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रहें होशियार : फर्जी आधार कार्ड से बैंक खाता कर दे रहे खाली
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- पुलिस विभाग की कार्रवाई में शनिवार को जिले में पकड़े जा चुके हैं तीन अंतरराज्यीय साइबर ठग
- 250 से 300 रुपये में कुछ साइबर कैफे और जन सेवा केंद्र संचालक बना देते हैं फर्जी आधार कार्ड
कुशीनगर। जनसेवा केंद्रों और साइबर कैफे में फर्जी आधार कार्ड धड़ल्ले से बनाया जा रहा है। इसका उपयोग बैंक खातों से रुपये खाली करने में हो रहा है। अभी बीते शनिवार को ही जिले में पकड़े गए अंतरराज्यीय साइबर ठगी गैंग के तीन सदस्यों ने यह राज उगला था कि कैसे सीएससी से मिलकर गांव के भोले-भाले गरीब लोगों को पैसों का लालच देकर खाते खुलवाने के लिए उनके आधार व फिंगर के इस्तेमाल से नए सिमकार्ड निर्गत करते हुए इकट्ठा करते हैं।
फिर उनके नाम से खाता खुलवाकर उसमें बिना उनकी जानकारी के फर्जी सिमकार्ड से खाता लिंक करवा देते हैं और फिर उसी सिम नंबर के प्रयोग से उन खातों में बिना उनकी जानकारी के ऑनलाइन (अधिक से अधिक धनराशि) फर्जी तरीके से पैसे का लेन-देन करते हैं। इस तरह के खातों पर पासबुक, चेकबुक व एटीएम कार्ड भी प्राप्त कर लेते हैं।
आधार कार्ड बनवाने के लिए लोगों को डाकघर, बैंक शाखाओं और विभिन्न जगहों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इसके बाद भी उन्हें महीने भर तक आधार कार्ड आने का इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, शहर में कई जगहों पर फर्जी आधार कार्ड बनाने का खेल चल रहा है। महज 250 से 300 रुपये देकर आधे घंटे के भीतर फर्जी आधार कार्ड बन जा रहा है। इसमें केवल फोटो असली लग रहा है, बाकी सारी जानकारी फर्जी दर्ज कर दी जा रही है। इसके लिए न निवास प्रमाणपत्र और न ही किसी और दस्तावेज की जरूरत पड़ रही है। पुलिस विभाग के जांच-पड़ताल में भी यह बात सामने आ चुकी है कि जनपद में धड़ल्ले से फर्जी आधारकार्ड बनाए जा रहे हैं। अभी शनिवार को पुलिस ने फर्जी आधार कार्ड बनाकर खाते से ठगी करने वाले अंतरराज्यीय ठग गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया था, जिनके पास भोले-भाले व्यक्तियों के खातों का प्रयोग कर गायब किए गए 51 हजार रुपये, 64 फर्जी सिम कार्ड, 20 फर्जी आधार कार्ड, 11 पासबुक, पांच मोबाइल और बाइक बरामद हुई थी। इन साइबर ठगों ने आठ फर्जी खातों में लगभग एक करोड़ 20 लाख रुपये की हेराफेरी की थी।
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ये सेवरही थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किए गए थे। जनपद में अपनी गतिविधियाें के बारे में पुलिस को जानकारी भी दी थी, जिस पर पुलिस जांच पड़ताल कर रही है।
सतर्क रहें, इन कार्यों में भी हो रहा फर्जी आधार कार्ड का उपयोग
असली की तरह दिखने वाले इस नकली आधार कार्ड को बनाने के लिए किसी पहचान पत्र की भी मांग नहीं की जाती। पड़ोसी प्रांत बिहार हो या दूर दराज प्रांत का निवासी, अगर उसे चोरी-छिपे शहर में किराए का कमरा लेना हो तो यह फर्जी आधार कार्ड मददगार साबित हो रहा है। पहचान छिपाकर होटल में ठिकाना बनाने व निजी कंपनियों में नौकरी पाने के लिए ऐसे आधार कार्ड का इस्तेमाल किया जा रहा है।
साइबर ठग फर्जी आधार के सहारे ऐसे गायब कर देते हैं खाते से रुपये
पुलिस की पूछताछ में अंतरराज्यीय साइबर ठगों ने बताया था कि गैंग के सदस्य जगह-जगह स्थित सीएससी सेंटर पर संपर्क करते हैं। उनसे मिलकर गांव के भोले-भाले गरीब लोगों को खाता खुलवाने के लिए पैसों का लालच देते हैं। उनके आधार व उनके फिंगर के इस्तेमाल से नए सिम निर्गत करते हुए इकट्ठा करते हैं। उसके बाद उनके नाम से अकाउंट खुलवाकर खाते में बिना उनकी जानकारी के फर्जी सिम से अकाउंट लिंक करवा देते हैं। फिर उसी सिम नंबर के प्रयोग से उन खातों में बिना उनकी जानकारी के ऑनलाइन (अधिक से अधिक धनराशि) फर्जी पैसों का लेन-देन करते हैं। उन भोले-भाले व्यक्तियों के खातों से संबंधित पासबुक, चेकबुक व एटीएम कार्ड प्राप्त कर लेते हैं। उसका उन लोगों को पता नहीं लग पाता है। इसके बाद इन अंतरराज्यीय साइबर ठगों की ओर से ऑनलाइन हैकरों को वही अकाउंट 14,000 रुपये में बेचकर उसमें भिन्न-भिन्न प्रदेशों और जनपदों से साइबर फ्रॉड किए गए रुपयों को मंगाते हैं। फिर साइबर ठग उस रकम को निकाल लेेते हैं।
कुशीनगर जनपद में साइबर ठगों का गिरोह फर्जी आधार कार्ड भी बनाकर ठगी कर रहा है। इसके जरिये बैंकों में खाते खुलवाकर लोगों से ठगी कर रहा है। ऐसे अपराधियों को चिह्नित किया जा रहा है। अभी शनिवार को एक बड़े गैंग को पकड़ा गया था। अभी और भी निशाने पर हैं। जांच-पड़ताल चल रही है।
-धवल जायसवाल, पुलिस अधीक्षक
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- 250 से 300 रुपये में कुछ साइबर कैफे और जन सेवा केंद्र संचालक बना देते हैं फर्जी आधार कार्ड
कुशीनगर। जनसेवा केंद्रों और साइबर कैफे में फर्जी आधार कार्ड धड़ल्ले से बनाया जा रहा है। इसका उपयोग बैंक खातों से रुपये खाली करने में हो रहा है। अभी बीते शनिवार को ही जिले में पकड़े गए अंतरराज्यीय साइबर ठगी गैंग के तीन सदस्यों ने यह राज उगला था कि कैसे सीएससी से मिलकर गांव के भोले-भाले गरीब लोगों को पैसों का लालच देकर खाते खुलवाने के लिए उनके आधार व फिंगर के इस्तेमाल से नए सिमकार्ड निर्गत करते हुए इकट्ठा करते हैं।
फिर उनके नाम से खाता खुलवाकर उसमें बिना उनकी जानकारी के फर्जी सिमकार्ड से खाता लिंक करवा देते हैं और फिर उसी सिम नंबर के प्रयोग से उन खातों में बिना उनकी जानकारी के ऑनलाइन (अधिक से अधिक धनराशि) फर्जी तरीके से पैसे का लेन-देन करते हैं। इस तरह के खातों पर पासबुक, चेकबुक व एटीएम कार्ड भी प्राप्त कर लेते हैं।
