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जिले का बढा रहे नाम

Tue, 04 Jun 2019 12:00 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 04 Jun 2019 12:00 AM IST
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जिले का बढा रहे नाम
फोटो के साथ
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वियतनाम में योग की अलख जगा रहे अजीत
पहले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर एनसीसी के 2500 कैडेट्स को दिया प्रशिक्षण
नई दिल्ली में 20 मई को मिल चुका है प्रथम योगा लवर्स आइकॉन अवार्ड
हनुमान वर्मा
जौरा बाजार। जिले के जोकवा के रहने वाले अजीत यादव वियतनाम में योग की अलख जगा रहे हैं। महज 30 वर्ष की उम्र में वह देश के कई राज्यों में योग का प्रशिक्षण दे चुके हैं। कुशीनगर के 30 विद्यालयों में भी योग का निशुल्क प्रशिक्षण दिए थे।

जोकवा बाजार में साधारण परिवार में पैदा हुए अजीत यादव पुत्र रामदास यादव की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही विद्यालय में हुई। स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज हरिद्वार से योग विज्ञान में एमए की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। उसके बाद बीपीएड की परीक्षा आरडी मेमोरियल फिजिकल स्कूल भोपाल (मध्य प्रदेश) से उत्तीर्ण होने के बाद अपने गांव आ गए। अजीत ने मोबाइल पर हुई बातचीत में कहा कि गांव में प्रवास के दौरान वह 50 गांवों के लोगों समेत 30 विद्यालयों के विद्यार्थियों को मुफ्त में प्राणायाम व ध्यान के माध्यम से स्वस्थ रहने के लिए जागरूक किए थे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, उत्तराखंड, दिल्ली, राजस्थान, गोवा, हरियाणा और मध्यप्रदेश में योग की शिक्षा वहां जाकर दे चुके हैं। वह बताते हैं कि उन्हें प्रथम योगा लवर्स आइकॉन अवार्ड से 20 मई 2018 को नई दिल्ली से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा राज्य योग प्रतियोगिता में दूसरा स्थान प्राप्त कर चुके हैं। प्रथम अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2015 के अवसर पर लखनऊ में 2500 एनसीसी कैडेटों व सेना के अधिकारियों को योग शिक्षा देने का अवसर इन्हें ही मिला था। वर्ष 2013 से 2016 तक बेसिक शिक्षा विभाग में अनुदेशक स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा के पद पर काम किया है। मार्च 2016 से मार्च 2019 तक एसएलडी क्लीनिक बिजनवारी दार्जिलिंग क्लीन रीसर्च यूनिट सिलीगुड़ी दार्जिलिंग के अधीन केंद्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान संस्थान में काम कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि दार्जिलिंग में योग व ध्यान के क्षेत्र में बेहतर काम करने के कारण वियतनाम के ‘ऊँ योग कैन थ्रो कंपनी’ की ओर से वियतनाम में योग ध्यान के क्षेत्र में काम करने का ऑफर मिला। इस समय वह वियतनाम में भारतीय संस्कृति की विरासत योग की धर्म ध्वजा को लहरा रहे हैं।
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