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Kushinagar News: डिजिटल सेंधमारी से बनाई संपत्ति...ट्रांजेक्शन भी छिपाए

Sun, 12 Jan 2025 03:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Sun, 12 Jan 2025 03:44 AM IST
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Assets created through digital burglary... hide transactions also
पडरौना। कठकुइयां के बेकरी और किराना के होलसेल कारोबारी रितेश अग्रवाल आयकर की राडार पर यूं ही नहीं आया है। इसके पीछे पिछले कुछ सालों में बदली उनकी माली हालात के साथ कर (टैक्स) और कमाई के बीच के अंतर को माना जा रहा है। हालांकि, देर शाम कुछ कागजात को कब्जे में लेकर आयकर विभाग की टीम वापस लाैट गई।
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सूत्रों के अनुसार कारोबारी रितेश ने डिजिटल व्यवस्था में सेंधमारी कर न केवल नकली फर्म के सहारे देय कर (टैक्स) छिपाया है। बल्कि इस कर चोरी से सरकारी खजाने को चूना लगा कर रितेश अग्रवाल ने खुद को मजबूत कर लिया है।
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रितेश की फर्म से करोड़ों के ट्रांजेक्शन तो हुए हैं। लेकिन डिजिटल तौर पर इसकी एंट्री में गिने चुने ट्रांजेक्शन को ही दिखाया गया है। फर्म के साथ रितेश रियल एस्टेट और अन्य बड़े-बड़े सेक्टर में इन्वेस्टमेंट कर रहा था। इसके साथ ही गोरखपुर से लेकर बिहार तक उसका जाल फैला हुआ है। फर्म अनाप-शनाप खरीदारी दिखाकर कर देनदारी कम करने का भी प्रयास कर रही है। इसके लिए वह बिना हिसाब वाली नकद रकम से जमीनें भी खरीदते हैं।
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सूत्र बता रहे हैं कि रितेश ने भी इसी को हथियार बनाते हुए बिना हिसाब वाली नकद रकम से बड़े-बड़े शहरों में जमीन खरीदी है। तीसरे दिन भी आयकर विभाग की टीम जमी रही, हालांकि, रितेश करीब एक बजे कठकुईयां बाजार के किराना दुकान पर बैठा था और बताया कि यह रूटीन की जांच है। टीम आई है अपने स्तर से जांच कर रही है। इसकी थोड़ी भी टेंशन उन्हें नहीं है। कठकुइयां निवासी कारोबारी रितेश अग्रवाल कभी अभाव में जीवन जीने के साथ पिता के स्क्रैप बटोरने और बेचने वाले काम में मदद करते थे। कुछ अलग करने का जुनून सवार हुआ तो करीब पांच साल पूर्व स्थानीय बाजार में किराने की दुकान खोल दी। तब बेकरी से जुड़ी चीजें वह थोक में गोरखपुर से लाकर बेचने लगा। सूत्रों के अनुसार उसके मित्रों ने राय दी तो वह फुटकर से थोक विक्रेता बन गया। इसके बाद जुनून और सपने बढ़े तो स्थानीय स्तर पर बेकरी की बड़ी फैक्टरी लगाने की योजना बनाई।
तीन साल पूर्व कठकुईयां जाने वाले मठिया मोड़ पर रितेश ने बेकरी की फैक्टरी स्थापित कराई। आसपास के जनपदों के अलावा बिहार में इसके बेकर्स से जुड़े वस्तुओं की आपूर्ति बढ़ी तो मजदूरों का काफिला भी सैकड़ों में पहुंच गया। परिवार की स्थिति अचानक बहुत बदल गई। टर्नओवर भी बढ़ गया तो रितेश ने टैक्स में सेंधमारी शुरू कर टैक्स और कमाई में अंतर दिखाना शुरू कर दिया।
सूत्रों के मुताबिक इसके लिए रितेश को डिजिटल तौर पर सेंधमारी के लिए एक विशेषज्ञ सलाह देता था। सूत्र यह भी बता रहे हैं कि बड़े-बड़े ट्रांजेक्शन को छिपाकर रितेश ने नकद रकम से सड़क पर मकान बनाने के साथ गोरखपुर, पडरौना और अन्य जगहों के कई बेहतरीन लोकेशन पर जमीन खरीदी है। आयकर विभाग की टीम जांच के क्रम में कुछ स्पष्ट जानकारी तो नहीं दे रही है, लेकिन माना जा रहा है कि यह मामला पूरी तरह टैक्स चोरी का है। बेकरी के अलावा किराना का थोक और फुटकर का व्यवसाय भी है।

पुलिस से जुड़े सूत्रों की मानें तो इसने बड़े पैमाने पर मैदे की खरीदारी की थी। इसका इस्तेमाल बेकरी में करने के साथ ही किराना दुकान से बेचने के लिए करता था। टीम इसका भी मिलान कर रही है कि जो मैदा उसने खरीदा है, उसकी फैक्टरी में उसकी खपत हो जा रही है या फिर उसे वह कहीं और बेच रहा है। अगर उसने इसे बेचा है तो इसके लिए भी टैक्स लिया है या नहीं और इसको जमा कराया है या नहीं, इन सब बिंदुओं पर भी जांच की जा रही है।

खोली में शांतनु का स्वागत करते कांग्रेस कार्यकर्ता। -संवाद

खोली में शांतनु का स्वागत करते कांग्रेस कार्यकर्ता। -संवाद

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