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अमर सेनानी खुदीराम बोस याद किए गए
Kushinagar
Updated Thu, 05 Dec 2013 05:42 AM IST
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पडरौना। मंगलवार को नगर के चित्रगुप्त मंदिर परिसर में देश के प्रथम राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. राजेंद्र बाबू और आजादी की लड़ाई में सबसे पहले फांसी के फंदे पर झूलने वाले खुदीराम बोस को उनकी जयंती पर शिद्दत से याद किया गया। लोगों ने उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चित्रगुप्त मंदिर समिति के अध्यक्ष नरेंद्र वर्मा ने कहा कि ऐसे महापुरुषों का जन्म कई युगों के बाद होता है। इनकी जीवनशैली को हमें अपने जीवन में चरितार्थ करना चाहिए।
समिति के महासचिव संजय चाणक्य ने कहा कि छह वर्ष की आयु में ही अपने सर से माता पिता का सानिध्य खो देने वाले खुदीराम बोस ने 1908 में अंग्रेज मजिस्ट्रेट किंग्स फोर्ड की गाड़ी पर बम फेंका था, जिसमेें कई अंग्रेज मारे गए थे। इसी जुर्म में उन्हें फांसी दी गई। खुदीराम बोस स्वतंत्रता आंदोलन में फांसी पर झूलने वाले पहले व्यक्ति थे। समारोह में डॉ. जगदानंद श्रीवास्तव, मनोज श्रीवास्तव, जितेंद्र श्रीवास्तव, हरेंद्र वर्मा, सचिन, सतीश, राजन, हिमांशु और आदित्य सहित काफी संख्या में चित्रांश समाज के लोग मौजूद थे।
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निष्पक्ष न्याय के प्रबल समर्थक थे राजेंद्र बाबू
तमकुहीरोड। देश के प्रथम राष्ट्रपति और प्रख्यात अधिवक्ता रहे डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर क्षेत्र के अधिवक्ताओं ने उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। वकीलों ने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद निष्पक्ष न्याय के प्रबल समर्थक थे। इसके लिए उन्होंने जीवनपर्यंत कार्य किया।
वरिष्ठ अधिवक्ता मनेंद्र शर्मा ने कहा कि डॉ. प्रसाद देश में मजबूत न्यायप्रणाली और निष्पक्ष न्याय के पक्षधर थे। अजय गुप्ता, सूर्यनाथ सिंह, संजय गुप्ता, शकील अहमद, उमेश वर्मा, जयप्रकाश पांडेय, महावीर प्रसाद, उमेश गुप्ता, मनोज सिंह आदि वकीलों ने उनके पदचिह्नों पर चलने का संकल्प लिया।
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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चित्रगुप्त मंदिर समिति के अध्यक्ष नरेंद्र वर्मा ने कहा कि ऐसे महापुरुषों का जन्म कई युगों के बाद होता है। इनकी जीवनशैली को हमें अपने जीवन में चरितार्थ करना चाहिए।
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समिति के महासचिव संजय चाणक्य ने कहा कि छह वर्ष की आयु में ही अपने सर से माता पिता का सानिध्य खो देने वाले खुदीराम बोस ने 1908 में अंग्रेज मजिस्ट्रेट किंग्स फोर्ड की गाड़ी पर बम फेंका था, जिसमेें कई अंग्रेज मारे गए थे। इसी जुर्म में उन्हें फांसी दी गई। खुदीराम बोस स्वतंत्रता आंदोलन में फांसी पर झूलने वाले पहले व्यक्ति थे। समारोह में डॉ. जगदानंद श्रीवास्तव, मनोज श्रीवास्तव, जितेंद्र श्रीवास्तव, हरेंद्र वर्मा, सचिन, सतीश, राजन, हिमांशु और आदित्य सहित काफी संख्या में चित्रांश समाज के लोग मौजूद थे।
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निष्पक्ष न्याय के प्रबल समर्थक थे राजेंद्र बाबू
तमकुहीरोड। देश के प्रथम राष्ट्रपति और प्रख्यात अधिवक्ता रहे डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर क्षेत्र के अधिवक्ताओं ने उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। वकीलों ने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद निष्पक्ष न्याय के प्रबल समर्थक थे। इसके लिए उन्होंने जीवनपर्यंत कार्य किया।
वरिष्ठ अधिवक्ता मनेंद्र शर्मा ने कहा कि डॉ. प्रसाद देश में मजबूत न्यायप्रणाली और निष्पक्ष न्याय के पक्षधर थे। अजय गुप्ता, सूर्यनाथ सिंह, संजय गुप्ता, शकील अहमद, उमेश वर्मा, जयप्रकाश पांडेय, महावीर प्रसाद, उमेश गुप्ता, मनोज सिंह आदि वकीलों ने उनके पदचिह्नों पर चलने का संकल्प लिया।