मिल और किसानों का होगा नुकसान

Kushinagar Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
रामकोला (कुशीनगर)। मिल के सुरक्षित होम जोन से दूसरे मिल को गन्ना आवंटित किए जाने का मामला गरमा गया है। पिछले 80 वर्षों में कभी ऐसा नहीं हुआ है कि किसी चीनी मिल के सुरक्षित क्षेत्र का गन्ना दूसरे मिल को आवंटित किया गया हो। वह भी तब, जब उस चीनी मिल की पेराई क्षमता पर्याप्त हो। आगामी पेराई सत्र के लिए हुए आवंटन में पंजाब चीनी मिल रामकोला के सुरक्षित गन्ना क्षेत्र के दो सेंटरों को ढाढ़ा चीनी मिल को एलाट कर दिया गया है। इससे किसान आंदोलित हैं और मिल प्रबंधन भी इससे मिल व किसानों को नुकसान होने का तर्क दे रहा है।
रामकोला पंजाब चीनी मिल ने केन यूनियन से 26470 हेक्टेयर क्षेत्रफल के गन्ने की मांग की थी। समितियों ने 26045 हेक्टेयर क्षेत्रफल का गन्ना प्रस्तावित किया, जिसमें से 1086 हेक्टयेर क्षेत्रफल काट दिया गया है। रामकोला की पंजाब चीनी मिल की स्थापना वर्ष 1932-33 में हुई थी। उस समय रामकोला की खेतान चीनी मिल खेतान परिवार के मालिकान में थी। उस समय गन्ना क्षेत्र के आवंटन में खेतान चीनी मिल को क्रीमी इलाके आवंटित किए गए थे। शेष इलाके रामकोला की तत्कालीन गंगेश्वर चीनी मिल को दिए गए थे। इस चीनी मिल ने अपने इलाके में गन्ने के विकास के लिए काफी कुछ किया भी। उस समय से परासखांड़ और जुड़वनियां सेंटर इस चीनी मिल को मिला था। तब से लेकर पिछले पेराई सत्र तक यह रामकोला की गंगेश्वर से लेकर अब पंजाब चीनी मिल का होम जोन रहा है। मिल ने अपने तमाम उतार-चढ़ाव के दौर में भी इस क्षेत्र के गन्ना किसानों को अलग नहीं होने दिया। वर्ष 1932-33 में इस चीनी मिल की पेराई क्षमता महज 10 हजार कुंटल प्रतिदिन थी, लेकिन वर्ष 1998 आते-आते इस मिल ने अपनी पेराई क्षमता 35 हजार कुंटल प्रतिदिन कर दी। जब इस क्षेत्र में गन्ने की पैदावार बढ़ी तो मिल वर्ष 2006-07 में अपनी पेराई क्षमता में फिर वृद्धि करते हुए प्रतिदिन 65 हजार कुंटल गन्ने की पेराई करने लगी। इन्हीं गन्ना क्षेत्रों के दम पर इस मिल ने निकट भविष्य में 180 करोड़ रुपये के निवेश का मन बनाया है। पेराई क्षमता बढ़ाने के साथ बिजली उत्पादन करने की योजना अंदरखाने में पक रही है। इसी बीच, दूसरे चीनी मिल को आंवटित क्षेत्रों के गन्ना किसान अनायास आंदोलित नहीं है। उनको भविष्य की चिंता सता रही है। किसानों का कहना है कि इस चीनी मिल ने प्रदेश में सबसे पहले गन्ना मूल्य का भुगतान दिया है। जब भी डिफर मूल्य की बात आई है तो इस मिल ने सबसे पहले भुगतान किया है। केन यूनियन की बैठक में भी प्रस्ताव पास कर इन सेंटरों का गन्ना रामकोला की पंजाब चीनी मिल को देने का प्रस्ताव पास किया गया था। किसान नाराज हैं कि आखिर किन परिस्थितियों में पंजाब चीनी मिल के सुरक्षित क्षेत्र का गन्ना दूसरी चीनी मिल को आवंटित किया गया। दो दिनों पूर्व प्रभावित किसानों ने डीएम को पत्र देकर मांग भी की है कि उनका गन्ना रामकोला पंजाब चीनी मिल को ही एलाट किया जाय। आवंटन प्रक्रिया में सुधार न होने पर मिल को गन्ना न देने और आंदोलन करने की भी बात किसानों ने कही है। इस संबंध में मिल के गन्ना महाप्रबंधक पीएन सिंह का कहना है कि कभी किसी भी मिल के होम जोन का गन्ना नहीं काटा जाता है। ऐसा करने से मिल का नुकसान होगा और किसानों को भी दिक्कत होगी।

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