{"_id":"698e3e13fd2f4e39010bf2df","slug":"after-the-rohua-nala-bridge-scam-in-khadda-the-family-of-the-zilla-panchayat-president-is-again-in-the-news-kushinagar-news-c-205-1-deo1003-154581-2026-02-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kushinagar News: खड्डा के रोहुआ नाला पुल घोटाले के बाद फिर चर्चा में जिपं अध्यक्ष का परिवार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kushinagar News: खड्डा के रोहुआ नाला पुल घोटाले के बाद फिर चर्चा में जिपं अध्यक्ष का परिवार
Fri, 13 Feb 2026 02:24 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Fri, 13 Feb 2026 02:24 AM IST
विज्ञापन
पडरौना/खड्डा। सीबीआई जांच में दोषी पाए गए पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष एवं वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि प्रदीप जायसवाल का परिवार बार फिर चर्चा में आ गया है।
कोर्ट के आदेश पर पडरौना कोतवाली में प्रदीप जायसवाल के दो बेटों पर प्राथमिकी दर्ज हुई है। इसमें राजदरबार की जमीन की हेराफेरी का मामला सामने आया है। इसके पूर्व खड्डा क्षेत्र में मनरेगा से बने रोहुआ पुल के घोटाले के मामले में सीबीआई प्रदीप जायसवाल समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। यह मामला वर्तमान में सीबीआई न्यायालय लखनऊ में विचाराधीन है। वर्तमान में प्रदीप जायसवाल की पत्नी सावित्री जायसवाल जिला पंचायत अध्यक्ष हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष रहते प्रदीप जायसवाल ने नियम-कानूनों को दरकिनार कर खड्डा ब्लॉक के रोहुआ नाले पर 68.93 लाख रुपये की लागत से पुल निर्माण की स्वीकृति दी थी। निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी के चलते 20 फरवरी वर्ष 2011 को पुल ढह गया था। पुल के निर्माण में मनरेगा का धन खर्च हुआ था। मामले ने तूल पकड़ा तो जिला प्रशासन ने खड्डा थाने में धोखाधड़ी, कूटरचना, गबन सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
विज्ञापन
बाद में यह मामला उत्तर प्रदेश आर्थिक अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) को सौंप दिया गया। यह मामला लंबे समय तक ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने कुशीनगर सहित प्रदेश के सात जिलों में वर्ष 2007 से 2010 के बीच हुए मनरेगा कार्यों में कथित घोटालों की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। फरवरी 2014 में ईओडब्ल्यू वाराणसी से यह मुकदमा सीबीआई को हस्तांतरित हुआ। जांच के बाद सीबीआई टीम ने प्रदीप जायसवाल सहित कई लोगों को दोषी पाया।
फरवरी 2015 में सीबीआई के तत्कालीन डीएसपी पीके श्रीवास्तव ने प्रदीप जायसवाल को गिरफ्तार कर सीबीआई अदालत लखनऊ में पेश किया। वहां से उन्हें जेल भेज दिया गया था। बाद में जमानत पर रिहा हुए थे। जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने साक्ष्यों के आधार पर प्रदीप जायसवाल सहित अन्य आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया।
पिछले दिनों पडरौना कोतवाली पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर जिला पंचायत अध्यक्ष सावित्री जायसवाल के बेटे डुम्मरभार गांव निवासी गिरिजेश कुमार जायसवाल, संजीव कुमार जायसवाल समेत 15 लोगों पर दस्तावेजों में हेराफेरी कर राजदरबार की जमीन की खरीद फरोख्त की प्राथमिकी दर्ज की है।
दबाव में आई कोतवाली पुलिस, एफआर की तैयारी :
कोर्ट के आदेश पर जिन 15 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज है, वे प्रभावशाली हैं और सत्ता के करीब रहने वाले लोग हैं। सूत्रों ने बताया कि मुकदमे में एफआर लगाने का खाका कोतवाली पुलिस ने तय कर लिया है। इसकी चर्चा शहर में आम है। कोतवाल हर्षवर्धन सिंह ने बताया कि सुरेंद्र यादव के मुकदमे में दम नहीं है। इसमें एफआर लग जाएगी। पहले दर्ज प्राथमिकी ही सही है।
विज्ञापन
कोर्ट के आदेश पर पडरौना कोतवाली में प्रदीप जायसवाल के दो बेटों पर प्राथमिकी दर्ज हुई है। इसमें राजदरबार की जमीन की हेराफेरी का मामला सामने आया है। इसके पूर्व खड्डा क्षेत्र में मनरेगा से बने रोहुआ पुल के घोटाले के मामले में सीबीआई प्रदीप जायसवाल समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। यह मामला वर्तमान में सीबीआई न्यायालय लखनऊ में विचाराधीन है। वर्तमान में प्रदीप जायसवाल की पत्नी सावित्री जायसवाल जिला पंचायत अध्यक्ष हैं।
विज्ञापन
जिला पंचायत अध्यक्ष रहते प्रदीप जायसवाल ने नियम-कानूनों को दरकिनार कर खड्डा ब्लॉक के रोहुआ नाले पर 68.93 लाख रुपये की लागत से पुल निर्माण की स्वीकृति दी थी। निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी के चलते 20 फरवरी वर्ष 2011 को पुल ढह गया था। पुल के निर्माण में मनरेगा का धन खर्च हुआ था। मामले ने तूल पकड़ा तो जिला प्रशासन ने खड्डा थाने में धोखाधड़ी, कूटरचना, गबन सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
विज्ञापन
बाद में यह मामला उत्तर प्रदेश आर्थिक अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) को सौंप दिया गया। यह मामला लंबे समय तक ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने कुशीनगर सहित प्रदेश के सात जिलों में वर्ष 2007 से 2010 के बीच हुए मनरेगा कार्यों में कथित घोटालों की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। फरवरी 2014 में ईओडब्ल्यू वाराणसी से यह मुकदमा सीबीआई को हस्तांतरित हुआ। जांच के बाद सीबीआई टीम ने प्रदीप जायसवाल सहित कई लोगों को दोषी पाया।
फरवरी 2015 में सीबीआई के तत्कालीन डीएसपी पीके श्रीवास्तव ने प्रदीप जायसवाल को गिरफ्तार कर सीबीआई अदालत लखनऊ में पेश किया। वहां से उन्हें जेल भेज दिया गया था। बाद में जमानत पर रिहा हुए थे। जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने साक्ष्यों के आधार पर प्रदीप जायसवाल सहित अन्य आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया।
पिछले दिनों पडरौना कोतवाली पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर जिला पंचायत अध्यक्ष सावित्री जायसवाल के बेटे डुम्मरभार गांव निवासी गिरिजेश कुमार जायसवाल, संजीव कुमार जायसवाल समेत 15 लोगों पर दस्तावेजों में हेराफेरी कर राजदरबार की जमीन की खरीद फरोख्त की प्राथमिकी दर्ज की है।
दबाव में आई कोतवाली पुलिस, एफआर की तैयारी :
कोर्ट के आदेश पर जिन 15 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज है, वे प्रभावशाली हैं और सत्ता के करीब रहने वाले लोग हैं। सूत्रों ने बताया कि मुकदमे में एफआर लगाने का खाका कोतवाली पुलिस ने तय कर लिया है। इसकी चर्चा शहर में आम है। कोतवाल हर्षवर्धन सिंह ने बताया कि सुरेंद्र यादव के मुकदमे में दम नहीं है। इसमें एफआर लग जाएगी। पहले दर्ज प्राथमिकी ही सही है।