी बिना गहन जांच के पकड़े नहीं जाते। पुलिसकर्मी ऊपर से देखकर ही उन्हें आगे बढ़ने की हरी झंडी दे देते हैं।
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बड़े तस्कर बड़ी गाड़ियों का करते हैं प्रयोग
बड़े स्तर के तस्कर जो चरस या अन्य मादक पदार्थों की तस्करी कर रहे हैं, वे गाड़ियां भी लग्जरी रख रह रहे हैं। ताकि उन पर पुलिस को आसानी से शक न होने पाए। पहनावे और गाड़ियों की स्थिति देख पुलिस भी उन पर हाथ नहीं डालती और वे आगे बढ़ते जाते हैं।
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बदलते जाते हैं चालक और गाड़ी का नंबर-
पुलिस की जांच पड़ताल में सामने आया है कि बड़े तस्कर यदि मुख्य मार्ग से गुजरते हैं तो टोल प्लाजा पार करने के बाद चालक और गाड़ी का नंबर बदल देते हैं। क्योंकि टोल प्लाजा के कैमरे में उनकी तस्वीर आ चुकी होती है। अगले टोल प्लाजा पर उन्हें पकड़ा न जा सके, इसलिए ऐसा पैतरा आजमाते हैं। इसके अलावा गाड़ी भी बदलनी पड़ती है।
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लग्जरी गाड़ियों में स्कीम (बॉक्स) इंटीरियल में छिपाकर रखते हैं तस्करी का सामान
तस्करों ने गाड़ियों को ही इस ढंग से तैयार करा लिया है कि उसके अंदर चरस, गांजा और शराब तक छिपा लेते हैं और जल्दी पकड़ में नहीं आते। क्योंकि एक तो लग्जरी गाड़ी, दूसरे उनका पहनावा देखकर पुलिस संदेह नहीं कर पाती और अगर वाहन चेकिंग के नाम पर रोक भी लिया तो गाड़ी के अंदर झांककर हल्की-फुल्की जांच के बाद छोड़ देती है। गाड़ी के अंदर स्कीम को गाड़ी के नीचे गियर बॉक्स के बगल में नटबोल्ट या वेल्डिंग से जोड़ा जाता है। इसलिए भी संदेह नहीं होता। गाड़ी की विधिवत जांच में ही तस्करी का सामान बरामद होता है।
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तस्करी का ट्रेंड हाइटेक होता जा रहा है, इसलिए पुलिस के लिए चुनौतियां भी बढ़ती जा रही हैं। सामान्य रूप से तस्करों को पकड़ना मुश्किल हो गया है। लक्जरी गाड़ियां और उनके पहनावे से पहचानना मुश्किल होता है। इसलिए बिना सटीक मुखबीरी के पकड़े भी नहीं जाते। कुशीनगर में तस्करों के कई सदस्य पकड़े गए हैं, जिन्हांने पूछताछ में बताया है कि मुख्य मार्ग से जाते समय गाड़ी, उसका नंबर और चालक बदल देते हैं, ताकि पकड़े न जाएं। ग्रामीण क्षेत्रों के रास्तों से भी तस्कर आते-जाते पकड़े जा रहे हैं।
-धवल जायसवाल, पुलिस अधीक्षक