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Kushinagar News: 105 से घटकर 26 हुई थीं दुग्ध समितियां, अब पूरी तरह हो गईं बंद
Fri, 23 Jun 2023 04:21 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर।
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर।
Updated Fri, 23 Jun 2023 04:21 PM IST
सार
भारत सरकार ने दूध की गुणवत्ता को लेकर एक मानक तय किया है। इसके अनुसार वर्तमान में समितियों से संग्रहीत दूध में वह मानक उपलब्ध नहीं है। मानक के अनुसार दूध का एसएनएफ (साॅलिड नाट फैट) 8.30 प्रतिशत होना तय है, लेकिन समितियों से संग्रहीत दूध का साॅलिड नाट फैट 7.80 प्रतिशत ही पाया जा रहा है।
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बृहस्पतिवार को दुग्ध अवशीतन केंद्र कसया में लगा ताला।संवाद
विस्तार
कुशीनगर जिले में वर्ष 2005 से संचालित दुग्ध उत्पादन समितियाें की स्थिति दिन-प्रतिदिन बदतर होती गई। 105 से घटकर इनकी संख्या 26 पर आई थी और ब़ृहस्पतिवार से रही-सही समितियों पर ताला भी बंद हो गया।
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जबकि इन समितियों पर कार्य करने वाले कर्मचारियों का 17 माह का वेतन करीब छह लाख रुपये, आठ महीने के 50 हजार लीटर दूध का करीब 30 लाख रुपये, ट्रांसपोर्ट खर्च करीब छह लाख और मकान का किराया लगभग डेढ लाख रुपये बकाया है। इसमें कार्य करने वाले कर्मचारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है।
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जिले में दुग्ध अवशीतन केंद्र कसया की स्थापना वर्ष 2005 में हुई थी। उस समय इस केंद्र से 105 समितियां पंजीकृत थीं। कुछ समय बाद काम न करने वाली समितियों का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया। वर्तमान में 62 दुग्ध समितियां पंजीकृत हैं। इनमें सिर्फ 26 ही सक्रिय हैं, लेकिन अब इन पर भी ताला बंद कर दिया गया है।
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इन समितियों के माध्यम से प्रतिदिन 250 लीटर दूध पराग डेयरी गोरखपुर मंगाती थी। बुधवार तक 250 लीटर दूध समितियों से लिया गया, लेकिन बृहस्पतिवार को अवशीतन केंद्र पर ताला बंद हो गया। बीते बुधवार को 250 लीटर दूध समितियों से लिया गया, लेकिन बृहस्पतिवार को अवशीतन केंद्र पर ताला लग गया। केंद्र के प्रभारी व कर्मचारी बगल के मकान में बैठे थे।
बता दें कि अवशीतन केंद्र से दूध पराग डेयरी गोरखपुर को आपूर्ति की जाती रही है, जहां दूध संबंधी उत्पाद तैयार कर विपणन होता है। केंद्र प्रभारी प्रमोद कुमार त्रिपाठी ने बताया कि समितियों से दूध नहीं लिया जा रहा है। केंद्र बंद कर दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र के कर्मचारियों का 17 माह का वेतन करीब छह लाख रुपये, आठ महीने के 50 हजार लीटर दूध का करीब 30 लाख रुपये, ट्रांसपोर्ट खर्च करीब छह लाख और मकान का किराया लगभग डेढ़ लाख रुपये बाकी है। वर्तमान में प्रभारी के अलावा डेयरी मैन प्रदीप कुमार और विजयधर द्विवेदी कार्यरत हैं।
यह है वजह
भारत सरकार ने दूध की गुणवत्ता को लेकर एक मानक तय किया है। इसके अनुसार वर्तमान में समितियों से संग्रहीत दूध में वह मानक उपलब्ध नहीं है। मानक के अनुसार दूध का एसएनएफ (साॅलिड नाट फैट) 8.30 प्रतिशत होना तय है, लेकिन समितियों से संग्रहीत दूध का साॅलिड नाट फैट 7.80 प्रतिशत ही पाया जा रहा है।
इसके चलते पराग डेयरी गोरखपुर केंद्र से समितियों का दूध अस्वीकृत कर दिया जा रहा है। साॅलिड नाट फैट के तहत दूध में कैल्शियम, मैग्नीज, कार्बोहाइड्रेट के अलावा वसा होती है। हालांकि, दूध में 85 प्रतिशत पानी होता है। कंपनी साॅलिड नाट फैट का ही पैसा देती है।
