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नियुक्त कर्मचारियों के बने रहने के लिए सुविधाशुल्क लेने का मढ़ा आरोप

Wed, 12 Dec 2018 11:35 PM IST
Updated Wed, 12 Dec 2018 11:35 PM IST
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नियुक्त कर्मचारियों के बने रहने के लिए सुविधाशुल्क लेने का मढ़ा आरोप
सभासदों ने चेयरमैन के खिलाफ खोला मोर्चा
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देर रात पडरौना पहुंचे नोडल अफसर को शिकायतों का पुलिंदा सौंपा
चेयरमैन पर वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितता का आरोप लगाया
लखनऊ पहुंचते ही जांच कराने का नोडल अफसर ने दिया आश्वासन
अमर उजाला ब्यूरो
पडरौना। सभासदों ने नगर पालिका चेयरमैन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार की रात पडरौना नगर के भ्रमण पर आए नोडल अफसर को शिकायतों का पुलिंदा सौंपा और कार्रवाई की मांग की। दस सूत्री ज्ञापन में सभासदों ने चेयरमैन पर वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितता का आरोप लगाया। रुपये लकर नगर क्षेत्र की जमीन व्यवसायी को देने की बात कही है। नोडल अफसर ने सभासदों को आश्वस्त किया कि लखनऊ पहुंचते ही वह प्रकरण की जांच शुरू करा देंगे।

शहर में साफ-सफाई आदि का जायजा लेने पहुंचे नोडल अफसर रजनीश गुप्ता को मेन बाजार उत्तरी के सभासद रत्नेश गुप्ता, लाजपतनगर के राजन जायसवाल और तिलकनगर की सभासद शांति देवी ने ज्ञापन सौंपा। सभासदों ने कहा है कि चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए चेयरमैन निर्माण कार्यों की लागत जानबूझ कर 10 लाख रुपये से कम कर देते हैं, ताकि ई-टेंडर से बचा जा सके। मानक के अनुरूप शहर में नाली, इंटरलॉकिंग निर्माण कार्य भी नहीं कराया गया है। चेयरमैन की ओर से पथ प्रकाश के लिए 50 लाख रुपये से अधिक की खरीदारी की गई है, लेकिन आज भी शहर के कई वार्ड अंधेरे में हैं। सभासदों ने आरोप लगाया है कि आउटसोर्सिंग के माध्यम से पूर्व में 70 कर्मचारी रखे गए हैं, चेयरमैन ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से नियुक्ति के नाम पर रुपये की मांग की, ऐसा नहीं करने पर बैक डेट में सेवा प्रदाता का टेंडर निरस्त कर दिया। उन सभी कर्मचारियों से विभिन्न अनुभागों में कार्य तो लिया जा रहा है, लेकिन उन्हें मानदेय आदि कोई लाभ नहीं दिया जा रहा है। यही नहीं, नगरपालिका क्षेत्र के एसबीआई बैंक के समीप लगभग 35 वर्ष पूर्व बने नाले को तोड़वा दिया गया। रुपये लेकर 10 फीट चौड़ा, 150 फीट लंबा जमीन का टुकड़ा एक व्यवसायी को दे दिया गया। जबकि इस जमीन की कीमत करोड़ में है। सभासदों ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने पर शासन सत्ता का हवाला देकर उनकी आवाज को लाठियों के दम पर दबाने का भी कार्य किया गया है। ईओ के पद पर तैनात अधिकारी से कार्य न लेकर महत्वपूर्ण व वित्तीय स्वीकृति जलकल इंजीनियर से कराई जाती है। बोर्ड में पारित प्रस्तावों की छाया प्रति तय समय में न तो डीएम को भेजी जाती है और न ही आयुक्त गोरखपुर को। सभासदों ने नोडल अफसर से पूरे प्रकरण की जांच कराकर कार्रवाई की मांग की। नोडल अफसर रजनीश गुप्ता ने आश्वासन दिया कि लखनऊ पहुंचते ही टीम भेजी जाएगी, जो प्रकरण की जांच कर उन्हें रिपोर्ट भेजेगी।
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