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13 डॉक्टरों के भरोसे 42 आयुर्वेदिक अस्पताल
कुश्ाीनगर (ब्यूरो)
Updated Sun, 08 Apr 2018 11:55 PM IST
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आयुर्वेदिक अस्पताल।
- फोटो : कुश्ाीनगर ब्यूरो
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पडरौना। करीब तीस वर्षों से जनपद में संचालित आयुर्वेदिक एवं यूनानी अस्पतालों की दशा संसाधनों के मामले में दिन ब दिन दयनीय होती जा रही है। जिले के इन 42 अस्पतालों में सृजित पदों के सापेक्ष न तो डॉक्टर तैनात हैं और न ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी। अधिकांश अस्पताल तो किराए के भवन और ग्राम पंचायतों की अनुकंपा पर मिले भवनों में संचालित किए जा रहे हैं। यहां तक कि विभाग के अफसरों को वाहन तक मुहैया नहीं कराया गया, ताकि वे अस्पतालों का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्था सुधारने का प्रयास कर सकें।
जिले भर में कुल 42 राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अस्पताल हैं, जिनमें संसाधनों की नितांत कमी है। मरीजों की आवश्यकता के अनुरूप दवाइयां उपलब्ध न होना, अस्पतालों में पर्याप्त जगह की कमी, डॉक्टर के मौजूद न रहने सहित अन्य असुविधाओं की वजह से मरीजों का रुझान इन अस्पतालों की तरफ बहुत कम हो गया है। दूसरे इन अस्पतालों में धीरे-धीरे स्टॉफ भी कम होते जा रहे हैं। डॉक्टर घट जाने के कारण कहीं-कहीं चिकित्सा व्यवस्था वहां तैनात फार्मासिस्ट के कंधों पर टिकी हुई है।
जनपद के राजकीय आयुुर्वेदिक एवं यूनानी अस्पतालों की स्थापना के समय 42 राजकीय अस्पतालों में 44 डॉक्टरों के पद सृजित किए गए थे। अब इनकी संख्या में काफी कमी हो गई है। अधिकांश डॉक्टरों के सेवानिवृत्त हो जाने और तबादले के चलते अब सिर्फ 13 डॉक्टर ही बचे हैं। इसके अलावा फार्मासिस्ट के 44 पदों में दो पद रिक्त हैं।
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राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अस्पतालों में वार्ड ब्वाय और परिचारकों की संख्या भी कम हो गई है। इस विभाग के जिले भर के अस्पतालों में इन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के कुल 88 पद सृजित हैं, जिसके सापेक्ष 23 पद खाली हैं। इसके चलते भी चिकित्सकीय व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी के कार्यालय के साथ ही साथ विभाग के सात अस्पताल किराए के भवन में संचालित हो रहे हैं। 18 अस्पताल सरकारी भवन में हैं, जबकि 17 अस्पताल ऐसे भवनों में हैं, जिन्हें ग्राम प्रधान या अन्य गणमान्य लोगों की पहल पर मुफ्त में मुहैया कराया गया है।
पिछले एक सप्ताह तक तो जिले के सभी राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अस्पतालों में दवाइयों का भी टोटा था। हालांकि अब दवाइयां आ गई हैं और अस्पतालों के लिए इनका वितरण भी शुरू कर दिया गया है। फिर भी अभी आधे से अधिक अस्पतालों में दवाइयां नहीं पहुंच पाई हैं।
विभाग के अफसरों की मानी जाए तो राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को देखते हुए सरकार नई नियुक्तियों के साथ-साथ रिटायर्ड डॉक्टरों को भी अवसर देने की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि नए डॉक्टरों की नियुक्ति संघ लोक सेवा आयोग के माध्यम से की जाएगी, जबकि रिटायर्ड डॉक्टरों का कार्यकाल पांच साल के लिए बढ़ाकर ऐसे अस्पतालों में डॉक्टरों के रिक्त पदों पर नियुक्त किया जाएगा।
इस विभाग के पास कोई सरकारी गाड़ी भी नहीं है। नतीजतन अफसरों को अस्पतालों का निरीक्षण करने या अन्य जरुरी कार्यों से आने जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
