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Kushinagar News: हाटा के बैडमिंटन खिलाड़ी की असम में मौत, घर पहुंचा शव
Wed, 16 Sep 2026 02:54 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Wed, 16 Sep 2026 02:54 AM IST
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सुकरौली। हाटा नगर के वार्ड नंबर 21 निवासी 18 वर्षीय बैडमिंटन खिलाड़ी सुमित जायसवाल की असम के जोरहाट में संदिग्ध हालात में मौत हो गई। सोमवार को उनका शव पीजी हास्टल के कमरे से मिला। सूचना मिलते ही परिवार में मातम छा गया। मंगलवार सुबह शव घर लाया गया तो परिवार में चीख-पुकार मच गई। सुमित के माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। हालांकि, सुमित की मौत किन परिस्थितियों में हुई और कैसे हुई, यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है।
नगर के निवासी सुरेश जायसवाल के इकलौते बेटे सुमित जायसवाल कानपुर बैडमिंटन एसोसिएशन की ओर से सब जूनियर स्तर पर खेल चुके थे। उन्होंने स्टेट जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप भी जीती थी। वर्तमान में वह असम के जोरहाट स्थित एटीला गांव में कोच इम्तियाज वसीम से प्रशिक्षण ले रहे थे। सुमित 19 जुलाई को असम गए थे। रविवार सुबह मां निर्मला देवी ने सुमित को फोन किया लेकिन बात नहीं हो सकी। पिता सुरेश जायसवाल ने कोच इम्तियाज वसीम को फोन पर जानकारी ली। कोच पीजी पहुंचे तो वहां सुमित का शव कमरे में मिला। उन्होंने परिजनों को घटना की जानकारी दी।
मंगलवार सुबह करीब आठ बजे सुमित का शव हाटा लाया गया। हाटा मुक्तिधाम पर उनका अंतिम संस्कार हुआ। परिवार और परिचितों ने नम आंखों से सुमित को अंतिम विदाई दी। इस दौरान प्रशासन की टीम के साथ क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। परिवार अब उनकी मौत की वास्तविक वजह सामने आने का इंतजार कर रहा है।
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मां के सपनों का इकलौता चिराग था सुमित
छोटी उम्र में बड़ी पहचान बनाने की थी चाह, मेहनत के दम पर बढ़ रहा था आगे
संवाद न्यूज एजेंसी
सुकरौली। सुमित की मौत से मां के सपनों का इकलौता चिराग बुझ गया। मां निर्मला देवी के लिए सुमित उनके सपनों का भी सहारा था। पिता सुरेश जायसवाल के लिए वह परिवार की उम्मीद और भविष्य था। सुमित की अपनी भी ख्वाहिशें थीं। वह लगातार बेहतर प्रदर्शन कर आगे बढ़ना चाहता था। उसकी लगन और मेहनत देखकर परिवार और परिचितों को भरोसा था कि वह आने वाले समय में बड़ी उपलब्धियां हासिल करेगा लेकिन एक खबर ने सब कुछ बदल दिया। जिस बेटे के लौटने और सफलता की उम्मीद परिवार लगाए बैठा था, मंगलवार को उसी का शव घर पहुंचा तो चीख-पुकार मच गई। मां-बाप के सपने और नगर की उम्मीदें भी अधूरी रह गईं।
सुमित ने छोटी उम्र से ही बैडमिंटन को अपना लक्ष्य बना लिया था। पढ़ाई के साथ खेल में आगे बढ़ने के लिए उसने लगातार मेहनत की। कानपुर बैडमिंटन एसोसिएशन की ओर से सब जूनियर स्तर पर खेलते हुए उसने अपनी प्रतिभा साबित की और स्टेट जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप जीतकर हाटा का नाम रोशन किया। इसके बाद दिल्ली, लुधियाना और बेंगलुरु जैसी जगहों पर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर वह अपने सपनों की ओर कदम बढ़ाता रहा। परिवार को उम्मीद थी कि मेहनत और प्रतिभा के दम पर सुमित एक दिन प्रदेश और देश स्तर पर अपनी पहचान बनाएगा। नवंबर में होने वाली खेलो इंडिया प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की तैयारी भी चल रही थी। असम के जोरहाट में कोच से प्रशिक्षण लेकर वह अपने खेल को और निखार रहा था। उसके सामने अभी लंबा सफर था और कई मंजिलें उसका इंतजार कर रही थीं।
