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कुशीनगर : सूची में नाम गड़बड़, ढूंढे नहीं मिल रहे आयुष्मान भारत योजना के ज्यादातर लाभार्थी
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कुशीनगर : सूची में नाम गड़बड़, ढूंढे नहीं मिल रहे आयुष्मान भारत योजना के ज्यादातर लाभार्थी
कुशीनगर। आयुष्मान भारत योजना का लाभ बहुत से लाभार्थियों को नहीं मिल पा रहा है। 11 लाख 47 हजार 975 लाभार्थियों में से अब तक दो लाख 66 हजार 132 लोगों का ही गोल्डेन कार्ड बन पाया है। इन लाभार्थियों की लिस्ट में किसी के नाम में गड़बड़ी है तो किसी के पते में। कई लोगों का निधन हो गया है, फिर भी उनका नाम सूची में है।
दूसरी तरफ पात्र व्यक्ति इस योजना के लाभ के लिए भटक रहे हैं, जबकि बहुत से अपात्रों का नाम सूची में शामिल है। इस विषमता की वजह से लोग योजना के लाभ से वंचित रह गए हैं। अब तो विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी इसे लेकर परेशान हैं।
आयुष्मान भारत योजना के जरिए समाज के कमजोर वर्ग को लोगों को हेल्थ इंश्योरेंस की सुविधा दी जाती है। इस योजना को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना भी कहा जाता है। इसके तहत चयनित किसी भी अस्पताल में लाभार्थी सालाना पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा का लाभ ले सकता है। जनपद में इस योजना के लाभार्थियों की सूची वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर तैयार हुई है। इस योजना की शुरूआत 23 सितंबर 2018 को हुई थी।
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इस योजना में जिले के 11 लाख 47 हजार 975 लोगों का चयन किया गया था, लेकिन लाभार्थियों के सर्वे के बाद तैयार की गई सूची में गलतियों की वजह से आज भी बहुत से परिवार सूची में नाम होने के बावजूद योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। यही वजह है कि डीएम एस. राजलिंगम के स्तर से भी काफी प्रयास के बावजूद अब तक दो लाख 66 हजार 132 लाभार्थियों का गोल्डेन कार्ड बन पाया है।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानी जाए तो लाभार्थियों का गोल्डेन कार्ड न बन पाने की वजह दस साल पुरानी जनगणना को आधार मानकर सूची तैयार किया जाना है, जिसमें बहुत से नाम गलत हैं। इन वर्षों में बहुत से लोगों की मौत हो चुकी है। सूची में सुधार लखनऊ से होना है, जिसकी इजाजत नहीं दी जा रही है। अभी नए नाम भी सूची में शामिल नहीं किए जा रहे हैं। इस वजह से पात्र लोग जहां इस योजना से लाभ वंचित रह गए हैं, वहीं चयनित लाभार्थी सूची में कमी की वजह से योजना के लाभ से वंचित हो जा रहे हैं।
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कुशीनगर। आयुष्मान भारत योजना का लाभ बहुत से लाभार्थियों को नहीं मिल पा रहा है। 11 लाख 47 हजार 975 लाभार्थियों में से अब तक दो लाख 66 हजार 132 लोगों का ही गोल्डेन कार्ड बन पाया है। इन लाभार्थियों की लिस्ट में किसी के नाम में गड़बड़ी है तो किसी के पते में। कई लोगों का निधन हो गया है, फिर भी उनका नाम सूची में है।
दूसरी तरफ पात्र व्यक्ति इस योजना के लाभ के लिए भटक रहे हैं, जबकि बहुत से अपात्रों का नाम सूची में शामिल है। इस विषमता की वजह से लोग योजना के लाभ से वंचित रह गए हैं। अब तो विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी इसे लेकर परेशान हैं।
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आयुष्मान भारत योजना के जरिए समाज के कमजोर वर्ग को लोगों को हेल्थ इंश्योरेंस की सुविधा दी जाती है। इस योजना को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना भी कहा जाता है। इसके तहत चयनित किसी भी अस्पताल में लाभार्थी सालाना पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा का लाभ ले सकता है। जनपद में इस योजना के लाभार्थियों की सूची वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर तैयार हुई है। इस योजना की शुरूआत 23 सितंबर 2018 को हुई थी।
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इस योजना में जिले के 11 लाख 47 हजार 975 लोगों का चयन किया गया था, लेकिन लाभार्थियों के सर्वे के बाद तैयार की गई सूची में गलतियों की वजह से आज भी बहुत से परिवार सूची में नाम होने के बावजूद योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। यही वजह है कि डीएम एस. राजलिंगम के स्तर से भी काफी प्रयास के बावजूद अब तक दो लाख 66 हजार 132 लाभार्थियों का गोल्डेन कार्ड बन पाया है।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानी जाए तो लाभार्थियों का गोल्डेन कार्ड न बन पाने की वजह दस साल पुरानी जनगणना को आधार मानकर सूची तैयार किया जाना है, जिसमें बहुत से नाम गलत हैं। इन वर्षों में बहुत से लोगों की मौत हो चुकी है। सूची में सुधार लखनऊ से होना है, जिसकी इजाजत नहीं दी जा रही है। अभी नए नाम भी सूची में शामिल नहीं किए जा रहे हैं। इस वजह से पात्र लोग जहां इस योजना से लाभ वंचित रह गए हैं, वहीं चयनित लाभार्थी सूची में कमी की वजह से योजना के लाभ से वंचित हो जा रहे हैं।