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न रैन बसेरा तैयार, ना अलाव जले
Kushinagar
Updated Sat, 21 Dec 2013 05:42 AM IST
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पडरौना। ठंढ तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इससे बचाव के लिए प्रशासनिक तैयारियां काफी धीमी हैं। जिला मुख्यालय पर अब तक रैन बसेरा तैयार नहीं हो सका। अभी उसके लिए साफ सफाई हो रही है। वहीं प्रमुख जगहाें पर अलाव की व्यवस्था नहीं की गई है। शाम ढलते ही लोगों की दिक्कतें काफी बढ़ जा रही हैं।
मौसम के बदलते मिजाज से एक सप्ताह के अंदर ठंढ काफी तेजी से बढ़ी है। दिन में सूर्य की रोशनी दिखने के बाद लोगों को सकून मिल रहा है, बाजारों और नगरों में चहलकदमी भी बढ़ जा रही है। शाम ढलते ही ठंड बढ़ जा रही है। उसके बाद लोगों की दुश्वारियां बढ़ जा रही है। पिछले हफ्ते ही जिला प्रशासन की ओर से सार्वजनिक जगहों पर अलाव जलवाने की व्यवस्था कराने के लिए कहा गया था। बावजूद इसके ऐसा नहीं हो सका। नगर के रोडवेज और उसके आसपास, सुभाष चौक, रेलवे स्टेशन के आसपास, तिलक चौक, बावली चौक, बेलवा चुंगी, गुदरी बाजार, सब्जी मंडी, छावनी आदि प्रमुख जगहों पर अब तक अलाव की व्यवस्था नहीं कराई गई। इन जगहों पर सुबह शाम लोग ठंड से ठिठुरने को मजबूर हैं। वहीं नगर में रैन बसेरा के लिए तीन दिन पहले ही जगह का चयन कर लिया गया था। बावजूद इसके अब तक रैन बसेरा आबाद नहीं हो सका। रोडवेज परिसर में जिन दो कमरों को रैन बसेरा के लिए चुना गया है, वे इतने छोटे हैं कि एक कमरे में दो लोगों से ज्यादा सो ही नहीं सकते। इन कमरों का निर्माण दुकानों के लिए कराया गया है। शुक्रवार को इनकी साफ सफाई कराई जा रही थी। रोडवेज के ही पीछे बरामदे में भी इसके लिए इंतजाम करने की कवायद की जा रही है। इस जगह की रंगाई-पुताई कराई जा रही थी। शाम तक रैन बसेरा के लिए न तो कंबल का इंतजाम हो पाया था, ना ही बिस्तर आदि सामान का।
वहीं जिले के अन्य जगहों पर भी यही हाल है। सबसे अधिक परेशानी चीनी मिलों पर गन्ना लेकर आए गाड़ीवानों और ट्रैक्टर चालकों को हो रही है। जिले की लगभग सभी चीनी मिलों पर गन्ना लदी गाड़ियां यार्ड के बाहर तक दिख रही हैं। इस कारण हर चीनी मिल पर जाम की स्थिति है। यार्ड के बाहर के गाड़ीवान या चालकों को पूरी रात ट्रैक्टर और बैलगाड़ी पर बैठकर अपना नंबर का इंतजार करते हैं कि कब उन्हें यार्ड में प्रवेश मिलेगा। अपनी बारी के इंतजार में इन लोगों को पूरी रात ठंढ की मार झेलनी पड़ती है। इस मार से कुछ हद तक अलाव इन्हें राहत पहुंचाती है, लेकिन जिले के किसी चीनी मिल के केनयार्ड या उसके अगल-बगल अलाव की व्यवस्था नहीं हो सकी है।
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मौसम के बदलते मिजाज से एक सप्ताह के अंदर ठंढ काफी तेजी से बढ़ी है। दिन में सूर्य की रोशनी दिखने के बाद लोगों को सकून मिल रहा है, बाजारों और नगरों में चहलकदमी भी बढ़ जा रही है। शाम ढलते ही ठंड बढ़ जा रही है। उसके बाद लोगों की दुश्वारियां बढ़ जा रही है। पिछले हफ्ते ही जिला प्रशासन की ओर से सार्वजनिक जगहों पर अलाव जलवाने की व्यवस्था कराने के लिए कहा गया था। बावजूद इसके ऐसा नहीं हो सका। नगर के रोडवेज और उसके आसपास, सुभाष चौक, रेलवे स्टेशन के आसपास, तिलक चौक, बावली चौक, बेलवा चुंगी, गुदरी बाजार, सब्जी मंडी, छावनी आदि प्रमुख जगहों पर अब तक अलाव की व्यवस्था नहीं कराई गई। इन जगहों पर सुबह शाम लोग ठंड से ठिठुरने को मजबूर हैं। वहीं नगर में रैन बसेरा के लिए तीन दिन पहले ही जगह का चयन कर लिया गया था। बावजूद इसके अब तक रैन बसेरा आबाद नहीं हो सका। रोडवेज परिसर में जिन दो कमरों को रैन बसेरा के लिए चुना गया है, वे इतने छोटे हैं कि एक कमरे में दो लोगों से ज्यादा सो ही नहीं सकते। इन कमरों का निर्माण दुकानों के लिए कराया गया है। शुक्रवार को इनकी साफ सफाई कराई जा रही थी। रोडवेज के ही पीछे बरामदे में भी इसके लिए इंतजाम करने की कवायद की जा रही है। इस जगह की रंगाई-पुताई कराई जा रही थी। शाम तक रैन बसेरा के लिए न तो कंबल का इंतजाम हो पाया था, ना ही बिस्तर आदि सामान का।
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वहीं जिले के अन्य जगहों पर भी यही हाल है। सबसे अधिक परेशानी चीनी मिलों पर गन्ना लेकर आए गाड़ीवानों और ट्रैक्टर चालकों को हो रही है। जिले की लगभग सभी चीनी मिलों पर गन्ना लदी गाड़ियां यार्ड के बाहर तक दिख रही हैं। इस कारण हर चीनी मिल पर जाम की स्थिति है। यार्ड के बाहर के गाड़ीवान या चालकों को पूरी रात ट्रैक्टर और बैलगाड़ी पर बैठकर अपना नंबर का इंतजार करते हैं कि कब उन्हें यार्ड में प्रवेश मिलेगा। अपनी बारी के इंतजार में इन लोगों को पूरी रात ठंढ की मार झेलनी पड़ती है। इस मार से कुछ हद तक अलाव इन्हें राहत पहुंचाती है, लेकिन जिले के किसी चीनी मिल के केनयार्ड या उसके अगल-बगल अलाव की व्यवस्था नहीं हो सकी है।
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