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करुरी रेलवे क्रासिंग को बंद कर देने से राहगीरों को दिक्कतें
Updated Wed, 11 Oct 2017 05:35 PM IST
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कप्तानगंज (कुशीनगर)। गोरखपुर-नरकटियागंज रेलमार्ग के मानवरहित कई रेलवे क्रासिंग को रेल प्रशासन ने सुरक्षा का हवाला देकर बंद कर दिया, लेकिन उनकी उपयोगिता पर ध्यान नहीं दिया। जो मानवरहित समपार फाटक लोगों के लिए गैर जरूरी थे, उन्हें बंद नहीं किया और जो आवागमन के लिहाज से महत्वपूर्ण थे, उन्हें बंद कर दिया है। इससे लोगों को काफी असुविधा हो रही है।
कप्तानगंज क्षेत्र में पड़ने वाले मानवरहित रेलवे क्रासिंग मुजहना पश्चिम, मुजहना पूर्वी और बरडीहा में से मुजहना पश्चिम तथा बरडीहा क्रासिंग को दुर्घटना बाहुल्य बताते हुए रेल प्रशासन ने आठ अक्टूबर को बंद कर दिया था। वहीं कुछ माह पूर्व हसनगंज, खूटा मैदान, नरहरछपरा, चकिया, घोघरा, महुआखुर्द स्थ्ित मानवरहित रेलवे क्रासिंग पर दुर्घटनाएं रोकने के लिए एक कंपनी के माध्यम से छह हजार रुपये प्रति माह के मानदेय पर नियुक्त किए गए गेट मित्रों को झंडी और सिटी के साथ तैनात कर दिया है। इनके जिम्मे राहगीरों को सतर्क करने तथा ट्रेनों के आते-जाते समय फाटक पर खड़े होकर झंडी दिखाने का काम है। इन्हें ड्यूटी खुले आसमान के नीचे करनी पड़ रही है।
मुजहना पश्चिम रेलवे क्रासिंग और बरडीहा रेलवे क्रासिंग को बंद करने पर इस इलाके के संजय तिवारी, रामनगीना गुप्ता, अशोक पांडेय, वीरेंद्र सिंह, चंद्रशेखर सिंह, मुन्ना, बलराम पांडेय, जितेंद्र मिश्रा, हरिकेश पांडेय, रामदुलारे, सिंहासन सहित कई लोगों ने चिंता जताई। इनका कहना था कि बरडीहा रेलवे क्रासिंग बलुआ, बेलवा, अगया, विशुनपुरा, बरडीहा, जगदीशपुर, महुआ कुसुम्मा, मोतीपाकड़, टीकर सहित कई गांवों के लोगों के लिए एकमात्र प्रमुख मार्ग था, जिसकी क्रासिंग रेल प्रशासन ने बंद कर दी। जबकि बगल के एक महत्वहीन रेलवे क्रासिंग को छोड़ दिया।
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कप्तानगंज क्षेत्र में पड़ने वाले मानवरहित रेलवे क्रासिंग मुजहना पश्चिम, मुजहना पूर्वी और बरडीहा में से मुजहना पश्चिम तथा बरडीहा क्रासिंग को दुर्घटना बाहुल्य बताते हुए रेल प्रशासन ने आठ अक्टूबर को बंद कर दिया था। वहीं कुछ माह पूर्व हसनगंज, खूटा मैदान, नरहरछपरा, चकिया, घोघरा, महुआखुर्द स्थ्ित मानवरहित रेलवे क्रासिंग पर दुर्घटनाएं रोकने के लिए एक कंपनी के माध्यम से छह हजार रुपये प्रति माह के मानदेय पर नियुक्त किए गए गेट मित्रों को झंडी और सिटी के साथ तैनात कर दिया है। इनके जिम्मे राहगीरों को सतर्क करने तथा ट्रेनों के आते-जाते समय फाटक पर खड़े होकर झंडी दिखाने का काम है। इन्हें ड्यूटी खुले आसमान के नीचे करनी पड़ रही है।
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मुजहना पश्चिम रेलवे क्रासिंग और बरडीहा रेलवे क्रासिंग को बंद करने पर इस इलाके के संजय तिवारी, रामनगीना गुप्ता, अशोक पांडेय, वीरेंद्र सिंह, चंद्रशेखर सिंह, मुन्ना, बलराम पांडेय, जितेंद्र मिश्रा, हरिकेश पांडेय, रामदुलारे, सिंहासन सहित कई लोगों ने चिंता जताई। इनका कहना था कि बरडीहा रेलवे क्रासिंग बलुआ, बेलवा, अगया, विशुनपुरा, बरडीहा, जगदीशपुर, महुआ कुसुम्मा, मोतीपाकड़, टीकर सहित कई गांवों के लोगों के लिए एकमात्र प्रमुख मार्ग था, जिसकी क्रासिंग रेल प्रशासन ने बंद कर दी। जबकि बगल के एक महत्वहीन रेलवे क्रासिंग को छोड़ दिया।
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