{"_id":"5dea9a0c8ebc3e1c0266fa52","slug":"bhadant-gyaneshwar-booked-kushinagar-news-gkp3322309162","type":"story","status":"publish","title_hn":"अग्ग महापंडित भदंत ज्ञानेश्वर, बर्मी मंदिर के प्रबंधक समेत कई अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अग्ग महापंडित भदंत ज्ञानेश्वर, बर्मी मंदिर के प्रबंधक समेत कई अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज
Sat, 07 Dec 2019 12:23 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
डिजिटल न्यूज डेस्क, कसया(कुशीनगर)।
डिजिटल न्यूज डेस्क, कसया(कुशीनगर)।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 07 Dec 2019 12:23 PM IST
विज्ञापन
मुख्य मंदिर के उत्तरी गेट के सटे बना नया गेट।
- फोटो : KUSHINAGAR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुशीनगर के मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर के उत्तरी गेट से सटे बर्मी मंदिर की ओर से एक और नया गेट बनाने के मामले में पुरातत्व विभाग की तरफ से कुशीनगर भिक्षु संघ अध्यक्ष व बुद्ध पीजी कॉलेज प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष एबी ज्ञानेश्वर व बर्मी मंदिर मैनेजर समेत कई अज्ञात के खिलाफ प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम की धारा 30 ए के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है।
मंगलवार शाम मंदिर के उत्तरी गेट की बाहर की तरफ बर्मी मंदिर की ओर से सटे नया गेट का निर्माण शुरू कराया गया। पुरातत्व विभाग के कर्मचारी ने स्थानीय प्रशासन व विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अभिषेक पांडेय ने बुधवार दोपहर बाद जायजा लिया था।
उन्होंने मुकदमा दर्ज कराने को कहा था। बृहस्पतिवार देर रात स्मारक परिचर नंदलाल गुप्ता की तहरीर पर बर्मी मंदिर के प्रबंधक रामनगीना व अग्ग महापंडित भदंत ज्ञानेश्वर समेत अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
विज्ञापन
एसओ ज्ञानेंद्र कुमार राय ने कहा विभागीय अधिकारी और कर्मचारी की तरफ से मिली तहरीर पर संबंधित धारा में मुकदमा दर्ज कर जांच पड़ताल की जा रही है।
दो वर्ष तक की सजा का है प्रावधान
कसया। प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम के उल्लंघन के मामले में दोष सिद्ध होने पर दो वर्ष से अधिक के कारावास से या ऐसे जुर्माने से जो एक लाख रुपये तक हो सकेगा या दोनों से दंडनीय होगा। मुख्य मंदिर प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल और अवशेष (संशोधन और विधिमान्य करण) विधेयक 29 मार्च 2010 के मूल नियम 9 की अधिनियम की धारा 30 क एवं ख के तहत संरक्षित स्मारक पुरातात्विक क्षेत्र, बाउंड्री से 100 मीटर तक का क्षेत्र किसी भी प्रकार के खनन, नया निर्माण आदि के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित है। जबकि इसके आगे 200 मीटर या इससे अधिक एवं निकटस्थ का क्षेत्र खनन व निर्माण कार्य के लिए विनियमित क्षेत्र घोषित है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार के भवनों की मरम्मत, परिवर्तन व निर्माण/नवनिर्माण के लिए आयुक्त वाराणसी मंडल से पूर्वानुमति लेना आवश्यक है।
विज्ञापन
मंगलवार शाम मंदिर के उत्तरी गेट की बाहर की तरफ बर्मी मंदिर की ओर से सटे नया गेट का निर्माण शुरू कराया गया। पुरातत्व विभाग के कर्मचारी ने स्थानीय प्रशासन व विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अभिषेक पांडेय ने बुधवार दोपहर बाद जायजा लिया था।
विज्ञापन
उन्होंने मुकदमा दर्ज कराने को कहा था। बृहस्पतिवार देर रात स्मारक परिचर नंदलाल गुप्ता की तहरीर पर बर्मी मंदिर के प्रबंधक रामनगीना व अग्ग महापंडित भदंत ज्ञानेश्वर समेत अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
विज्ञापन
एसओ ज्ञानेंद्र कुमार राय ने कहा विभागीय अधिकारी और कर्मचारी की तरफ से मिली तहरीर पर संबंधित धारा में मुकदमा दर्ज कर जांच पड़ताल की जा रही है।
दो वर्ष तक की सजा का है प्रावधान
कसया। प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम के उल्लंघन के मामले में दोष सिद्ध होने पर दो वर्ष से अधिक के कारावास से या ऐसे जुर्माने से जो एक लाख रुपये तक हो सकेगा या दोनों से दंडनीय होगा। मुख्य मंदिर प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल और अवशेष (संशोधन और विधिमान्य करण) विधेयक 29 मार्च 2010 के मूल नियम 9 की अधिनियम की धारा 30 क एवं ख के तहत संरक्षित स्मारक पुरातात्विक क्षेत्र, बाउंड्री से 100 मीटर तक का क्षेत्र किसी भी प्रकार के खनन, नया निर्माण आदि के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित है। जबकि इसके आगे 200 मीटर या इससे अधिक एवं निकटस्थ का क्षेत्र खनन व निर्माण कार्य के लिए विनियमित क्षेत्र घोषित है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार के भवनों की मरम्मत, परिवर्तन व निर्माण/नवनिर्माण के लिए आयुक्त वाराणसी मंडल से पूर्वानुमति लेना आवश्यक है।