फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kushinagar News ›   Banana cultivation grown from Gujarat plants, now being sold in Haryana, Punjab

गुजरात के पौधों से पनपी केले की खेती, अब बिक रहा हरियाणा, पंजाब में

Sat, 06 Mar 2021 12:11 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो अभिमन्यु चौधरी, पड़रौना
अभिमन्यु चौधरी, पड़रौना Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sat, 06 Mar 2021 12:11 PM IST
सार

  • जिले में छह साल में डेढ़ गुना हो गया केले का रकबा
  • एक वर्ष में 1400 हेक्टेयर बढ़ गया केला का रकबा

विज्ञापन
Banana cultivation grown from Gujarat plants, now being sold in Haryana, Punjab
केला

विस्तार

गौतम बुद्ध की धरती कुशीनगर की अब नई पहचान केले की बागवानी बनती जा रही है। गन्ने से मोह भंग होने के बाद किसानों ने केले की खेती को तरक्की का जरिया बना लिया है। जिले में पिछले छह वर्षों में केले का रकबा डेढ़ गुना हो गया। गुजरात एवं अन्य शहरों के टिशू कल्चर पौधों से केले की खेती पनपी और अब पंजाब, हरियाणा और दिल्ली तक यहां का केला बेचा जा रहा है। उद्यान विभाग के अनुसार एक वर्ष में ही जिले में केले के रकबे में 1400 हेक्टेयर की वृद्धि हुई है।

विज्ञापन


जिले के खड्डा, दुदही, विशुनपुरा, तमकुही रोड आदि क्षेत्रों में केले की खेती ज्यादा हो रही है। किसान समूहों के अनुसार जिले में 9500 हेेक्टेयर क्षेत्र में केला उगाया जा रहा है। उद्यान विभाग में अनुदान प्राप्त किसानों के आकड़े हैं। प्रगतिशील किसानों की पहली पसंद केला बन गया है। जोखिम के बावजूद भी केले का रकबा तेजी से बढ़ रहा है। आंधी, तूफान, ज्यादा बारिश और बाढ़ के पानी के कारण फसल बर्बाद हो जाती है।
विज्ञापन


किसान समूह से जुड़े रमाकांत कुशवाहा के अनुसार वे प्रतिवर्ष 10-12 लाख केले के पौधे बेच रहे हैं जबकि, इसी तरह के कई हार्डनिंग सेंटर हैं। गन्ना मूल्य में भुगतान में देर होने के कारण किसानों ने वर्ष 2006-07 में हरी छाल केले की बागवानी को विकल्प बनाया। केले से किसानों की आय बढ़ रही है जबकि, स्थानीय श्रमिकों को भी खेतों में रोजगार मिल रहा है। जिले में एक जिला एक उत्पाद प्रोत्साहन की योजना में केला उत्पाद शामिल है। अब वो दिन ज्यादा दूर नहीं है कि जब केले के तने से भी किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


केला की खेती
-बुवाई का समय 1 जून से 15 जुलाई
-फसल तैयार होती है करीब 14 माह में
-टिशू कल्चर के एक पौधे की कीमत 17 से 19 रुपये
-एक एकड़ खेत में फसल की लागत 1 से 1.5 लाख रुपये
-एक एकड़ फसल आय 2.5 से 3 लाख रुपये

केले का रकबा
वर्ष- रकबा हेक्टेयर में
2015-16 - 2800
2016-17 - 3300
2017-18- 3500
2018-19- 2900
2019-20- 3500
2020-21- 4900
उद्यान विभाग कुशीनगर के अनुसार

किसानों की बात
गन्ने की फसल एक साल में कट जाती थी, लेकिन एक बार रोपे गए केले से 5-6 साल तक फल प्राप्त होते हैं। एक एकड़ केले की खेती में एक से दो लाख आय होती है।
प्रभुनाथ कुशवाहा, मठिया भोकरिया

कोई प्राकृतिक आपदा न आए तो केला बहुत फायदे की खेती है। दूसरे राज्यों में कुशीनगर के केले की ज्यादा मांग हो रही है। आपदा की स्थिति में किसानों की क्षतिपूर्ति मिलनी चाहिए।
राजेंन्द्र प्रताप मल्ल, दरगौली

केला के सीजन में पंजाब, हरियाणा, गुड़गांव, दिल्ली सहित अन्य शहरों के व्यापारी और उनकी मध्यस्थता करने वाले लोग जिले में डेरा डाल लेते हैं। लोकल मंडियों से भी बिक्री होती है।
विशुनदेव राय, दुदही

जिले के प्रगतिशील किसान विभिन्न कम्पनियों के टिशू कल्चर के महंगे पौधे लगाते हैं। ये पौधे और इनके फल एक समान होते हैं। अहमदाबाद, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, बंगलुरू के पौधे मंगाए जाते हैं।

प्रहलाद मौर्य,खड्डा

जिले में केले का रकबा लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2018-19 में बांध टूटने के कारण बाढ़ की पानी से ज्यादा फसल बर्बाद हुई थी। इस कारण रकबा भी कम हुआ था। वर्ष 2019-20 में फिर केले की खेती करने वाले किसान बढ़ गए।
रामायन सिंह, प्रभारी जिला उद्यान अधिकारी

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed