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48 घंटे के बाद हुआ अंतिम संस्कार
Kushinagar
Updated Mon, 30 Dec 2013 05:42 AM IST
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रामकोला। अपने पिता के हिस्से की संपति को पाने के लिए बेटी ने ही अपने पिता का अंतिम संस्कार 48 घंटे तक रोके रखा। उनका आरोप है कि चाचा ने उनके पिता के हिस्से की जमीन पर फर्जी तरीके से अपना नाम दर्ज करवा लिया है। मौके पर पहुंचे थानाध्यक्ष रामकोला ने पूरे मामले की जानकारी लेने के बाद आरोपी चाचा तथा उनके दामाद को अपने हिरासत में ले लिया। और पीड़ित के हिस्से की मकान को खाली करवाकर काबिज कराया। इसके बाद जाकर बेटी ने स्वंय ही पिता का अंतिम संस्कार किया।
रामकोला थाना के ग्राम पिपरावरसीवान के टोला लालचन छपरा निवासी बच्चू यादव के दो पुत्र कुबेर व केदारी थे। बच्चू की मौत वर्ष 1989 में हो जाने के बाद कुबेर ने पूरी जमीन अपने नाम वरासत करा लिया। उस समय केदारी की बेटी अंजना छोटी थी, वह जमीन के बारे में नहीं जानती थी। जब उसकी शादी हुई और जब ससुराल के लोग अंजना के पिता केदारी के हिस्से की जमीन का पता किए तो पता चला कि केदारी के पिता बच्चू के नाम से 2.50 एकड़ जमीन थी। लेकिन उनके मौत के बाद जब जमीन का वरासत हुआ है तो वह पूरी जमीन अकेले कुबेर के नाम दर्ज हो गई है। उस जमीन में केदारी का नाम नहीं है। अंजना बताती है कि उसके पूछने पर चाचा कुबेर बार-बार कहते रहे कि तुम्हारी जमीन मिलेगी। अंजना का आरोप है कि जब वह अपने पिता के पास आती थी तो चाचा और उनके परिवार के लोग उन्हें मारपीट कर खदेड़ दिया करते थे। अंजना कहती हैं कि पिता की तबियत खराब होने की सूचना पर वह एक सप्ताह से अपने पिता के पास आकर जबरदस्ती रह रही थी। इसको लेकर चाचा कुबेर के परिजन विवाद भी किए थे। इस संबंध में उसने खोटहीं पुलिस चौकी पर शिकायत भी की थी। शुक्रवार को पिता केदारी के पास थी कि भोर में तीन बजे उनकी मौत हो गई। उसके बाद से अंजना ने पिता का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया था। रविवार को जब पुलिस ने उसके पिता के हिस्से की जमीन दिलाने या उसके एवज में रुपये दिलाने की बात कही तब जाकर पिता के शव का अंतिम संस्कार हुआ। इस संबंध में गांव के लोगों ने शनिवार को गांव के प्रधान की मौजूदगी में पंचायत भी किया लेकिन नतीजा नहीं निकल सका। रविवार को सुबह 11 बजे रामकोला थानाध्यक्ष जितेन्द्र यादव के सामने जब अंजना अपनी पीड़ा सुना रही थी तो उस समय उनके पटीदारों और गांव के लोगों ने अंजना का साथ दिया। इसके बाद पुलिस कार्रवाई करते हुए आरोपियों को अपने साथ ले आई। फिर अंजना ने अपने ससुराल और गांव के लोगों के सहयोग से अपने पिता का अंतिम संस्कार स्वयं किया।
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रामकोला थाना के ग्राम पिपरावरसीवान के टोला लालचन छपरा निवासी बच्चू यादव के दो पुत्र कुबेर व केदारी थे। बच्चू की मौत वर्ष 1989 में हो जाने के बाद कुबेर ने पूरी जमीन अपने नाम वरासत करा लिया। उस समय केदारी की बेटी अंजना छोटी थी, वह जमीन के बारे में नहीं जानती थी। जब उसकी शादी हुई और जब ससुराल के लोग अंजना के पिता केदारी के हिस्से की जमीन का पता किए तो पता चला कि केदारी के पिता बच्चू के नाम से 2.50 एकड़ जमीन थी। लेकिन उनके मौत के बाद जब जमीन का वरासत हुआ है तो वह पूरी जमीन अकेले कुबेर के नाम दर्ज हो गई है। उस जमीन में केदारी का नाम नहीं है। अंजना बताती है कि उसके पूछने पर चाचा कुबेर बार-बार कहते रहे कि तुम्हारी जमीन मिलेगी। अंजना का आरोप है कि जब वह अपने पिता के पास आती थी तो चाचा और उनके परिवार के लोग उन्हें मारपीट कर खदेड़ दिया करते थे। अंजना कहती हैं कि पिता की तबियत खराब होने की सूचना पर वह एक सप्ताह से अपने पिता के पास आकर जबरदस्ती रह रही थी। इसको लेकर चाचा कुबेर के परिजन विवाद भी किए थे। इस संबंध में उसने खोटहीं पुलिस चौकी पर शिकायत भी की थी। शुक्रवार को पिता केदारी के पास थी कि भोर में तीन बजे उनकी मौत हो गई। उसके बाद से अंजना ने पिता का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया था। रविवार को जब पुलिस ने उसके पिता के हिस्से की जमीन दिलाने या उसके एवज में रुपये दिलाने की बात कही तब जाकर पिता के शव का अंतिम संस्कार हुआ। इस संबंध में गांव के लोगों ने शनिवार को गांव के प्रधान की मौजूदगी में पंचायत भी किया लेकिन नतीजा नहीं निकल सका। रविवार को सुबह 11 बजे रामकोला थानाध्यक्ष जितेन्द्र यादव के सामने जब अंजना अपनी पीड़ा सुना रही थी तो उस समय उनके पटीदारों और गांव के लोगों ने अंजना का साथ दिया। इसके बाद पुलिस कार्रवाई करते हुए आरोपियों को अपने साथ ले आई। फिर अंजना ने अपने ससुराल और गांव के लोगों के सहयोग से अपने पिता का अंतिम संस्कार स्वयं किया।
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