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अपात्रों के बैंक खातों में पहुंची रकम
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अपात्रों के बैंक खातों में पहुंची रकम
ई-केवाईसी का काम अधूरा, लापरवाही से हो रहा आर्थिक नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीराज। कृषक सम्मान निधि के लिए ई-केवाईसी कराने की अंतिम तिथि 30 जून को समाप्त हो गई। निर्धारित सीमा के भीतर तमकुही विकास खंड में करीब 17 हजार किसानों ने ई-केवाईसी नहीं कराया। सोशल ऑडिट का काम भी अधूरा है।
इससे अपात्रों के बैंक खातों में किसान सम्मान निधि की रकम पहुंच रही है। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जो अपात्र घोषित हो चुके हैं या मौत हो चुकी है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अपात्र और पात्र का चयन करना काफी कठिन है। मृत किसान की जानकारी के लिए उसका मृत्यु प्रमाणपत्र देना जरूरी है। अपात्रों को चिह्नित करने के लिए सोशल ऑडिट और ई-केवाईसी की प्रक्रिया शुरू की गई थी। 30 जून को अंतिम समय सीमा होने के बावजूद ऑडिट का काम पूरा नहीं हो सका है। करीब 17 हजार किसानों ने ई-केवाईसी नहीं बनवाया है। बरवा राजापाकड़ में सबसे अधिक 604 लोग बाकी हैं। सोशल ऑडिट लेखपाल, ग्राम विकास अधिकारी और कृषि विभाग की टीम के जिम्मे थी। एडीओ (एजी) तमकुही राजेंद्र प्रसाद का कहना है कि विभाग की ओर से कराई गई सोशल ऑडिट की रिपोर्ट भेज दी गई है। नाम काटना या जोड़ने का काम केंद्र स्तर पर होगा। स्थानीय स्तर पर इसमें कोई भी बदलाव नहीं किया जा सकता है।
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ई-केवाईसी का काम अधूरा, लापरवाही से हो रहा आर्थिक नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
तमकुहीराज। कृषक सम्मान निधि के लिए ई-केवाईसी कराने की अंतिम तिथि 30 जून को समाप्त हो गई। निर्धारित सीमा के भीतर तमकुही विकास खंड में करीब 17 हजार किसानों ने ई-केवाईसी नहीं कराया। सोशल ऑडिट का काम भी अधूरा है।
इससे अपात्रों के बैंक खातों में किसान सम्मान निधि की रकम पहुंच रही है। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जो अपात्र घोषित हो चुके हैं या मौत हो चुकी है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अपात्र और पात्र का चयन करना काफी कठिन है। मृत किसान की जानकारी के लिए उसका मृत्यु प्रमाणपत्र देना जरूरी है। अपात्रों को चिह्नित करने के लिए सोशल ऑडिट और ई-केवाईसी की प्रक्रिया शुरू की गई थी। 30 जून को अंतिम समय सीमा होने के बावजूद ऑडिट का काम पूरा नहीं हो सका है। करीब 17 हजार किसानों ने ई-केवाईसी नहीं बनवाया है। बरवा राजापाकड़ में सबसे अधिक 604 लोग बाकी हैं। सोशल ऑडिट लेखपाल, ग्राम विकास अधिकारी और कृषि विभाग की टीम के जिम्मे थी। एडीओ (एजी) तमकुही राजेंद्र प्रसाद का कहना है कि विभाग की ओर से कराई गई सोशल ऑडिट की रिपोर्ट भेज दी गई है। नाम काटना या जोड़ने का काम केंद्र स्तर पर होगा। स्थानीय स्तर पर इसमें कोई भी बदलाव नहीं किया जा सकता है।
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