तमकुहीराज। बाढ़ की विभीषिका झेल रहे दियारा क्षेत्र के लोगों को तहसील प्रशासन की बेरुखी समझ में नहीं आ रही है। सरकारी स्कूल में बने राहत शिविर में लोगों को जर्जर भवन में रखा गया है। अभी तक प्रशासन की ओर से सरकारी नाव भी नहीं मुहैया कराई जा सकी है। दूध मुंहे बच्चों को गोद में लेकर छोटी नाव से उफनाती नदी को पार कर रोजी-रोटी की तलाश में महिलाओं का जाना मजबूरी हो गई है। एसडीएम तमकुहीराज त्रिभुवन के अनुसार इस वर्ष 88 परिवारों का घर नदी में विलीन हो चुका है। इनमें से 21 परिवार अहिरौलीदान के सरकारी स्कूल में बने राहत शिविर में रह रहे हैं। दूधमुंहे बच्चे के साथ नदी उस पार मजदूरी करने जाने वाली मरछिया देवी, फेंकनी, माया का कहना है कि बाबू उफनाती नदी के उस पार बच्चों को लेकर छोटी नाव से जाने में डर तो लगता है, लेकिन क्या करें, पापी पेट जो न कराएं। अरविंद सिंह पटेल बताते है कि गांवों के किनारे सरकारी नाव खड़ी हैं, लेकिन नाविक नहीं हैं। इससे लोगों को छोटी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। गांव के दूधनाथ, रामेश्वर, योगेंद्र, देवनारायण, बलीराम, रामाशंकर, विवेक, जीतन आदि का कहना है कि तहसील प्रशासन बाढ़ पीड़ितों की सुरक्षा में लगे होने का जितना ढिढोरा पीट रहा है, उसका एक अंश भी धरातल पर काम हुआ होता, तो लोगों की मुश्किलें कम हो जाती। एसडीएम त्रिभुवन ने बताया कि बाढ़ प्रभावित सभी गांवों में दो-दो नाव की व्यवस्था तहसील प्रशासन की ओर से की गई है।