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Kushinagar News: गन्ना तौल पर्ची पर रोक, पशुपालकों के सामने चारे का संकट

Mon, 06 Jan 2025 11:54 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Mon, 06 Jan 2025 11:54 PM IST
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Ban on sugarcane weighing slip, livestock farmers facing fodder crisis
- चीनी मिल और गन्ना समितियों ने उच्चतम न्यायालय से किसानों का पक्ष सुनने की गुजारिश की
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- गन्ना की आपूर्ति करने वाले करीब 60 गांव प्रभावित

तमकुहीराज। चीनी मिल के बीच गन्ना आवंटन को लेकर उपजे विवाद में उच्च न्यायालय प्रयागराज की तरफ से एक पक्षीय फैसला सुनाते हुए गन्ना पर्ची जारी करने पर रोक लगा दी है। न्यायालय के इस फैसले से सेवरही चीनी मिल को गन्ना की आपूर्ति करने वाले करीब 60 गांव प्रभावित हुए हैं। इस आदेश के बाद गन्ना की नियमित आपूर्ति बाधित होने से क्षेत्र के पशुपालकों के सामने पशुओं के चारे का संकट उत्पन्न हो गया है। हालांकि इस समस्या से निजात दिलाने के लिए चीनी मिल और गन्ना समितियों की तरफ से उच्चतम न्यायालय में रिट दायर कर किसानों के हित में पक्ष सुनने की गुजारिश की गई है।

क्षेत्र के पशुपालक दिसंबर से अप्रैल तक पांच माह की अवधि तक पशुओं के लिए हरे चारे के रूप में गन्ने के पत्ते का उपयोग करते हैं। चूंकि यह आसानी से हर वर्ष सुलभ हो जाता है, इसलिए अधिकांश पशुपालक वैकल्पिक व्यवस्था के बारे में नहीं सोचते हैं। अब करीब एक सप्ताह से उच्च न्यायालय के निर्देश पर सेवरही चीनी मिल के अधिकांश क्षेत्रों में पर्ची जारी करने पर रोक लग गई है। इस कारण पशुपालकों को हरा चारा उपलब्ध नहीं हो रहा है।
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क्षेत्र के पशुपालक संतोष कुमार, महेंद्र कुशवाहा, नागेंद्र कुशवाहा, रामावतार बैठा, मिट्ठू प्रसाद, रविंद्र कुमार, कृष्ण कुमार आदि का कहना है कि गन्ने का हरा पत्ता पशुओं के लिए सिर्फ हरा चारा ही नहीं बल्कि पांच माह तक संपूर्ण आहार के रूप में प्रयोग किया जाता है। सेवरही चीनी मिल से प्रभावित इलाकों में गन्ने की पर्ची आनी शुरू नहीं हो जाती, तब तक उनके पशुओं के चारे के लिए गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है।
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केन यूनियन सेवरही के चेयरमैन धीरेंद्र उर्फ राजू राय ने बताया कि इस मामले में चीनी मिल की तरफ से उच्चतम न्यायालय में रिट दायर कर किसानों के हित में तत्काल फैसला करने की अपील की गई है।वहीं जनपद के सेवरही, दुदही, तरयासुजान, रामकोला खेतान, पडरौना, छितौनी, लक्ष्मीगंज, पंजाब मिल रामकोला और कठकुइंया सहित नौ सहकारी समितियों ने भी स्वयं पक्षकार बन कर किसानों के हित में फैसला देने की अपील की है।
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