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औषधीय खेती को बढ़ावा देगी सरकार
Updated Sat, 28 Jul 2018 07:04 PM IST
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कुशीनगर के किसान उगाएंगे ब्राह्मी व तुलसी
औषधीय पौधों की खेती के लिए उपयुक्त है जिले की जमीन
बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग ने बनाई योजना
किसानों को 30 से 50 प्रतिशत तक मिलेगा अनुदान
बाजार उपलब्ध कराने में विभाग करेगा किसानों का सहयोग
अमर उजाला ब्यूरो
पडरौना। आयुर्वेदिक औषधियों की बढ़ती मांग ने कुशीनगर के किसानों को एक और नकदी फसल का विकल्प दे दिया है। जिले में औषधीय पौधे तुलसी और ब्राह्मी की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा। इन पौधों के उत्पादन के लिए कुशीनगर की माटी उपयुक्त है। इसे देखते हुए उद्यान विभाग ने किसानों के लिए अनुदान के साथ ही बाजार उपलब्ध कराने के लिए भी प्रयास शुरू किया है। अगर इसमें सफलता मिली तो जिला औषधीय पौधों की खेती के लिए भी जाना जाएगा।
कुशीनगर की माटी में तुलसी, सर्पगंधा, ब्राह्मी आदि औषधीय पौधे खुद ही उगते हैं। गंडक नहर के पानी से खेतों में जमा सिल्ट (भाठ की मिट्टी) हर तरह की खेती के लिए उपयुक्त है। हालांकि यहां के किसान अब तक धान, गेहूं, गन्ना, आलू व केला आदि की परंपरागत खेती ही करते चले आ रहे हैं। परंतु उद्यान विभाग ने किसानों को व्यवसायिक खेती की तरफ मोड़ने का प्रयास शुरू किया है। जिला उद्यान अधिकारी राजेंद्र कुमार यादव के अनुसार जिले में तुलसी व सर्पगंधा की खेती के लिए भूमि उपयुक्त है। सरकार ने इन औषधीय पौधों की खेती के लिए प्रोत्साहन योजना भी शुरू की है। शुरूआत में तुलसी व सर्पगंधा की खेती के लिए दो हेक्टेयर तथा ब्राह्मी और बच की खेती के लिए आठ हेेक्टेयर क्षेत्रफल का चयन किया जाना है। सर्पगंधा की खेती पर 50 प्रतिशत और अन्य औषधीय पौधों की खेती के लिए लागत का 30 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। जिला उद्यान अधिकारी राजेंद्र कुमार यादव ने कहा कि औषधीय पौधों की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रयास सफल रहा तो जिले को एक और नई पहचान मिलेगी। किसानों को अनुदान की रकम सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी।
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औषधीय पौधों की खेती के लिए उपयुक्त है जिले की जमीन
बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग ने बनाई योजना
किसानों को 30 से 50 प्रतिशत तक मिलेगा अनुदान
बाजार उपलब्ध कराने में विभाग करेगा किसानों का सहयोग
अमर उजाला ब्यूरो
पडरौना। आयुर्वेदिक औषधियों की बढ़ती मांग ने कुशीनगर के किसानों को एक और नकदी फसल का विकल्प दे दिया है। जिले में औषधीय पौधे तुलसी और ब्राह्मी की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा। इन पौधों के उत्पादन के लिए कुशीनगर की माटी उपयुक्त है। इसे देखते हुए उद्यान विभाग ने किसानों के लिए अनुदान के साथ ही बाजार उपलब्ध कराने के लिए भी प्रयास शुरू किया है। अगर इसमें सफलता मिली तो जिला औषधीय पौधों की खेती के लिए भी जाना जाएगा।
कुशीनगर की माटी में तुलसी, सर्पगंधा, ब्राह्मी आदि औषधीय पौधे खुद ही उगते हैं। गंडक नहर के पानी से खेतों में जमा सिल्ट (भाठ की मिट्टी) हर तरह की खेती के लिए उपयुक्त है। हालांकि यहां के किसान अब तक धान, गेहूं, गन्ना, आलू व केला आदि की परंपरागत खेती ही करते चले आ रहे हैं। परंतु उद्यान विभाग ने किसानों को व्यवसायिक खेती की तरफ मोड़ने का प्रयास शुरू किया है। जिला उद्यान अधिकारी राजेंद्र कुमार यादव के अनुसार जिले में तुलसी व सर्पगंधा की खेती के लिए भूमि उपयुक्त है। सरकार ने इन औषधीय पौधों की खेती के लिए प्रोत्साहन योजना भी शुरू की है। शुरूआत में तुलसी व सर्पगंधा की खेती के लिए दो हेक्टेयर तथा ब्राह्मी और बच की खेती के लिए आठ हेेक्टेयर क्षेत्रफल का चयन किया जाना है। सर्पगंधा की खेती पर 50 प्रतिशत और अन्य औषधीय पौधों की खेती के लिए लागत का 30 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। जिला उद्यान अधिकारी राजेंद्र कुमार यादव ने कहा कि औषधीय पौधों की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रयास सफल रहा तो जिले को एक और नई पहचान मिलेगी। किसानों को अनुदान की रकम सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी।
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