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पीपीपी मॉडल से चमकेगा शहर, कूड़े से बनेगी बिजली
kushinagar
Updated Wed, 13 Jun 2018 11:31 PM IST
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अमर उजाला
- फोटो : अमर उजाला
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पडरौना। शहर को साफ-सुथरा रखने में सबसे बड़ी बाधा कूड़ा प्रबंधन की है। इसके लिए नगर पालिका प्रशासन ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत कार्ययोजना तैयार किया है। इसके लिए इफ्राग्रीन कारपोरेशन डिविजन ऑफ जेनेसिस एग्रो साइंस एंड कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड से नगर पालिका प्रशासन ने बीते 25 मई को समझौता किया है। संस्था के वर्कर घर-घर जाकर लोगों को कूड़ा प्रबंधन के लिए प्रेरित करेंगे। कूड़ा से बिजली उत्पादन का भी प्रयास किया जाएगा। अगस्त से इस पर काम शुरू हो जाएगा।
आजादी मिलने के बाद ही पडरौना को नगर पालिका का दर्जा मिल गया था। बीते छह दशक में शहर की आबादी व क्षेत्रफल में काफी बदलाव आया है, लेकिन कूड़ा प्रबंधन का उपाय नहीं होने के कारण शहर में गंदगी सबसे बड़ी समस्या बन गई है। सड़क, बिजली, पेयजल व पथ प्रकाश के मामलों में सुधार के बाद भी शहर अन्य स्वच्छ शहरों की रेटिंग में पिछड़ा हुआ है। व्यवस्था ठीक करने के लिए नगर पालिका प्रशासन ने विकल्प तलाशना शुरू कर दिया है। इसके तहत पीपीपी मॉडल की तर्ज पर शहर को चमकाने के लिए मई में एक कंपनी से समझौता भी किया गया है। इस कंपनी के वर्कर और नगर पालिका कर्मचारी एक साथ स्वच्छता के क्षेत्र में कार्य करेंगे। शहरवासियों के लिए ये अच्छी बात होगी कि निजी सफाईकर्मी कूड़ा उठाने के एवज में रुपये नहीं लेंगे लेकिन शहर के बड़े दुकानदार इससे बच नहीं पाएंगे। उन्हें निर्धारित शुल्क अदा करना पडे़गा।
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आजादी मिलने के बाद ही पडरौना को नगर पालिका का दर्जा मिल गया था। बीते छह दशक में शहर की आबादी व क्षेत्रफल में काफी बदलाव आया है, लेकिन कूड़ा प्रबंधन का उपाय नहीं होने के कारण शहर में गंदगी सबसे बड़ी समस्या बन गई है। सड़क, बिजली, पेयजल व पथ प्रकाश के मामलों में सुधार के बाद भी शहर अन्य स्वच्छ शहरों की रेटिंग में पिछड़ा हुआ है। व्यवस्था ठीक करने के लिए नगर पालिका प्रशासन ने विकल्प तलाशना शुरू कर दिया है। इसके तहत पीपीपी मॉडल की तर्ज पर शहर को चमकाने के लिए मई में एक कंपनी से समझौता भी किया गया है। इस कंपनी के वर्कर और नगर पालिका कर्मचारी एक साथ स्वच्छता के क्षेत्र में कार्य करेंगे। शहरवासियों के लिए ये अच्छी बात होगी कि निजी सफाईकर्मी कूड़ा उठाने के एवज में रुपये नहीं लेंगे लेकिन शहर के बड़े दुकानदार इससे बच नहीं पाएंगे। उन्हें निर्धारित शुल्क अदा करना पडे़गा।
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