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Kushinagar News: लोकसंस्कृति के विविध रंगों से सजी लोकरंग महोत्सव की शाम

Mon, 13 Apr 2026 12:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर Updated Mon, 13 Apr 2026 12:31 AM IST
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An evening at the Lokrang Festival, adorned with the vibrant hues of folk culture.
रोपनी सोहनी गीत प्रस्तुत करती गांव की महिलाएं। संवाद
पडरौना/पिपरा कनक। लोकरंग सांस्कृतिक समिति, जोगिया जनूबी पट्टी द्वारा आयोजित लोकरंग महोत्सव 2026 अपने 19वें वर्ष में पूरे उत्साह और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। दूसरे दिन रविवार को कार्यक्रमों की सुव्यवस्थित और समृद्ध शृंखला ने देर रात तक दर्शकों को बांधे रखा। लोकजीवन, जनगीत, पारंपरिक नृत्य, सूफी संगीत और नाट्य मंचन ने सांस्कृतिक विविधता का जीवंत प्रदर्शन किया।
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कार्यक्रम की शुरुआत लोकरंग अभियान और संभावना कला मंच, विषय पर वक्तव्य से हुई। इसमें जनसंस्कृति के संरक्षण और उसके सामाजिक महत्व पर विचार व्यक्त किए गए। इसके बाद जनगीतों की प्रस्तुति में प्रेरणा कला मंच, वाराणसी के विजय प्रकाश, सुजीत कुमार, किशन कुमार एवं अजीत कुमार आदि कलाकारों ने जनपक्षीय स्वर को मुखर किया। इसके बाद झमटा, झरका और जंतसारी जैसे पारंपरिक लोकनृत्यों की प्रस्तुति थारू रिदम कला प्रशिक्षण संस्थान, हरनाटांड़ (पश्चिमी चंपारण) की टीम ने की। प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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खुमुई कल्चरल अकादमी, त्रिपुरा की तरफ से लेवांग बोमानी नृत्य प्रस्तुत किया गया। इसमें पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक छटा देखने को मिली। कहानीबाज थियेटर सोसाइटी, रायगढ़ की तरफ से करमा, विवाह गीत और नाचा की प्रस्तुति दी गई, जिसमें लोकजीवन की परंपराएं सजीव हो उठीं। सूफी कव्वाली के आयोजन में देवा शरीफ, बाराबंकी के गुलाम अब्बास एवं उनकी टीम ने अपनी प्रस्तुति से माहौल को सूफियाना रंग में रंग दिया।
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त्रिपुरा की टीम की तरफ से ममता नृत्य की प्रस्तुति खूब सराही गई। अंत में प्रेरणा कला मंच बनारस की ओर से “अमानत” नाटक का मंचन किया गया। प्रवीण जोशी के निर्देशन में प्रस्तुत यह नाटक मुंशी प्रेमचंद की कहानी “मंदिर-मस्जिद” पर आधारित था। इसने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर दिनेश कुशवाहा ने किया। अंत में समिति के अध्यक्ष सुभाष चंद्र कुशवाहा ने कलाकारों, अतिथियों एवं दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस दौरान समिति के हदीस अंसारी, भुवनेश्वर राय, विष्णुदेव राय, नितांत सिंह, सिकंदर गोंड, अनुभव राय, इसराइल अंसारी, संजय कुशवाहा, हबीब अंसारी, योगेंद्र कुमार, मंजूर अली आदि मौजूद रहे।

रोपनी सोहनी गीत प्रस्तुत करती गांव की महिलाएं। संवाद

रोपनी सोहनी गीत प्रस्तुत करती गांव की महिलाएं। संवाद

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