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शौचालय नहीं होने पर ओडीएफ घोषित गांव की बहू ने छोड़ी ससुराल
kushinagar
Updated Fri, 20 Jul 2018 11:28 PM IST
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अमर उजाला
- फोटो : अमर उजाला
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जटहां बाजार (कुशीनगर)। घर में शौचालय नहीं होने से नाराज ओडीएफ घोषित एक गांव की बहू पिछले छह महीने से ससुराल छोड़कर मायके में रह रही है। उसका कहना है कि ससुराल में जब तक शौचालय का निर्माण नहीं हो जाता वह वापस नहीं लौटेंगी। उसके ससुर ने शुक्रवार को एक बार फिर बीडीओ को ज्ञापन सौंपकर शौचालय बनवाने की मांग की। उनका आरोप है कि वह पिछले एक साल से प्रधान, सचिव और बीडीओ कार्याचल का चक्कर लगाकर थक चुके हैं, लेकिन कोई उनकी बात नहीं सुन रहा।
मामला विशुनपुरा ब्लॉक मुख्यालय के खेसिया गांव का है। एक साल पूर्व बेबी की शादी इस गांव के निवासी वशिष्ठ शर्मा के बेटे रमन के साथ हुई थी। शादी के बाद बेबी जब ससुराल पहुंची तो घर में शौचालय नहीं होने से उसे काफी दुख हुआ। उसने पति और ससुराल वालों पर शौचालय निर्माण कराने को कहा, लेकिन उसकी मांग पूरी नहीं हुई। छह माह इंतजार करने के बाद बेबी ने ससुराल छोड़ने का फैसला कर लिया। तब से वह मायके में रह रही है।
बेबी ससुर वश्ष्ठि शर्मा शुक्रवार को एक बार फिर बीडीओ कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपकर शौचालय निर्माण की मांग की। उनका कहना है कि वह गरीबी की वजह से शौचालय नहीं बनवा पाए और इस वजह से बहू ससुराल छोड़कर मायके में बैठी हुई है। वशिष्ठ का आरोप है कि पिछले एक वर्ष से वह प्रधान, सचिव और बीडीओ कार्यालय का चक्कर काटकर थक गए हैं, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। वह बीडीओ को पहले भी प्रार्थना पत्र दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि गांव की राजनीति के कारण उनका शौचालय नहीं बन सका है।
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विशुनपुरा ब्लॉक का खेसिया गांव ओडीएफ घोषित हो चुका है। गांव में कुल 971 परिवार हैं। पंचायतीराज विभाग के मुताबिक गांव में 905 शौचालयों का निर्माण कराया जा चुका है। गांव में करीब 93 फीसदी घरों में शौचालय का निर्माण हो चुका है। ऐसे में इस गांव को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है।
तीन वर्ष पूर्व भी इस गांव के खाखर टोला की पांच बहुएं शौचालय न होने के कारण ससुराल छोड़कर मायके चली गई थीं। मामला प्रकाश में आने के बाद आनन-फानन में सभी के घर मे शौचालय का निर्माण करवाया था।
बीडीओ अंबरीष सिंह का कहना है कि प्रार्थना पत्र मिला है। संबंधित सचिव और प्रधान को शौचालय निर्माण के लिए निर्देश दिया गया है। वहीं ग्राम प्रधान पति जमालुद्दीन अंसारी ने कहा कि कागज में उनका गांव ओडीएफ़ कर दिया गया है, जिसके कारण शौचालय निर्माण के लिए धन नहीं आ रहा है। उन्होंने बताया कि जैसे ही धन आएगा शौचालय का निर्माण करा दिया जाएगा।
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मामला विशुनपुरा ब्लॉक मुख्यालय के खेसिया गांव का है। एक साल पूर्व बेबी की शादी इस गांव के निवासी वशिष्ठ शर्मा के बेटे रमन के साथ हुई थी। शादी के बाद बेबी जब ससुराल पहुंची तो घर में शौचालय नहीं होने से उसे काफी दुख हुआ। उसने पति और ससुराल वालों पर शौचालय निर्माण कराने को कहा, लेकिन उसकी मांग पूरी नहीं हुई। छह माह इंतजार करने के बाद बेबी ने ससुराल छोड़ने का फैसला कर लिया। तब से वह मायके में रह रही है।
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बेबी ससुर वश्ष्ठि शर्मा शुक्रवार को एक बार फिर बीडीओ कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपकर शौचालय निर्माण की मांग की। उनका कहना है कि वह गरीबी की वजह से शौचालय नहीं बनवा पाए और इस वजह से बहू ससुराल छोड़कर मायके में बैठी हुई है। वशिष्ठ का आरोप है कि पिछले एक वर्ष से वह प्रधान, सचिव और बीडीओ कार्यालय का चक्कर काटकर थक गए हैं, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। वह बीडीओ को पहले भी प्रार्थना पत्र दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि गांव की राजनीति के कारण उनका शौचालय नहीं बन सका है।
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विशुनपुरा ब्लॉक का खेसिया गांव ओडीएफ घोषित हो चुका है। गांव में कुल 971 परिवार हैं। पंचायतीराज विभाग के मुताबिक गांव में 905 शौचालयों का निर्माण कराया जा चुका है। गांव में करीब 93 फीसदी घरों में शौचालय का निर्माण हो चुका है। ऐसे में इस गांव को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है।
तीन वर्ष पूर्व भी इस गांव के खाखर टोला की पांच बहुएं शौचालय न होने के कारण ससुराल छोड़कर मायके चली गई थीं। मामला प्रकाश में आने के बाद आनन-फानन में सभी के घर मे शौचालय का निर्माण करवाया था।
बीडीओ अंबरीष सिंह का कहना है कि प्रार्थना पत्र मिला है। संबंधित सचिव और प्रधान को शौचालय निर्माण के लिए निर्देश दिया गया है। वहीं ग्राम प्रधान पति जमालुद्दीन अंसारी ने कहा कि कागज में उनका गांव ओडीएफ़ कर दिया गया है, जिसके कारण शौचालय निर्माण के लिए धन नहीं आ रहा है। उन्होंने बताया कि जैसे ही धन आएगा शौचालय का निर्माण करा दिया जाएगा।