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अगले दो महीने में लगेंगे सबसे अधिक सात फेरे
राकेश कुमार गौंड़, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Thu, 19 Jan 2017 01:58 AM IST
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मैरिज
- फोटो : getty images
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हिंदी पंचांग के हिसाब से मार्च तक यह वर्ष समाप्त हो जाएगा, लेकिन गुजरते साल के अंतिम दो महीने में दूल्हा-दुल्हन सबसे अधिक फेरे लेंगे। वजह यह है कि इस वर्ष का सबसे अधिक लग्न और शादी का उत्तम मुहूर्त 17 जनवरी से शुरू हुआ है, जो 15 मार्च तक रहेगा। ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक इस अवधि में गज केसरी योग बन रहा है। इस मुहूर्त में विवाह उत्तम माना गया है।
हिंदू पंचाग के अनुसार नव संवत्सर 2073 की शुरुआत चैत्र शुक्ल पक्ष की आठ अप्रैल से हुई थी। अप्रैल में 13 लग्न थे, मई और जून कोई में कोई लग्न नहीं था। जुलाई में आठ तारीख को लग्न था। उसके बाद हरिशयनी एकादशी के कारण लग्न समाप्त हो गया। फिर नवंबर और दिसंबर में आठ-आठ लग्न की तिथियां थीं, लेकिन जनवरी से मार्च तक लग्न तिथियों की भरमार है। 17 जनवरी से ही लग्न का मुहूर्त शुरू हो गया है, जो 18, 20 से 24 जनवरी, 31 जनवरी, एक फरवरी को बसंत पंचमी के दिन, 2, 5, 6, 7, 11 से 23 फरवरी, 28 फरवरी, 01 मार्च, 04, 05, 06, 08, 11, 12, 13 और 14 मार्च को लग्न मुहूर्त है।
ज्योतिष के जानकारों का कहना है कि इन दो महीने की समयावधि में गज केशरी योग भी बन रहा है, जो वर-वधुओं को लिए काफी फलदायी होगा। इस तरह का योग पांच वर्ष बाद बन रहा है। जहां तक 29 मार्च से प्रारंभ हो रहे नव संवत्सर 2074 से लग्न की बात की जाए तो अप्रैल में 10, मई में 18, जून में 20, जुलाई में 03, नवंबर में 09 और दिसंबर में 10 मुहुर्त बन रहे हैं।
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खरमास के बाद इस वर्ष लग्न की शुरुआत 17 जनवरी से हुई है। इस साल के शुरुआती दो महीनों में लग्न के शुुभ मुहूर्त की भरमार है। 15 मार्च तक कुल 36 लग्न हैं, जिन तिथियों में मांगलिक कार्य संपादित किए जा सकते हैं। गज केशरी योग बनने के साथ ही इन मुहुर्त में होने वाली शादियां वर-वधू के लिए कल्याणकारी होंगी।
- डॉ. महेंद्र पांडेय, सहायक प्रवक्ता, ज्योतिष, बीएचयू
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हिंदू पंचाग के अनुसार नव संवत्सर 2073 की शुरुआत चैत्र शुक्ल पक्ष की आठ अप्रैल से हुई थी। अप्रैल में 13 लग्न थे, मई और जून कोई में कोई लग्न नहीं था। जुलाई में आठ तारीख को लग्न था। उसके बाद हरिशयनी एकादशी के कारण लग्न समाप्त हो गया। फिर नवंबर और दिसंबर में आठ-आठ लग्न की तिथियां थीं, लेकिन जनवरी से मार्च तक लग्न तिथियों की भरमार है। 17 जनवरी से ही लग्न का मुहूर्त शुरू हो गया है, जो 18, 20 से 24 जनवरी, 31 जनवरी, एक फरवरी को बसंत पंचमी के दिन, 2, 5, 6, 7, 11 से 23 फरवरी, 28 फरवरी, 01 मार्च, 04, 05, 06, 08, 11, 12, 13 और 14 मार्च को लग्न मुहूर्त है।
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ज्योतिष के जानकारों का कहना है कि इन दो महीने की समयावधि में गज केशरी योग भी बन रहा है, जो वर-वधुओं को लिए काफी फलदायी होगा। इस तरह का योग पांच वर्ष बाद बन रहा है। जहां तक 29 मार्च से प्रारंभ हो रहे नव संवत्सर 2074 से लग्न की बात की जाए तो अप्रैल में 10, मई में 18, जून में 20, जुलाई में 03, नवंबर में 09 और दिसंबर में 10 मुहुर्त बन रहे हैं।
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खरमास के बाद इस वर्ष लग्न की शुरुआत 17 जनवरी से हुई है। इस साल के शुरुआती दो महीनों में लग्न के शुुभ मुहूर्त की भरमार है। 15 मार्च तक कुल 36 लग्न हैं, जिन तिथियों में मांगलिक कार्य संपादित किए जा सकते हैं। गज केशरी योग बनने के साथ ही इन मुहुर्त में होने वाली शादियां वर-वधू के लिए कल्याणकारी होंगी।
- डॉ. महेंद्र पांडेय, सहायक प्रवक्ता, ज्योतिष, बीएचयू