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शाम को फिर बढ़ने लगा गंडक का डिस्चार्ज

Thu, 21 Jul 2016 10:59 PM IST
kushinagar
kushinagar Updated Thu, 21 Jul 2016 10:59 PM IST
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at the evening discharg go up
बाढ़ - फोटो : santosh verma
पडरौना। गंडक नदी का डिस्चार्ज बृहस्पतिवार की शाम को फिर बढ़कर 1.83 लाख क्यूसेक हो गया। जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव बने रहने की वजह से किनारों पर हो रहा कटान रुक नहीं रहा है। नदी अमवा खास और एपी तटबंध पर कई जगह दबाव बनाए हुए है। बाढ़ से घिरे गांवों के लोगों की मुश्किलें भी कम नहीं हो रही हैं।
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वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी के डिस्चार्ज में लगातार बदलाव हो रहा है। बुधवार की सुबह आठ बजे डिस्चार्ज 1.42 लाख क्यूसेक था जो शाम चार बजे बढ़कर 1.77 लाख क्यूसेक हो गया। बृहस्पतिवार की सुबह आठ बजे फिर जलस्तर घटकर 1.69 लाख क्यूसेक और दोपहर 12 बजे 1.63 लाख क्यूसेक हो गया। शाम को पानी और कम होने का अनुमान लगाया जा रहा था लेकिन शाम चार बजे डिस्चार्ज अचानक बढ़कर 1.83 लाख क्यूसेक हो गया। जलस्तर में अचानक हुई इस वृद्धि से शुक्रवार की सुबह खड्डा रेता क्षेत्र और शाम को सेवरही ब्लॉक के पिपराघाट के आसपास के गांवों में असर दिखना शुरू होगा। जलस्तर में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव के चलते खड्डा क्षेत्र में खेती लायक जमीन कट रही है तो वहीं दुदही क्षेत्र में अमवा खास तटबंध और तमकुही क्षेत्र में एपी तटबंध के किनारे हो रहे कटान से बंधों की सुरक्षा को लेकर खतरा बना हुआ है। 
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खड्डा प्रतिनिधि के अनुसार गंडक नदी के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव होने से रेता क्षेत्र में कटान और तेज हो गया है। ज्वालापुर व कर्महवा मौजा के सामने बड़ी तेजी से खेती योग्य जमीन कटकर नदी की धारा में विलीन हो रही हैं। कटान रोकने के लिए प्रशासन की तरफ से अब तक कोई पहल भी नहीं की गई है। रेता क्षेत्र के गांव मरचहवा और बसंतपुर में अभी भी संपर्क मार्गों पर तेजी से पानी बह रहा है। लोग जरूरी कार्यों के लिए नाव से महराजगंज जिले के सोहगी बरवां आ-जा रहे हैं।
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तमकुहीरोड प्रतिनिधि के अनुसार गंडक नदी के जलस्तर में लगातार हो रहे बदलाव के चलते एपी तटबंध पर जवही दयाल के सामने कटान तेज हो गया है। बंधे को बचाने के लिए बाढ़ खंड डिवीजन की तरफ से प्रयास किया जा रहा है, परंतु इसमें बहुत सफलता नहीं मिली है। जलस्तर घटने से पिपराघाट के चौकी टोला, जयपुर टोला, हनुमान टोला, मुसहरी टोला, मोतीराय टोला, शिव टोला, इमिलिया टोला आदि के लोगों को थोड़ी राहत मिली थी, परंतु शाम को फिर हुई वृद्धि ने इनकी चिंता बढ़ा दी है। इस क्षेत्र के निवासी मथुरा सिंह, राजेश सिंह, बाबूलाल निषाद, हेमंत सिंह आदि का कहना है कि यदि एपी तटबंध टूटा तो 40 से अधिक गांव सीधे प्रभावित होंगे। 

नदी के रुख में नहीं हो रहा परिवर्तन
दुदही। बड़ी गंडक नदी की धारा तेजी से अमवा खास तटबंध की तरफ बढ़ रही है। जलस्तर में हो रहे उतार-चढ़ाव के चलते कटान की गति और तेज होती जा रही है। लोग बाढ़ खंड डिवीजन के अफसरों पर मनमानी का आरोप लगा रहे हैं। 


अमवा खास बंधे की सुरक्षा के लिए लिए हाई लेवल कमेटी ने इस वर्ष कुल छह परियोजनाओं को मंजूरी दी थी। 10 करोड़ 22 लाख 68 हजार की कुल लागत वाली ये सभी छह परियोजनाएं संवेदनशील बिंदुओं पर प्रस्तावित हैं। परंतु आधी जुलाई बीतने के बाद भी किसी परियोजना पर काम शुरू ही नहीं हुआ। लक्ष्मीपुर और बरवापट्टी गांव के निकट नदी तेजी से कटान करते हुए बंधे की तरफ  बढ़ रही है। इससे बगल के गांव पर भी खतरा मंडराते देख लोग भयभीत हो गए हैं। गांववालों का कहना है कि समय से कार्य पूर्ण कराए गए होते तो इस वक्त स्थिति को नियंत्रित करना ज्यादा आसान होता। इस क्षेत्र के निवासी विनय तिवारी, सिंगासन प्रसाद, राजन तिवारी, उपेंद्र तिवारी, विनोद जायसवाल, कमलेश शर्मा, रमेश यादव, श्रीकिशुन यादव आदि ने बाढ़ खंड के अभियंताओं पर मनमानी का आरोप लगाते हुए डीएम से हस्तक्षेप की मांग की है।
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