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Kushinagar News: रहें सावधान! सेहत बिगाड़ देंगी रंग-बिरंगी मिठाइयां
Tue, 03 Feb 2026 12:23 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Tue, 03 Feb 2026 12:23 AM IST
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बिक्री के लिए रखा गया मिठाई। स्रोत-सोशल मीडिया
पडरौना। सहालग में मिठाई की डिमांड बढ़ जाती है। ऐसे में मुनाफाखोर भी सक्रिय हो जाते हैं और अखाद्य एवं सिंथेटिक रंग से बनीं मिठाइयां बाजार में उतार देते हैं। दुकान पर बिक्री के लिए रखी ये रंग बिरंगी मिठाइयां देखने में तो सुंदर लगती हैं लेकिन सेहत के लिए हानिकारक होती हैं। खाद्य विभाग ने पिछले वर्ष मिठाई और नमकीन के 44 नमूने जांच के लिए भेजे थे, जिनमें 17 में अखाद्य रंग मिलाने की रिपोर्ट आई। ऐसे में लोगों को सचेत रहने की जरूरत है।
मिठाई दुकानदार बताते हैं कि छेने से बनी मिठाइयों को अलग-अलग नाम देने के लिए उनमें रंग डालना ही पड़ता है। यदि बिना रंग के बनाया जाए तो सभी मिठाइयां हल्की सफेद हल्की भूरी ही दिखेंगी। चमक नहीं होने से लोग भी पसंद नहीं करेंगे। सबसे अधिक रंगों का इस्तेमाल नमकीन और लड्डू बनाने में होता है। मिठाई की छोटी दुकान से लेकर बड़े दुकानों तक में प्रतिबंधित रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। अधिकतर नमकीन बनाने में मैदा व बेसन का इस्तेमाल होता है। इससे बनी नमकीन हल्के भूरे रंग की होती है।
जानकारों के अनुसार रंग-बिरंगी चीनी वाली मिठाई खरीदने से परहेज करना चाहिए। सस्ते के चक्कर में लोग इन्हें खरीद कर बीमारी को आमंत्रित करते हैं। इससे बाद में परेशानी होती है।
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ऐसे करें मिलावट की पहचान
लड्डू में कृत्रिम और अतिरिक्त रंग की पहचान करने के लिए उसे सफेद टिश्यू पेपर पर रगड़ें। यदि रंग पेपर पर उतरता है तो इसमें मिलावट है। इसके अतिरिक्त, लड्डू को गर्म पानी में डालने पर यदि पानी तुरंत रंगीन हो जाए तो समझें कि इसमें अस्वस्थ आर्टिफिशियल रंगों का प्रयोग किया गया है। इसी तरह बेसन और दाल में रसायनों (जैसे मेटानिल येलो) या कृत्रिम रंगों की मिलावट का पता लगाने के लिए घर पर ही सरल परीक्षण किए जा सकते हैं। बेसन में हाइड्रोक्लोरिक एसिड या नींबू का रस मिलाने पर यदि रंग लाल, गुलाबी हो जाए तो वह मिलावटी है। दाल में पानी मिलाकर हिलाने से यदि पानी पीला हो जाए, तो उसमें रंग मिला है।
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मिठाई दुकानदार बताते हैं कि छेने से बनी मिठाइयों को अलग-अलग नाम देने के लिए उनमें रंग डालना ही पड़ता है। यदि बिना रंग के बनाया जाए तो सभी मिठाइयां हल्की सफेद हल्की भूरी ही दिखेंगी। चमक नहीं होने से लोग भी पसंद नहीं करेंगे। सबसे अधिक रंगों का इस्तेमाल नमकीन और लड्डू बनाने में होता है। मिठाई की छोटी दुकान से लेकर बड़े दुकानों तक में प्रतिबंधित रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। अधिकतर नमकीन बनाने में मैदा व बेसन का इस्तेमाल होता है। इससे बनी नमकीन हल्के भूरे रंग की होती है।
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जानकारों के अनुसार रंग-बिरंगी चीनी वाली मिठाई खरीदने से परहेज करना चाहिए। सस्ते के चक्कर में लोग इन्हें खरीद कर बीमारी को आमंत्रित करते हैं। इससे बाद में परेशानी होती है।
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ऐसे करें मिलावट की पहचान
लड्डू में कृत्रिम और अतिरिक्त रंग की पहचान करने के लिए उसे सफेद टिश्यू पेपर पर रगड़ें। यदि रंग पेपर पर उतरता है तो इसमें मिलावट है। इसके अतिरिक्त, लड्डू को गर्म पानी में डालने पर यदि पानी तुरंत रंगीन हो जाए तो समझें कि इसमें अस्वस्थ आर्टिफिशियल रंगों का प्रयोग किया गया है। इसी तरह बेसन और दाल में रसायनों (जैसे मेटानिल येलो) या कृत्रिम रंगों की मिलावट का पता लगाने के लिए घर पर ही सरल परीक्षण किए जा सकते हैं। बेसन में हाइड्रोक्लोरिक एसिड या नींबू का रस मिलाने पर यदि रंग लाल, गुलाबी हो जाए तो वह मिलावटी है। दाल में पानी मिलाकर हिलाने से यदि पानी पीला हो जाए, तो उसमें रंग मिला है।