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खाते में पड़े हैं एक करोड़, खर्च नहीं रकम
Updated Mon, 30 Jul 2018 11:45 PM IST
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खाते में पड़े हैं एक करोड़, खर्च नहीं हुई रकम
अविश्वास प्रस्ताव के चलते रिक्त हुआ है विशुनपुरा ब्लॉक प्रमुख का पद
अमर उजाला ब्यूरो
जटहा बाजार। क्षेत्र पंचायत विशुनपुरा को शासन से मिले राज्य वित्त के बजट का अधिकांश हिस्सा खर्च नहीं हो पाया है। बैंक खाते में एक करोड़ चार लाख रुपये और मनरेगा खाते में 32 लाख रुपये पड़े हुए हैं। यह बजट प्रस्तावित कार्य शुरू नहीं होने की वजह से बच गया है।
विशुनपुरा क्षेत्र पंचायत की कुर्सी पर भाजपा नेता अमित उर्फ गोल्डी जायसवाल की पत्नी कंचन काबिज थीं। दो वर्ष पहले हुए चुनाव में कंचन को 126 बीडीसी सदस्यों में से 118 का समर्थन मिला था। लेकिन चुनाव बाद बीडीसी सदस्यों की बढ़ती नाराजगी के चलते विकास कार्य प्रभावित हो गया। बीडीसी सदस्य उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ले आए थे। अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद एएसडीएम को वहां का प्रशासक नियुक्त कर दिया गया है। उधर, राजनीतिक उठापटक की वजह से वित्तीय वर्ष 2017-18 में राज्य वित्त के खाते में कुल एक करोड़ चार लाख रुपये तथा मनरेगा खाते में 32 लाख रुपये पड़े हैं। क्षेत्र पंचायत राज्य वित्त के बजट से नाली, खड़ंजा, पुलिया, इंटरलाकिंग आदि जरूरी कार्य करा सकती है। इसके अलावा मनरेगा की धनराशि से मिट्टी भराई, शेड, वर्मी कंपोस्ट, मेड़बंदी आदि 30 तरह के कार्य हो सकते हैं। इस लापरवाही के चलते 15 आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण कार्य रुका है। उधर, ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी रिक्त होने के कारण एएसडीएम को कार्यवाहक प्रशासक नियुक्त किया गया है। पिछले दो वर्षों में 15 आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण नहीं हो सका है। पक्ष-विपक्ष की मजबूत घेराबंदी के चलते विकास संबंधी मामलों में निर्णय लेने के लिए मजबूत इच्छाशक्ति दिखानी होगी।
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अविश्वास प्रस्ताव के चलते रिक्त हुआ है विशुनपुरा ब्लॉक प्रमुख का पद
अमर उजाला ब्यूरो
जटहा बाजार। क्षेत्र पंचायत विशुनपुरा को शासन से मिले राज्य वित्त के बजट का अधिकांश हिस्सा खर्च नहीं हो पाया है। बैंक खाते में एक करोड़ चार लाख रुपये और मनरेगा खाते में 32 लाख रुपये पड़े हुए हैं। यह बजट प्रस्तावित कार्य शुरू नहीं होने की वजह से बच गया है।
विशुनपुरा क्षेत्र पंचायत की कुर्सी पर भाजपा नेता अमित उर्फ गोल्डी जायसवाल की पत्नी कंचन काबिज थीं। दो वर्ष पहले हुए चुनाव में कंचन को 126 बीडीसी सदस्यों में से 118 का समर्थन मिला था। लेकिन चुनाव बाद बीडीसी सदस्यों की बढ़ती नाराजगी के चलते विकास कार्य प्रभावित हो गया। बीडीसी सदस्य उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ले आए थे। अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद एएसडीएम को वहां का प्रशासक नियुक्त कर दिया गया है। उधर, राजनीतिक उठापटक की वजह से वित्तीय वर्ष 2017-18 में राज्य वित्त के खाते में कुल एक करोड़ चार लाख रुपये तथा मनरेगा खाते में 32 लाख रुपये पड़े हैं। क्षेत्र पंचायत राज्य वित्त के बजट से नाली, खड़ंजा, पुलिया, इंटरलाकिंग आदि जरूरी कार्य करा सकती है। इसके अलावा मनरेगा की धनराशि से मिट्टी भराई, शेड, वर्मी कंपोस्ट, मेड़बंदी आदि 30 तरह के कार्य हो सकते हैं। इस लापरवाही के चलते 15 आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण कार्य रुका है। उधर, ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी रिक्त होने के कारण एएसडीएम को कार्यवाहक प्रशासक नियुक्त किया गया है। पिछले दो वर्षों में 15 आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण नहीं हो सका है। पक्ष-विपक्ष की मजबूत घेराबंदी के चलते विकास संबंधी मामलों में निर्णय लेने के लिए मजबूत इच्छाशक्ति दिखानी होगी।
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