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सोशल मीडिया पर भी बढ़ी चुनावी तपिश
Mon, 01 Apr 2019 11:45 PM IST
राकेश पांडेय
kushinagar/राकेश कुमार गौंड़
kushinagar/राकेश कुमार गौंड़
Published by: राकेश पांडेय
Updated Mon, 01 Apr 2019 11:45 PM IST
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- फोटो : फाइल, अमर उजाला
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पडरौना (कुशीनगर)। बदलते दौर में चुनाव प्रचार का तरीका भी हाईटेक होता जा रहा है। लोकसभा चुनाव की घोषणा होते ही प्रत्याशी, उनके समर्थक और राजनीतिक दल फेसबुक, ट्वीटर और व्हाट्सएप आदि पर सक्रिय हो गए हैं। राष्ट्रीय स्तर के एक राजनीतिक दल के प्रदेश कार्यालय से वोटरों को लुभाने के लिए फोन और मैसेज भी आने लगे हैं।
कम समय में अधिक लोगों तक पहुंच की गरज से राजनीतिक दल, उम्मीदवार और उनके समर्थक सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं। हर नेता स्मार्ट फोन से सोशल मीडिया से जुड़कर दिन भर जनता के बीच रहना पसंद कर रहा है। फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्वीटर, इंस्टाग्राम प्रचार सामग्री से पटे पड़े रह रहे हैं। उम्मीदवार, समर्थक और दल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अपनी बात रखने और विपक्षियों के आरोपों का जवाब देने में भी कर रहे हैं। एक राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक दल की ओर से तो देशहित में अपने पार्टी नेता के प्रचार में लोगों के मोबाइल पर मैसेज और फोन करने के साथ ही फेसबुक व ट्वीटर पर जवाब भी मांगा जा रहा है। डीएम अनिल कुमार सिंह ने बताया कि यदि कोई प्रत्याशी, समर्थक या पार्टी विज्ञापन के तौर पर सोशल मीडिया पर प्रचार प्रसार करती है तो इसे पेड न्यूज की श्रेणी में माना जाएगा। इसे प्रत्याशी के चुनाव खर्च में जोड़ा जाएगा।
चुनावी खर्च में भी आई है कमी
सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार करना काफी सस्ता है। इसमें नाम मात्र का ही खर्च आता है। अपने चुनावी प्रचार के पोस्टर का डिजिटल फॉर्मेट तैयार करवाकर बस उसे फेसबुक और व्हाट्सएप पर पोस्ट किया जा रहा है। उम्मीदवार पोस्टर को पोस्ट करके लोगों को टैग कर रहे हैं तो कभी व्हाट्सएप पर अपने चुनावी पोस्टर भेजकर हक में समर्थन की अपील कर रहे हैं।
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ऑडियो, वीडियो और लिखित मैसेज तक भेजने की सुविधा
कम समय में अपनी बात अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया ऐसे लोगों के लिए कारगर साबित हो रहा है। अपनी बातें ऑडियो, वीडियो और टेक्स्ट मैसेज के जरिए राजनीतिक दल, उम्मीदवार और उनके समर्थक लोगों के मोबाइल पर आसानी से भेज दे रहे हैं।
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कम समय में अधिक लोगों तक पहुंच की गरज से राजनीतिक दल, उम्मीदवार और उनके समर्थक सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं। हर नेता स्मार्ट फोन से सोशल मीडिया से जुड़कर दिन भर जनता के बीच रहना पसंद कर रहा है। फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्वीटर, इंस्टाग्राम प्रचार सामग्री से पटे पड़े रह रहे हैं। उम्मीदवार, समर्थक और दल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अपनी बात रखने और विपक्षियों के आरोपों का जवाब देने में भी कर रहे हैं। एक राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक दल की ओर से तो देशहित में अपने पार्टी नेता के प्रचार में लोगों के मोबाइल पर मैसेज और फोन करने के साथ ही फेसबुक व ट्वीटर पर जवाब भी मांगा जा रहा है। डीएम अनिल कुमार सिंह ने बताया कि यदि कोई प्रत्याशी, समर्थक या पार्टी विज्ञापन के तौर पर सोशल मीडिया पर प्रचार प्रसार करती है तो इसे पेड न्यूज की श्रेणी में माना जाएगा। इसे प्रत्याशी के चुनाव खर्च में जोड़ा जाएगा।
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चुनावी खर्च में भी आई है कमी
सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार करना काफी सस्ता है। इसमें नाम मात्र का ही खर्च आता है। अपने चुनावी प्रचार के पोस्टर का डिजिटल फॉर्मेट तैयार करवाकर बस उसे फेसबुक और व्हाट्सएप पर पोस्ट किया जा रहा है। उम्मीदवार पोस्टर को पोस्ट करके लोगों को टैग कर रहे हैं तो कभी व्हाट्सएप पर अपने चुनावी पोस्टर भेजकर हक में समर्थन की अपील कर रहे हैं।
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ऑडियो, वीडियो और लिखित मैसेज तक भेजने की सुविधा
कम समय में अपनी बात अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया ऐसे लोगों के लिए कारगर साबित हो रहा है। अपनी बातें ऑडियो, वीडियो और टेक्स्ट मैसेज के जरिए राजनीतिक दल, उम्मीदवार और उनके समर्थक लोगों के मोबाइल पर आसानी से भेज दे रहे हैं।