{"_id":"5b7708fd42c792463110178b","slug":"41534527741-kushinagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"छात्रसंघ चुनाव को लेकर रणनीति बनाने में जुटे छात्रनेता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छात्रसंघ चुनाव को लेकर रणनीति बनाने में जुटे छात्रनेता
ब्यूरो/अमर उजाला कुश्ाीनगर
Updated Fri, 17 Aug 2018 11:25 PM IST
विज्ञापन
पडरौना नगर के यूएनपीजी काॅलेज के बाहर छात्रसंघ चुनाव पर चर्चा करते छात्र।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पडरौना। छात्रसंघ चुनाव को लेकर ऊहापोह में रहे छात्र नेताओं के लिए अच्छी खबर है। इस बार उनका परिश्रम व्यर्थ नहीं जाने वाला है। विश्वविद्यालय के कुलपति ने छात्रसंघ चुनाव कराए जाने को लेकर सकारात्मक संदेश दिया है, जिससे छात्र नेताओं में उत्साह की लहर दौड़ गई है। बृहस्पतिवार की शाम से ही छात्रनेता सोशल मीडिया पर एक-दूसरे को बधाई देने में लगे हैं। शुक्रवार सुबह शहर के चाय की दुकानों पर छात्रनेता अपने समर्थकों के साथ तैयारियों को लेकर चर्चा करते नजर आए। साथ ही कॉलेज बंद होने के बाद भी मुख्य द्वार पर खड़े होकर आपस में बातचीत कर रहे थे।
वर्ष 2007 में तत्कालीन बसपा सरकार ने छात्रसंघ चुनाव पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके बाद 2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर एक बार फिर छात्रसंघ चुनाव कराने का निर्णय लिया गया। वर्ष 2012 में भी छात्रसंघ चुनाव कराया गया। इसके बाद फिर चार वर्षो तक जिले के कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव पर ग्रहण सा लग गया। वर्ष 2016 में छात्रसंघ को बहाल कर दिया गया और विश्वविद्यालय समेत जिले के सभी कॉलेजों में चुनाव हुआ। बीते वर्ष 2017 में छात्रसंघ चुनाव न होने से छात्रनेताओं में मायूसी छा गई थी। इस नए सत्र में भी छात्रनेता चुनाव को लेकर ऊहापोह की स्थिति में थे। इधर, विश्वविद्यालय में छात्रनेताओं ने चुनाव को लेकर अनशन भी शुरू कर दिया था। एबीवीपी, एनएसयूआई और समाजवादी छात्रसभा की ओर चुनाव कराने की मांग शुरू कर दी गई थी। बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय में अनशन कर रहे छात्रनेताओं को मनाने गए कुलपति ने उन्हें चुनाव कराए जाने का आश्वासन दिया। उसके बाद यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेजों के छात्रनेताओं में भी खुशी की लहर दौड़ पड़ी। जिले के बुद्ध पीजी कॉलेज कुशीनगर, किसान पीजी कॉलेज सेवरही, एसबीएम पीजी कालेज फाजिलनगर और यूएनपीजी कालेज पडरौना के छात्रनेता चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं।
छात्रनेता राजन सोनी का कहना है कि छात्रसंघ राजनीति की पहली सीढ़ी है। विश्वविद्यालय के कुलपति ने आश्वासन देकर छात्रनेताओं की भावनाओं का ख्याल रखा है। छात्रनेता विजय शाह का कहना है कि पिछले वर्ष चुनाव न होने से इस बार भी असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। कुलपति के आश्वासन से यह स्पष्ट हो गया कि विश्वविद्यालय और कॉलेजों में इस बार चुनाव होंगे।
विज्ञापन
यूएनपीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अयोध्यानाथ त्रिपाठी ने बताया कि विश्वविद्यालय में चुनाव की तिथि घोषित होते ही यहां भी बैठक कर तिथि की घोषणा कर दी जाएगी। चुनाव अधिकारी का चयन और अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए कॉलेज प्रशासन तैयार है।
विज्ञापन
वर्ष 2007 में तत्कालीन बसपा सरकार ने छात्रसंघ चुनाव पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके बाद 2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर एक बार फिर छात्रसंघ चुनाव कराने का निर्णय लिया गया। वर्ष 2012 में भी छात्रसंघ चुनाव कराया गया। इसके बाद फिर चार वर्षो तक जिले के कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव पर ग्रहण सा लग गया। वर्ष 2016 में छात्रसंघ को बहाल कर दिया गया और विश्वविद्यालय समेत जिले के सभी कॉलेजों में चुनाव हुआ। बीते वर्ष 2017 में छात्रसंघ चुनाव न होने से छात्रनेताओं में मायूसी छा गई थी। इस नए सत्र में भी छात्रनेता चुनाव को लेकर ऊहापोह की स्थिति में थे। इधर, विश्वविद्यालय में छात्रनेताओं ने चुनाव को लेकर अनशन भी शुरू कर दिया था। एबीवीपी, एनएसयूआई और समाजवादी छात्रसभा की ओर चुनाव कराने की मांग शुरू कर दी गई थी। बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय में अनशन कर रहे छात्रनेताओं को मनाने गए कुलपति ने उन्हें चुनाव कराए जाने का आश्वासन दिया। उसके बाद यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेजों के छात्रनेताओं में भी खुशी की लहर दौड़ पड़ी। जिले के बुद्ध पीजी कॉलेज कुशीनगर, किसान पीजी कॉलेज सेवरही, एसबीएम पीजी कालेज फाजिलनगर और यूएनपीजी कालेज पडरौना के छात्रनेता चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं।
विज्ञापन
छात्रनेता राजन सोनी का कहना है कि छात्रसंघ राजनीति की पहली सीढ़ी है। विश्वविद्यालय के कुलपति ने आश्वासन देकर छात्रनेताओं की भावनाओं का ख्याल रखा है। छात्रनेता विजय शाह का कहना है कि पिछले वर्ष चुनाव न होने से इस बार भी असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। कुलपति के आश्वासन से यह स्पष्ट हो गया कि विश्वविद्यालय और कॉलेजों में इस बार चुनाव होंगे।
विज्ञापन
यूएनपीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अयोध्यानाथ त्रिपाठी ने बताया कि विश्वविद्यालय में चुनाव की तिथि घोषित होते ही यहां भी बैठक कर तिथि की घोषणा कर दी जाएगी। चुनाव अधिकारी का चयन और अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए कॉलेज प्रशासन तैयार है।