{"_id":"61c0c6d00f2c7125ce5b4621","slug":"animal-husbandry-was-problam-kushinagar-news-gkp4206262146","type":"story","status":"publish","title_hn":"पशु चिकित्सक की कमी से पशुपालक परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पशु चिकित्सक की कमी से पशुपालक परेशान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पशु चिकित्सक की कमी से पशुपालक परेशान
मवेशियों के उपचार में होती है दिक्कत
संवाद न्यूज एजेंसी
कप्तानगंज। क्षेत्र में पशुओं के उपचार के लिए कप्तानगंज में पशु चिकित्सालय की स्थापना हुई थी, लेकिन पशु चिकित्सक समय से उपलब्ध न होने के कारण पशुपालक परेशान हैं। उनके पशुओं का उपचार नहीं हो पा रहा है। पशु अस्पताल भी जर्जर भवन में संचालित होता है। यहां तक की कर्मचारियों का आवास भी जर्जर हो गया है।
कप्तानगंज के राजकीय पशु चिकित्सालय में पशुपालकों की सुविधाओं के लिए एक डॉक्टर, एक पशुधन प्रसार अधिकारी, एक फार्मासिस्ट और चार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद सृजित हैं, लेकिन वर्षों से एक डॉक्टर, एक फार्मासिस्ट और एक चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी ही तैनात हैं। एक पशुधन प्रसार अधिकारी और तीन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का पद रिक्त है। यहां तैनात डॉक्टर के जिम्मे कप्तानगंज के अलावा खड्डा तहसील के दो अन्य अस्पतालों की अतिरिक्त जिम्मेदारी है। अस्पताल के साथ ही कर्मचारियों का आवास भी करीब 50 वर्ष पुराना है, जो अब जर्जर हाल में पहुंच गया है।
कस्बे के सुभाष नगर निवासी अजय मिश्रा ने बताया कि कप्तानगंज में पशु अस्पताल जरूर है, लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण कोई सुविधा नहीं मिल पाती है। इसके चलते पशुपालकों को मेडिकल स्टोर से दवा लेनी पड़ रही है।
विज्ञापन
पटखौली निवासी नवाब अली ने बताया कि पशुओं के इलाज की अच्छी सुविधा न होने के कारण पशुपालन के प्रति लोगों की रुचि कम होती जा रही है।
असना निवासी अरविंद चौबे ने बताया कि पिछले एक वर्ष से पशु आरोग्य मेला का आयोजन नहीं हो रहा है, इसके चलते पशुओं में होने वाले रोगों और इलाज के बारे में सही जानकारी नहीं मिल पाती है।
सोमली निवासी अनिरुद्ध चौधरी ने बताया कि पशुओं के समुचित उपचार का इंतजाम नहीं है। पशुपालकों को अधिक पैसा खर्च कर मेडिकल स्टोर से दवाइयां लेनी पड़ रही है।
पशु चिकित्सक बोले
कप्तानगंज राजकीय पशु चिकित्सालय पर तैनात चिकित्सक उज्जवल खरवार का कहना है कि नए भवन के लिए कई बार शासन को पत्र भेजा गया है। कर्मचारियों की कमी की भी जानकारी दी जा चुकी है। कप्तानगंज के अलावा अन्य दो अस्पतालों का चार्ज है। इसके चलते यहां के पशुपालकों को समुचित समय नहीं दे पाते हैं।
विज्ञापन
मवेशियों के उपचार में होती है दिक्कत
संवाद न्यूज एजेंसी
कप्तानगंज। क्षेत्र में पशुओं के उपचार के लिए कप्तानगंज में पशु चिकित्सालय की स्थापना हुई थी, लेकिन पशु चिकित्सक समय से उपलब्ध न होने के कारण पशुपालक परेशान हैं। उनके पशुओं का उपचार नहीं हो पा रहा है। पशु अस्पताल भी जर्जर भवन में संचालित होता है। यहां तक की कर्मचारियों का आवास भी जर्जर हो गया है।
कप्तानगंज के राजकीय पशु चिकित्सालय में पशुपालकों की सुविधाओं के लिए एक डॉक्टर, एक पशुधन प्रसार अधिकारी, एक फार्मासिस्ट और चार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद सृजित हैं, लेकिन वर्षों से एक डॉक्टर, एक फार्मासिस्ट और एक चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी ही तैनात हैं। एक पशुधन प्रसार अधिकारी और तीन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का पद रिक्त है। यहां तैनात डॉक्टर के जिम्मे कप्तानगंज के अलावा खड्डा तहसील के दो अन्य अस्पतालों की अतिरिक्त जिम्मेदारी है। अस्पताल के साथ ही कर्मचारियों का आवास भी करीब 50 वर्ष पुराना है, जो अब जर्जर हाल में पहुंच गया है।
विज्ञापन
कस्बे के सुभाष नगर निवासी अजय मिश्रा ने बताया कि कप्तानगंज में पशु अस्पताल जरूर है, लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण कोई सुविधा नहीं मिल पाती है। इसके चलते पशुपालकों को मेडिकल स्टोर से दवा लेनी पड़ रही है।
विज्ञापन
पटखौली निवासी नवाब अली ने बताया कि पशुओं के इलाज की अच्छी सुविधा न होने के कारण पशुपालन के प्रति लोगों की रुचि कम होती जा रही है।
असना निवासी अरविंद चौबे ने बताया कि पिछले एक वर्ष से पशु आरोग्य मेला का आयोजन नहीं हो रहा है, इसके चलते पशुओं में होने वाले रोगों और इलाज के बारे में सही जानकारी नहीं मिल पाती है।
सोमली निवासी अनिरुद्ध चौधरी ने बताया कि पशुओं के समुचित उपचार का इंतजाम नहीं है। पशुपालकों को अधिक पैसा खर्च कर मेडिकल स्टोर से दवाइयां लेनी पड़ रही है।
पशु चिकित्सक बोले
कप्तानगंज राजकीय पशु चिकित्सालय पर तैनात चिकित्सक उज्जवल खरवार का कहना है कि नए भवन के लिए कई बार शासन को पत्र भेजा गया है। कर्मचारियों की कमी की भी जानकारी दी जा चुकी है। कप्तानगंज के अलावा अन्य दो अस्पतालों का चार्ज है। इसके चलते यहां के पशुपालकों को समुचित समय नहीं दे पाते हैं।