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यूक्रेन में फंसे 15 मेडिकल के विद्यार्थी घर पहुंचे
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यूक्रेन में फंसे 15 मेडिकल के विद्यार्थी घर पहुंचे
- अब तक जिले के 19 छात्र-छात्राओं की हो चुकी है घर वापसी
पडरौना। यूक्रेन में फंसे जिले के 15 मेडिकल छात्र-छात्राएं बृहस्पतिवार को अपने घर पहुंच गए। इसके पहले भी चार बच्चे जिले में आए थे, जिसे लेकर अब तक 19 छात्र-छात्राएं अपने घर पहुंचे गए हैं। आपदा विभाग की मानें तो यूक्रेन में अभी भी 19 बच्चे फंसे हुए हैं, जिन्हें वापस लाने के लिए सरकार की तरफ से प्रयास किए जा रहे हैं।आपदा विभाग के आपदा विशेषज्ञ रवि राय ने बताया कि यूक्रेन में कुशीनगर जिले के कुल 38 छात्र फंसे हुए थे। इसमें अब तक कुल 19 छात्र-छात्राओं की घर वापसी हो गई है। बृहस्पतिवार को जिले के 15 विद्यार्थी अपने घर पहुंचे हैं। जबकि 19 छात्र-छात्राएं अभी भी यूक्रेन के आस-पास ही फंसे है। उन्होंने बताया कि अभी तक घर वापस नहीं पहुंचने वाले छात्र-छात्राओं में पांच छात्र रोमानिया, छह छात्र पोलैंड और तीन छात्र हंग्री देश तक पहुंचे गए हैं। मोबाइल बंद होने या नेटवर्क नहीं मिलने से पांच विद्यार्थियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। उनसे संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है।
छात्रा को व्यापारियों ने किया स्वागत
फाजिलनगर। यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने गई कस्बा निवासी रश्मि बृहस्पतिवार को घर पहुंची। उसके घर पहुंचते ही परिजनों के चेहरे पर खुशी छा गई। कस्बा के व्यापारियों ने उन्हें पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया है।कस्बा के कपड़ा व्यवसाई संदीप सिंह की बेटी रश्मि सिंह यूक्रेन में एमबीबीएस के तीसरे वर्ष की छात्रा है। रश्मि ने बताया कि यूक्रेन में युद्ध शुरू होने के बाद 24 फरवरी को उसने स्वदेश आने के लिए टिकट कराया था। एयरपोर्ट जाने पर बताया गया कि फ्लाइट रद्द हो गई। इसके बाद सभी बच्चे एम्बेसी पंहुचे, जहां एक स्कूल में रखा गया। उन्होंने बताया स्कूल में एक दिन के बाद खाना मिलना भी मुश्किल हो। सभी छात्रों में भय का माहौल था। तीन दिन बाद बताया गया कि अपने व्यवस्था से सभी लोग रोमानिया बॉडर पर पहुंचे। इसके बाद हम लोग बस से रोमानिया बॉडर के पास पहुंचे, जहां करीब दस किलोमीटर पैदल चल कर सीमा पर पंहुचे, लेकिन वहां भी दो दिनों के इंतजार के बाद रोमानिया में प्रवेश कर सके। वहां से एंबेसी के जरिए भारत भेजवाया गया। रश्मि की मां रीता देवी ने कहा कि बेटी सकुशल घर पहुंच गई। यह हमारे लिए सबसे बड़ी खुशी है। घर पहुंचने के खुशी ने व्यापार मंडल अध्यक्ष मनोज कुमार श्रीवास्तव, जिलाध्यक्ष अमरनाथ पांडेय, व्यास सिंह, मुकेश जायसवाल, दिलीप सिंह, धीरज वर्मा, सोनू जायसवाल, देवेंद्र गुप्ता, सतेंद्र सिंह आदि पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया।
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- अब तक जिले के 19 छात्र-छात्राओं की हो चुकी है घर वापसी
पडरौना। यूक्रेन में फंसे जिले के 15 मेडिकल छात्र-छात्राएं बृहस्पतिवार को अपने घर पहुंच गए। इसके पहले भी चार बच्चे जिले में आए थे, जिसे लेकर अब तक 19 छात्र-छात्राएं अपने घर पहुंचे गए हैं। आपदा विभाग की मानें तो यूक्रेन में अभी भी 19 बच्चे फंसे हुए हैं, जिन्हें वापस लाने के लिए सरकार की तरफ से प्रयास किए जा रहे हैं।आपदा विभाग के आपदा विशेषज्ञ रवि राय ने बताया कि यूक्रेन में कुशीनगर जिले के कुल 38 छात्र फंसे हुए थे। इसमें अब तक कुल 19 छात्र-छात्राओं की घर वापसी हो गई है। बृहस्पतिवार को जिले के 15 विद्यार्थी अपने घर पहुंचे हैं। जबकि 19 छात्र-छात्राएं अभी भी यूक्रेन के आस-पास ही फंसे है। उन्होंने बताया कि अभी तक घर वापस नहीं पहुंचने वाले छात्र-छात्राओं में पांच छात्र रोमानिया, छह छात्र पोलैंड और तीन छात्र हंग्री देश तक पहुंचे गए हैं। मोबाइल बंद होने या नेटवर्क नहीं मिलने से पांच विद्यार्थियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। उनसे संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है।
छात्रा को व्यापारियों ने किया स्वागत
फाजिलनगर। यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने गई कस्बा निवासी रश्मि बृहस्पतिवार को घर पहुंची। उसके घर पहुंचते ही परिजनों के चेहरे पर खुशी छा गई। कस्बा के व्यापारियों ने उन्हें पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया है।कस्बा के कपड़ा व्यवसाई संदीप सिंह की बेटी रश्मि सिंह यूक्रेन में एमबीबीएस के तीसरे वर्ष की छात्रा है। रश्मि ने बताया कि यूक्रेन में युद्ध शुरू होने के बाद 24 फरवरी को उसने स्वदेश आने के लिए टिकट कराया था। एयरपोर्ट जाने पर बताया गया कि फ्लाइट रद्द हो गई। इसके बाद सभी बच्चे एम्बेसी पंहुचे, जहां एक स्कूल में रखा गया। उन्होंने बताया स्कूल में एक दिन के बाद खाना मिलना भी मुश्किल हो। सभी छात्रों में भय का माहौल था। तीन दिन बाद बताया गया कि अपने व्यवस्था से सभी लोग रोमानिया बॉडर पर पहुंचे। इसके बाद हम लोग बस से रोमानिया बॉडर के पास पहुंचे, जहां करीब दस किलोमीटर पैदल चल कर सीमा पर पंहुचे, लेकिन वहां भी दो दिनों के इंतजार के बाद रोमानिया में प्रवेश कर सके। वहां से एंबेसी के जरिए भारत भेजवाया गया। रश्मि की मां रीता देवी ने कहा कि बेटी सकुशल घर पहुंच गई। यह हमारे लिए सबसे बड़ी खुशी है। घर पहुंचने के खुशी ने व्यापार मंडल अध्यक्ष मनोज कुमार श्रीवास्तव, जिलाध्यक्ष अमरनाथ पांडेय, व्यास सिंह, मुकेश जायसवाल, दिलीप सिंह, धीरज वर्मा, सोनू जायसवाल, देवेंद्र गुप्ता, सतेंद्र सिंह आदि पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया।
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