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डीएम ने छह किलोमीटर तक ड्रेन सफाई का दिया निर्देश
Updated Thu, 27 Jul 2017 06:22 PM IST
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कुशीनगर। बौद्ध कालीन इतिहास से जुड़ी हिरण्यवती नदी को पुनर्जीवित करने का प्रयास फिर से तेज हुआ है। इस बार डीएम ने हिरण्यवती नदी में जलप्रवाह बनाए रखने के लिए नहर से जोड़ने का निर्णय लिया है। बृहस्पतिवार को इसके लिए संभावित स्थलों का जायजा लिया गया। प्रयास सफल रहा तो कुछ ही दिनों में मृतप्राय यह नदी बहती हुई दिखाई देगी। अगर ऐसा हुआ तो कुशीनगर की सुंदरता बढ़ने के साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
कुशीनगर के मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर के पास से होकर बहने वाली हिरण्यवती नदी का वजूद अब मात्र दिखावा भर के लिए है। जल स्रोत बंद होने के कारण साल के आठ महीने तो यह नदी सूखी रहती है। कुशीनगर के पास इसमें शहर के नाले का गंदा पानी गिरता है। केवल बरसात में जब आसपास के खेतों व ड्रेन का पानी बहकर आता है, तभी नदी प्रवाहित दिखती है। हालांकि इस नदी को पुनर्जीवित करने का प्रयास तो कई वर्ष से चल रहा है, लेकिन हर बार केवल कुशीनगर के पास थोड़ी सी घास छिलाई तक ही कार्य होते रहे हैं। करीब पांच वर्ष पहले तत्कालीन डीएम रिग्जियान सैंफिल ने कसाडा के बजट से नदी क्षेत्र को गहरा कराने व बोरिंग से पानी भरने की योजना बनाई थी, लेकिन यह परियोजना मूर्त रूप नहीं ले पाई। इसके बाद डीएम रहे लोकेश एम व शम्भु कुमार ने भी नदी क ोपुनर्जीवित करने का भरसक प्रयास किया, लेकिन सार्थक योजना नहीं होने की वजह से लाखों रुपये केवल सफाई के नाम पर ही खर्च किए गए और कुछ ही महीने बाद नदी फिर झाड़ियों से भर गई।
परंतु इस बार डीएम आंद्रा वामसी ने नदी में बराबर जल प्रवाह बनाए रखने के उपाय पर विचार किया है। इसके लिए महुआडीह के पास से गुजरने वाली खजुरिया नहर से इस नदी को जोड़ने की योजना है। बृहस्पतिवार को डीएम ने सिंचाई समेत कई अन्य विभागों के अफसरों के साथ इसके लिए प्रस्तावित कार्यस्थल का निरीक्षण किया। इस कार्य से जुड़े अफसरों के अनुसार खजुरिया ब्रांच से दो किलोमीटर नहर व करीब आधा किलोमीटर ड्रेन बनाकर नहर के पानी को परासखाड़ स्थित चंवर तक पहुंचाया जाएगा। यहां से छह किलोमीटर दूरी तक ड्रेन बनवाकर इस पानी को हिरण्यवती नदी में गिराया जाएगा। डीएम ने इस पूरे रास्ते का मौका मुआयना किया और कार्य को पूरा कराने के लिए मनरेगा से बजट की व्यवस्था की बात कही। अगर यह प्रयास सफल रहा तो हिरण्यवती नदी में पूरे साल पानी का प्रवाह बना रहेगा। इस मौके पर एसपी यमुना प्रसाद, बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता वीपी सिंह, सिंचाई विभाग के एके मौर्य, उपेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
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कुशीनगर के मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर के पास से होकर बहने वाली हिरण्यवती नदी का वजूद अब मात्र दिखावा भर के लिए है। जल स्रोत बंद होने के कारण साल के आठ महीने तो यह नदी सूखी रहती है। कुशीनगर के पास इसमें शहर के नाले का गंदा पानी गिरता है। केवल बरसात में जब आसपास के खेतों व ड्रेन का पानी बहकर आता है, तभी नदी प्रवाहित दिखती है। हालांकि इस नदी को पुनर्जीवित करने का प्रयास तो कई वर्ष से चल रहा है, लेकिन हर बार केवल कुशीनगर के पास थोड़ी सी घास छिलाई तक ही कार्य होते रहे हैं। करीब पांच वर्ष पहले तत्कालीन डीएम रिग्जियान सैंफिल ने कसाडा के बजट से नदी क्षेत्र को गहरा कराने व बोरिंग से पानी भरने की योजना बनाई थी, लेकिन यह परियोजना मूर्त रूप नहीं ले पाई। इसके बाद डीएम रहे लोकेश एम व शम्भु कुमार ने भी नदी क ोपुनर्जीवित करने का भरसक प्रयास किया, लेकिन सार्थक योजना नहीं होने की वजह से लाखों रुपये केवल सफाई के नाम पर ही खर्च किए गए और कुछ ही महीने बाद नदी फिर झाड़ियों से भर गई।
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परंतु इस बार डीएम आंद्रा वामसी ने नदी में बराबर जल प्रवाह बनाए रखने के उपाय पर विचार किया है। इसके लिए महुआडीह के पास से गुजरने वाली खजुरिया नहर से इस नदी को जोड़ने की योजना है। बृहस्पतिवार को डीएम ने सिंचाई समेत कई अन्य विभागों के अफसरों के साथ इसके लिए प्रस्तावित कार्यस्थल का निरीक्षण किया। इस कार्य से जुड़े अफसरों के अनुसार खजुरिया ब्रांच से दो किलोमीटर नहर व करीब आधा किलोमीटर ड्रेन बनाकर नहर के पानी को परासखाड़ स्थित चंवर तक पहुंचाया जाएगा। यहां से छह किलोमीटर दूरी तक ड्रेन बनवाकर इस पानी को हिरण्यवती नदी में गिराया जाएगा। डीएम ने इस पूरे रास्ते का मौका मुआयना किया और कार्य को पूरा कराने के लिए मनरेगा से बजट की व्यवस्था की बात कही। अगर यह प्रयास सफल रहा तो हिरण्यवती नदी में पूरे साल पानी का प्रवाह बना रहेगा। इस मौके पर एसपी यमुना प्रसाद, बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता वीपी सिंह, सिंचाई विभाग के एके मौर्य, उपेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
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