आयुर्वेदिक एवं यूनानी अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने तथा स्थानांतरण की वजह से अधिकांश पद रिक्त हो गए हैं। उन पदों पर संघ लोक सेवा आयोग से एवं रिटायर्ड डॉक्टरों की पुनर्नियुक्ति के लिए शासन स्तर पर प्रयास शुरू कर दिया गया है। जहां दवाइयां नहीं पहुंची हैं, वहां जल्द उपलब्ध करा दी जाएंगी। जमीन के अभाव में विभागीय अस्पताल नहीं बन पा रहे हैं, जिससे उन्हें किराए के भवनों में संचालित करना पड़ रहा है।
डॉ. प्रकाशचंद,
क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी।
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जिले भर में कुल 42 राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अस्पताल हैं, जिनमें संसाधनों की नितांत कमी है। मरीजों की आवश्यकता के अनुरूप दवाइयां उपलब्ध न होना, अस्पतालों में पर्याप्त जगह की कमी, डॉक्टर के मौजूद न रहने सहित अन्य असुविधाओं की वजह से मरीजों का रुझान इन अस्पतालों की तरफ बहुत कम हो गया है। दूसरे इन अस्पतालों में धीरे-धीरे स्टॉफ भी कम होते जा रहे हैं। डॉक्टर घट जाने के कारण कहीं-कहीं चिकित्सा व्यवस्था वहां तैनात फार्मासिस्ट के कंधों पर टिकी हुई है।
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जनपद के राजकीय आयुुर्वेदिक एवं यूनानी अस्पतालों की स्थापना के समय 42 राजकीय अस्पतालों में 44 डॉक्टरों के पद सृजित किए गए थे। अब इनकी संख्या में काफी कमी हो गई है। अधिकांश डॉक्टरों के सेवानिवृत्त हो जाने और तबादले के चलते अब सिर्फ 13 डॉक्टर ही बचे हैं। इसके अलावा फार्मासिस्ट के 44 पदों में दो पद रिक्त हैं।
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राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अस्पतालों में वार्ड ब्वाय और परिचारकों की संख्या भी कम हो गई है। इस विभाग के जिले भर के अस्पतालों में इन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के कुल 88 पद सृजित हैं, जिसके सापेक्ष 23 पद खाली हैं। इसके चलते भी चिकित्सकीय व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी के कार्यालय के साथ ही साथ विभाग के सात अस्पताल किराए के भवन में संचालित हो रहे हैं। 18 अस्पताल सरकारी भवन में हैं, जबकि 17 अस्पताल ऐसे भवनों में हैं, जिन्हें ग्राम प्रधान या अन्य गणमान्य लोगों की पहल पर मुफ्त में मुहैया कराया गया है।
पिछले एक सप्ताह तक तो जिले के सभी राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अस्पतालों में दवाइयों का भी टोटा था। हालांकि अब दवाइयां आ गई हैं और अस्पतालों के लिए इनका वितरण भी शुरू कर दिया गया है। फिर भी अभी आधे से अधिक अस्पतालों में दवाइयां नहीं पहुंच पाई हैं।
विभाग के अफसरों की मानी जाए तो राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को देखते हुए सरकार नई नियुक्तियों के साथ-साथ रिटायर्ड डॉक्टरों को भी अवसर देने की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि नए डॉक्टरों की नियुक्ति संघ लोक सेवा आयोग के माध्यम से की जाएगी, जबकि रिटायर्ड डॉक्टरों का कार्यकाल पांच साल के लिए बढ़ाकर ऐसे अस्पतालों में डॉक्टरों के रिक्त पदों पर नियुक्त किया जाएगा।
इस विभाग के पास कोई सरकारी गाड़ी भी नहीं है। नतीजतन अफसरों को अस्पतालों का निरीक्षण करने या अन्य जरुरी कार्यों से आने जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
आयुर्वेदिक एवं यूनानी अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने तथा स्थानांतरण की वजह से अधिकांश पद रिक्त हो गए हैं। उन पदों पर संघ लोक सेवा आयोग से एवं रिटायर्ड डॉक्टरों की पुनर्नियुक्ति के लिए शासन स्तर पर प्रयास शुरू कर दिया गया है। जहां दवाइयां नहीं पहुंची हैं, वहां जल्द उपलब्ध करा दी जाएंगी। जमीन के अभाव में विभागीय अस्पताल नहीं बन पा रहे हैं, जिससे उन्हें किराए के भवनों में संचालित करना पड़ रहा है।
डॉ. प्रकाशचंद,
क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी।