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Kushinagar News: केले के रेशे से उत्पादन का प्रशिक्षण शुरू
Fri, 18 Oct 2024 04:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Fri, 18 Oct 2024 04:44 AM IST
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कसया। क्षेत्र के कुड़वा दिलीपनगर टोला धन्नीपट्टी में बृहस्पतिवार को ग्रामीण पर्यटन विभाग की ओर से केले के रेशे से उत्पादन का प्रशिक्षण शुरू हुआ।
प्रशिक्षु एसडीएम/बीडीओ कसया प्रिंस कुमार ने बताया कि केले के रेशे से चटाई, पूजा आसान, चप्पल, टोपी, सीनरी, पर्स आदि उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इसको बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें। ओडीओपी ट्रेनर रवि कुमार ने बताया कि ग्रामीण अंचल की महिलाओं को प्रशिक्षण देकर के विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार किए जाते हैं। जिला समन्वयक फारुख अब्दुल्ला ने बताया कि ग्रामीण महिलाएं अपने कौशल से केले के रेशे से विभिन्न उत्पाद तैयार कर रही हैं। केले के रेशे से उत्पाद तैयार कर पहचान दिलाने का काम करीब चार साल पहले तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के अंतर्गत हरिहरपुर निवासी रवि कुमार ने किया। उन्होंने अपने घर पर इसका मिनी कारखाना लगाया और आस-पास की महिलाओं को प्रशिक्षित कर इससे जोड़ा। धीरे-धीरे इसकी पहचान ने आकार लिया और यह एक जिला एक उत्पाद में शामिल कर लिया गया। उसके बाद शासन-प्रशासन के स्तर से इसे बढ़ावा देने की कोशिश शुरू हो गई। इस ग्राम सभा में प्रशिक्षण कार्य ग्राम समन्वयक शिवेंद्र सिंह के देखरेख में हो रहा है। ग्रामीण महिलाएं इस प्रशिक्षण में बढ़कर चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। प्रशिक्षण ले रही महिलाओं में गीता, मालती, रीता, आशा, सुनीता, सिरजावती, इत्यादि दर्जनों महिलाएं मौजूद रही।
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प्रशिक्षु एसडीएम/बीडीओ कसया प्रिंस कुमार ने बताया कि केले के रेशे से चटाई, पूजा आसान, चप्पल, टोपी, सीनरी, पर्स आदि उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इसको बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें। ओडीओपी ट्रेनर रवि कुमार ने बताया कि ग्रामीण अंचल की महिलाओं को प्रशिक्षण देकर के विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार किए जाते हैं। जिला समन्वयक फारुख अब्दुल्ला ने बताया कि ग्रामीण महिलाएं अपने कौशल से केले के रेशे से विभिन्न उत्पाद तैयार कर रही हैं। केले के रेशे से उत्पाद तैयार कर पहचान दिलाने का काम करीब चार साल पहले तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के अंतर्गत हरिहरपुर निवासी रवि कुमार ने किया। उन्होंने अपने घर पर इसका मिनी कारखाना लगाया और आस-पास की महिलाओं को प्रशिक्षित कर इससे जोड़ा। धीरे-धीरे इसकी पहचान ने आकार लिया और यह एक जिला एक उत्पाद में शामिल कर लिया गया। उसके बाद शासन-प्रशासन के स्तर से इसे बढ़ावा देने की कोशिश शुरू हो गई। इस ग्राम सभा में प्रशिक्षण कार्य ग्राम समन्वयक शिवेंद्र सिंह के देखरेख में हो रहा है। ग्रामीण महिलाएं इस प्रशिक्षण में बढ़कर चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। प्रशिक्षण ले रही महिलाओं में गीता, मालती, रीता, आशा, सुनीता, सिरजावती, इत्यादि दर्जनों महिलाएं मौजूद रही।