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आधार कार्ड बनवाने के लिए लोगों को डाकघर, बैंक शाखाओं और विभिन्न जगहों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इसके बाद भी उन्हें महीने भर तक आधार कार्ड आने का इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, शहर में कई जगहों पर फर्जी आधार कार्ड बनाने का खेल चल रहा है। महज 250 से 300 रुपये देकर आधे घंटे के भीतर फर्जी आधार कार्ड बन जा रहा है। इसमें केवल फोटो असली लग रहा है, बाकी सारी जानकारी फर्जी दर्ज कर दी जा रही है। इसके लिए न निवास प्रमाणपत्र और न ही किसी और दस्तावेज की जरूरत पड़ रही है। पुलिस विभाग के जांच-पड़ताल में भी यह बात सामने आ चुकी है कि जनपद में धड़ल्ले से फर्जी आधारकार्ड बनाए जा रहे हैं। अभी शनिवार को पुलिस ने फर्जी आधार कार्ड बनाकर खाते से ठगी करने वाले अंतरराज्यीय ठग गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया था, जिनके पास भोले-भाले व्यक्तियों के खातों का प्रयोग कर गायब किए गए 51 हजार रुपये, 64 फर्जी सिम कार्ड, 20 फर्जी आधार कार्ड, 11 पासबुक, पांच मोबाइल और बाइक बरामद हुई थी। इन साइबर ठगों ने आठ फर्जी खातों में लगभग एक करोड़ 20 लाख रुपये की हेराफेरी की थी।
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ये सेवरही थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किए गए थे। जनपद में अपनी गतिविधियाें के बारे में पुलिस को जानकारी भी दी थी, जिस पर पुलिस जांच पड़ताल कर रही है।
सतर्क रहें, इन कार्यों में भी हो रहा फर्जी आधार कार्ड का उपयोग
असली की तरह दिखने वाले इस नकली आधार कार्ड को बनाने के लिए किसी पहचान पत्र की भी मांग नहीं की जाती। पड़ोसी प्रांत बिहार हो या दूर दराज प्रांत का निवासी, अगर उसे चोरी-छिपे शहर में किराए का कमरा लेना हो तो यह फर्जी आधार कार्ड मददगार साबित हो रहा है। पहचान छिपाकर होटल में ठिकाना बनाने व निजी कंपनियों में नौकरी पाने के लिए ऐसे आधार कार्ड का इस्तेमाल किया जा रहा है।
साइबर ठग फर्जी आधार के सहारे ऐसे गायब कर देते हैं खाते से रुपये
पुलिस की पूछताछ में अंतरराज्यीय साइबर ठगों ने बताया था कि गैंग के सदस्य जगह-जगह स्थित सीएससी सेंटर पर संपर्क करते हैं। उनसे मिलकर गांव के भोले-भाले गरीब लोगों को खाता खुलवाने के लिए पैसों का लालच देते हैं। उनके आधार व उनके फिंगर के इस्तेमाल से नए सिम निर्गत करते हुए इकट्ठा करते हैं। उसके बाद उनके नाम से अकाउंट खुलवाकर खाते में बिना उनकी जानकारी के फर्जी सिम से अकाउंट लिंक करवा देते हैं। फिर उसी सिम नंबर के प्रयोग से उन खातों में बिना उनकी जानकारी के ऑनलाइन (अधिक से अधिक धनराशि) फर्जी पैसों का लेन-देन करते हैं। उन भोले-भाले व्यक्तियों के खातों से संबंधित पासबुक, चेकबुक व एटीएम कार्ड प्राप्त कर लेते हैं। उसका उन लोगों को पता नहीं लग पाता है। इसके बाद इन अंतरराज्यीय साइबर ठगों की ओर से ऑनलाइन हैकरों को वही अकाउंट 14,000 रुपये में बेचकर उसमें भिन्न-भिन्न प्रदेशों और जनपदों से साइबर फ्रॉड किए गए रुपयों को मंगाते हैं। फिर साइबर ठग उस रकम को निकाल लेेते हैं।
कुशीनगर जनपद में साइबर ठगों का गिरोह फर्जी आधार कार्ड भी बनाकर ठगी कर रहा है। इसके जरिये बैंकों में खाते खुलवाकर लोगों से ठगी कर रहा है। ऐसे अपराधियों को चिह्नित किया जा रहा है। अभी शनिवार को एक बड़े गैंग को पकड़ा गया था। अभी और भी निशाने पर हैं। जांच-पड़ताल चल रही है।
-धवल जायसवाल, पुलिस अधीक्षक