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0 से 32 फीसदीबच्चों का ही हो पाया टीकाकरण
Updated Sun, 03 Sep 2017 06:59 PM IST
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कुशीनगर। इंसेफेलाइटिस के लिहाज से कुशीनगर जनपद बेहद संवेदनशील होने के बावजूद विभागीय लापरवाही खुलकर सामने आ रही है। शून्य से एक और एक वर्ष से दो वर्ष तक के बच्चों के टीकाकरण में स्वास्थ्य महकमा लक्ष्य के सापेक्ष 30 से 32 प्रतिशत का ही टीकाकरण कर पाया है। जिले में इंसेफेलाइटिस से मासूमों की मौत का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। उधर, इंसेफेलाइटिस से बचाव के लिए टीकाकरण की खातिर जो वैक्सीन भेजी जा रही है, उसमें भी काफी मात्रा में बच जाने के कारण उसे फेंक दिए जाने की बात कही जा रही है।
जनपद में हर साल इंसेफेलाइटिस से मौत का ग्राफ बढ़ रहा है। वर्ष 2011 में इंसेफेलाइटिस से जनपद में 860 बच्चे पीड़ित हुए थे, जिनमें 142 बच्चों की मौत हो गई थी। वर्ष 2012 में इस बीमारी की चपेट में आने वालों का आंकड़ा बढ़कर 925 पर पहुंच गया, जिनमें 133 बच्चों की जान गई। वर्ष 2013 में 758 लोग इसकी चपेट में आए, जिनमें 157 की जान गई। वर्ष 2014 में 826 लोग इंसेफेलाइटिस से पीड़ित हुए। उनमें मरने वालों की संख्या 145 थी। उसके बाद वर्ष 2015 में 843 को इस बीमारी ने जकड़ा, जिनमें 137 की मौत हो गई। वर्ष 2016 में पूर्व की अपेक्षा अधिक 1066 लोग इंसेफेलाइटिस की चपेट में आए। उनमें मरने वालों की संख्या 198 तक पहुंच गई थी। चालू वर्ष में जनवरी से अब तक जनपद में इंसेफेलाइटिस के 316 केस आ चुके हैं, जिनमें 32 की मौत हो चुकी है। ये आंकड़े बताते हैं कि कुशीनगर जनपद में इंसेफेलाइटिस का ग्राफ कितनी तेजी से बढ़ रहा है। वैसे तो इस बीमारी पर नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य महकमा प्रत्येक टीकाकरण दिवस और अभियान पर टीकाकरण करने का दावा कर रहा है, लेकिन इसके आंकड़े ही टीकाकरण में सुस्ती की हकीकत बयां कर दे रहे हैं। इस वर्ष शून्य से एक वर्ष तक के 103233 बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य था, जिसमें अगस्त तक 31618 बच्चों का ही टीकाकरण हो पाया है। जो लक्ष्य का सिर्फ 30.62 प्रतिशत है। इसी तरह एक से दो वर्ष के 97353 बच्चों के द्वितीय डोज के टीकाकरण के लक्ष्य में से 31.80 प्रतिशत ही विभाग हासिल कर पाया है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि टीकाकरण में एक बड़ी कमी सामने आ रही है। प्रत्येक वैक्सीन में से पांच बच्चों का टीकाकरण करना है, बच्चे कम मिलने पर अवशेष वैक्सीन फेंक दी जा रही है। जबकि यह वैक्सीन बच्चों से लगायत युवा और प्रौढ़ व्यक्तियों तक को भी लगाई जा सकती है। वैक्सीन के नुकसान की बात सीएमओ ने भी स्वीकार की। इस संबंध में सीएमओ डॉ. अखिलेश कुमार का कहना था कि प्रत्येक सप्ताह बुधवार और शनिवार को टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। फिर भी टीकाकरण का लक्ष्य पूरा न हो पाने के कारण सोमवार से विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए रोस्टर तैयार किया जा रहा है। उन्होंने माना कि थोड़े-बहुत वॉयल वेस्ट हो जा रहे हैं। डीएम आंद्रा वामसी ने भी सीएमओ को बुलाकर टीकाकरण में तेजी लाने का निर्देश दिया है।
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जनपद में हर साल इंसेफेलाइटिस से मौत का ग्राफ बढ़ रहा है। वर्ष 2011 में इंसेफेलाइटिस से जनपद में 860 बच्चे पीड़ित हुए थे, जिनमें 142 बच्चों की मौत हो गई थी। वर्ष 2012 में इस बीमारी की चपेट में आने वालों का आंकड़ा बढ़कर 925 पर पहुंच गया, जिनमें 133 बच्चों की जान गई। वर्ष 2013 में 758 लोग इसकी चपेट में आए, जिनमें 157 की जान गई। वर्ष 2014 में 826 लोग इंसेफेलाइटिस से पीड़ित हुए। उनमें मरने वालों की संख्या 145 थी। उसके बाद वर्ष 2015 में 843 को इस बीमारी ने जकड़ा, जिनमें 137 की मौत हो गई। वर्ष 2016 में पूर्व की अपेक्षा अधिक 1066 लोग इंसेफेलाइटिस की चपेट में आए। उनमें मरने वालों की संख्या 198 तक पहुंच गई थी। चालू वर्ष में जनवरी से अब तक जनपद में इंसेफेलाइटिस के 316 केस आ चुके हैं, जिनमें 32 की मौत हो चुकी है। ये आंकड़े बताते हैं कि कुशीनगर जनपद में इंसेफेलाइटिस का ग्राफ कितनी तेजी से बढ़ रहा है। वैसे तो इस बीमारी पर नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य महकमा प्रत्येक टीकाकरण दिवस और अभियान पर टीकाकरण करने का दावा कर रहा है, लेकिन इसके आंकड़े ही टीकाकरण में सुस्ती की हकीकत बयां कर दे रहे हैं। इस वर्ष शून्य से एक वर्ष तक के 103233 बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य था, जिसमें अगस्त तक 31618 बच्चों का ही टीकाकरण हो पाया है। जो लक्ष्य का सिर्फ 30.62 प्रतिशत है। इसी तरह एक से दो वर्ष के 97353 बच्चों के द्वितीय डोज के टीकाकरण के लक्ष्य में से 31.80 प्रतिशत ही विभाग हासिल कर पाया है।
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विभागीय सूत्रों का कहना है कि टीकाकरण में एक बड़ी कमी सामने आ रही है। प्रत्येक वैक्सीन में से पांच बच्चों का टीकाकरण करना है, बच्चे कम मिलने पर अवशेष वैक्सीन फेंक दी जा रही है। जबकि यह वैक्सीन बच्चों से लगायत युवा और प्रौढ़ व्यक्तियों तक को भी लगाई जा सकती है। वैक्सीन के नुकसान की बात सीएमओ ने भी स्वीकार की। इस संबंध में सीएमओ डॉ. अखिलेश कुमार का कहना था कि प्रत्येक सप्ताह बुधवार और शनिवार को टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। फिर भी टीकाकरण का लक्ष्य पूरा न हो पाने के कारण सोमवार से विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए रोस्टर तैयार किया जा रहा है। उन्होंने माना कि थोड़े-बहुत वॉयल वेस्ट हो जा रहे हैं। डीएम आंद्रा वामसी ने भी सीएमओ को बुलाकर टीकाकरण में तेजी लाने का निर्देश दिया है।
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