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नगर के निवासी सुरेश जायसवाल के इकलौते बेटे सुमित जायसवाल कानपुर बैडमिंटन एसोसिएशन की ओर से सब जूनियर स्तर पर खेल चुके थे। उन्होंने स्टेट जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप भी जीती थी। वर्तमान में वह असम के जोरहाट स्थित एटीला गांव में कोच इम्तियाज वसीम से प्रशिक्षण ले रहे थे। सुमित 19 जुलाई को असम गए थे। रविवार सुबह मां निर्मला देवी ने सुमित को फोन किया लेकिन बात नहीं हो सकी। पिता सुरेश जायसवाल ने कोच इम्तियाज वसीम को फोन पर जानकारी ली। कोच पीजी पहुंचे तो वहां सुमित का शव कमरे में मिला। उन्होंने परिजनों को घटना की जानकारी दी।
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मंगलवार सुबह करीब आठ बजे सुमित का शव हाटा लाया गया। हाटा मुक्तिधाम पर उनका अंतिम संस्कार हुआ। परिवार और परिचितों ने नम आंखों से सुमित को अंतिम विदाई दी। इस दौरान प्रशासन की टीम के साथ क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। परिवार अब उनकी मौत की वास्तविक वजह सामने आने का इंतजार कर रहा है।
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मां के सपनों का इकलौता चिराग था सुमित
छोटी उम्र में बड़ी पहचान बनाने की थी चाह, मेहनत के दम पर बढ़ रहा था आगे
संवाद न्यूज एजेंसी
सुकरौली। सुमित की मौत से मां के सपनों का इकलौता चिराग बुझ गया। मां निर्मला देवी के लिए सुमित उनके सपनों का भी सहारा था। पिता सुरेश जायसवाल के लिए वह परिवार की उम्मीद और भविष्य था। सुमित की अपनी भी ख्वाहिशें थीं। वह लगातार बेहतर प्रदर्शन कर आगे बढ़ना चाहता था। उसकी लगन और मेहनत देखकर परिवार और परिचितों को भरोसा था कि वह आने वाले समय में बड़ी उपलब्धियां हासिल करेगा लेकिन एक खबर ने सब कुछ बदल दिया। जिस बेटे के लौटने और सफलता की उम्मीद परिवार लगाए बैठा था, मंगलवार को उसी का शव घर पहुंचा तो चीख-पुकार मच गई। मां-बाप के सपने और नगर की उम्मीदें भी अधूरी रह गईं।
सुमित ने छोटी उम्र से ही बैडमिंटन को अपना लक्ष्य बना लिया था। पढ़ाई के साथ खेल में आगे बढ़ने के लिए उसने लगातार मेहनत की। कानपुर बैडमिंटन एसोसिएशन की ओर से सब जूनियर स्तर पर खेलते हुए उसने अपनी प्रतिभा साबित की और स्टेट जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप जीतकर हाटा का नाम रोशन किया। इसके बाद दिल्ली, लुधियाना और बेंगलुरु जैसी जगहों पर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर वह अपने सपनों की ओर कदम बढ़ाता रहा। परिवार को उम्मीद थी कि मेहनत और प्रतिभा के दम पर सुमित एक दिन प्रदेश और देश स्तर पर अपनी पहचान बनाएगा। नवंबर में होने वाली खेलो इंडिया प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की तैयारी भी चल रही थी। असम के जोरहाट में कोच से प्रशिक्षण लेकर वह अपने खेल को और निखार रहा था। उसके सामने अभी लंबा सफर था और कई मंजिलें उसका इंतजार कर रही थीं।