प्रभारी प्रमोद कुमार त्रिपाठी ने बताया कि मानक के अनुसार समितियाें से दूध की आपूर्ति करने पर अवशीतन केंद्र का संचालन फिर आरंभ किया जाएगा। अभी बंद है। जल्द ही समाधान होगा।
दुग्ध समिति सचिव बोले
पूर्व में 30-35 लीटर दूध अवशीतन केंद्र कसया को आपूर्ति करते रहे। बीते सितंबर महीने से 5-10 लीटर दूध ही दे रहे थे। अवशीतन केंद्र पर दूध का एसएनएफ कम बताकर 20-22 रुपये लीटर ही दूध का दाम दिया जा रहा था। पूर्व में 11 गायें दूध उत्पादन के लिए पालन किया था। अब सिर्फ चार गायें ही पाले हैं। वर्तमान में 20 लीटर दूध का उत्पादन कर रहे हैं। बकाया करीब 22 हजार रुपये होगा। -सतीश सिंह, होरलापुर, दुग्ध समिति सचिव।
सात महीने के दूध की बिक्री की एक लाख रुपये की रकम नहीं मिली है। वर्तमान में 40-50 लीटर दूध का उत्पादन करते हैं, लेकिन पराग डेयरी के भुगतान नहीं करने से अब सिर्फ 10 लीटर ही आपूर्ति हो रही थी। जल्द अवशीतन केंद्र के चलने की उम्मीद है। -नथुनी कुशवाहा, दुग्ध समिति सचिव, चौबिया पटखौली, दुदही
कसया दुग्ध अवशीतन केंद्र बंद होने से परेशानी बढ़ी है। वर्तमान में नौ गायों का पालन किए हैं। इससे करीब 40-50 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है, लेकिन छह महीने से केंद्र को भेजे गए दूध की 50 हजार रुपये की रकम नहीं मिली है। कोई बेहतर विकल्प भी नहीं है। -घनश्याम पांडेय, धौरहरा, फाजिलनगर, सचिव दुग्ध समिति
फरवरी महीने से कसया दुग्ध अवशीतन केंद्र को दूध की आपूर्ति बंद कर दी है। इसकी वजह समय से मूल्य का भुगतान न करना है। पहले कामकाज ठीक था। 10-15 लीटर दूध की आपूर्ति करते रहे हैं। वर्तमान में 15 गायों के करीब 40-50 लीटर दूध की गांव में बिक्री हो जा रही है। -घनश्याम कुशवाहा, विशुनपुरा, दुग्ध समिति सचिव
इसके चलते पराग डेयरी गोरखपुर केंद्र से समितियों का दूध अस्वीकृत कर दिया जा रहा है। साॅलिड नाट फैट के तहत दूध में कैल्शियम, मैग्नीज, कार्बोहाइड्रेट के अलावा वसा होती है। हालांकि, दूध में 85 प्रतिशत पानी होता है। कंपनी साॅलिड नाट फैट का ही पैसा देती है।
प्रभारी प्रमोद कुमार त्रिपाठी ने बताया कि मानक के अनुसार समितियाें से दूध की आपूर्ति करने पर अवशीतन केंद्र का संचालन फिर आरंभ किया जाएगा। अभी बंद है। जल्द ही समाधान होगा।
दुग्ध समिति सचिव बोले
पूर्व में 30-35 लीटर दूध अवशीतन केंद्र कसया को आपूर्ति करते रहे। बीते सितंबर महीने से 5-10 लीटर दूध ही दे रहे थे। अवशीतन केंद्र पर दूध का एसएनएफ कम बताकर 20-22 रुपये लीटर ही दूध का दाम दिया जा रहा था। पूर्व में 11 गायें दूध उत्पादन के लिए पालन किया था। अब सिर्फ चार गायें ही पाले हैं। वर्तमान में 20 लीटर दूध का उत्पादन कर रहे हैं। बकाया करीब 22 हजार रुपये होगा। -सतीश सिंह, होरलापुर, दुग्ध समिति सचिव।
सात महीने के दूध की बिक्री की एक लाख रुपये की रकम नहीं मिली है। वर्तमान में 40-50 लीटर दूध का उत्पादन करते हैं, लेकिन पराग डेयरी के भुगतान नहीं करने से अब सिर्फ 10 लीटर ही आपूर्ति हो रही थी। जल्द अवशीतन केंद्र के चलने की उम्मीद है। -नथुनी कुशवाहा, दुग्ध समिति सचिव, चौबिया पटखौली, दुदही
कसया दुग्ध अवशीतन केंद्र बंद होने से परेशानी बढ़ी है। वर्तमान में नौ गायों का पालन किए हैं। इससे करीब 40-50 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है, लेकिन छह महीने से केंद्र को भेजे गए दूध की 50 हजार रुपये की रकम नहीं मिली है। कोई बेहतर विकल्प भी नहीं है। -घनश्याम पांडेय, धौरहरा, फाजिलनगर, सचिव दुग्ध समिति
फरवरी महीने से कसया दुग्ध अवशीतन केंद्र को दूध की आपूर्ति बंद कर दी है। इसकी वजह समय से मूल्य का भुगतान न करना है। पहले कामकाज ठीक था। 10-15 लीटर दूध की आपूर्ति करते रहे हैं। वर्तमान में 15 गायों के करीब 40-50 लीटर दूध की गांव में बिक्री हो जा रही है। -घनश्याम कुशवाहा, विशुनपुरा, दुग्ध समिति सचिव