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कटान के भय से पक्के मकान तोड़कर जाने लगे लोग
Updated Wed, 30 Aug 2017 05:37 PM IST
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कुशीनगर। एपी तटबंध के किनारे बसे अहिरौलीदान गांव के चार टोले और बिहार प्रांत के गांव भैंसही के सामने गंडक नदी का कटान तेज होने से इन गांवों के लोग अब अपने पक्के मकान भी तोड़ने लगे हैं। नदी जिस तरह से इन गांवों के सामने की जमीन काटते हुई आबादी की तरफ बढ़ रही है उससे गांव बचने की उम्मीद खत्म होती जा रही है। परिस्थितियां इतनी विषम होने के बावजूद प्रशासन पीड़ित लोगों की खोज खबर भी नहीं ले रहा है।
गंडक नदी एक सप्ताह से अहिरौलीदान गांव के चित्तू टोला, कंचन टोला, डीह टोला और कचहरी टोला के सामने कटान कर रही है। चित्तू टोला निवासी चंद्रिका, बिहारी व भगत समेत कई लोगों की झोपडियां नदी में विलीन हो चुकी हैं। वहीं महातम, विक्रम, रामचंद्र, हरिहर सहित 25 लोगों ने अपनी झोपड़ियां और सामान हटा लिए हैं। कंचन टोला के लोग भी अपने सामान हटा रहे हैं। इसके अलावा डीह टोला निवासी दीनानाथ यादव सहित अन्य लोग अपने पक्के मकान भी तोड़ना शुरू कर दिए हैं। इन लोगों को आशंका है कि नदी कुछ ही दिन में उनके घरों को भी काट सकती है। नदी कचहरी टोला में भी आबादी से बमुश्किल 50 मीटर दूर है।
यही हाल सीमा से सटे बिहार प्रांत के भैंसही गांव का है। कटान के चलते यहां के लोग भी अपना सामान समेटकर दूसरी जगह जा रहे हैं। ग्राम प्रधान हीरालाल यादव, जेके सिंह, सुजीत यादव, अरविंद पटेल, रामनाथ, उमेश, कोदई, अशोक सिंह, कन्हैया, भोला आदि का आरोप है कि इस विषम परिस्थिति में भी प्रशासन की तरफ से न तो उन्हें कोई मदद दी गई और न ही कटान रोकने का अब तक प्रयास ही शुरू किया गया।
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उधर, इस संबंध में तमकुहीराज के तहसीलदार रामप्यारे का कहना है कि कटान से प्रभावित लोगों की सूची बनाकर उन तक राहत सामग्री पहुंचाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। विस्थापित हो रहे लोगों को भी शासन के निर्देशानुसार मदद पहुंचाई जाएगी।
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गंडक नदी एक सप्ताह से अहिरौलीदान गांव के चित्तू टोला, कंचन टोला, डीह टोला और कचहरी टोला के सामने कटान कर रही है। चित्तू टोला निवासी चंद्रिका, बिहारी व भगत समेत कई लोगों की झोपडियां नदी में विलीन हो चुकी हैं। वहीं महातम, विक्रम, रामचंद्र, हरिहर सहित 25 लोगों ने अपनी झोपड़ियां और सामान हटा लिए हैं। कंचन टोला के लोग भी अपने सामान हटा रहे हैं। इसके अलावा डीह टोला निवासी दीनानाथ यादव सहित अन्य लोग अपने पक्के मकान भी तोड़ना शुरू कर दिए हैं। इन लोगों को आशंका है कि नदी कुछ ही दिन में उनके घरों को भी काट सकती है। नदी कचहरी टोला में भी आबादी से बमुश्किल 50 मीटर दूर है।
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यही हाल सीमा से सटे बिहार प्रांत के भैंसही गांव का है। कटान के चलते यहां के लोग भी अपना सामान समेटकर दूसरी जगह जा रहे हैं। ग्राम प्रधान हीरालाल यादव, जेके सिंह, सुजीत यादव, अरविंद पटेल, रामनाथ, उमेश, कोदई, अशोक सिंह, कन्हैया, भोला आदि का आरोप है कि इस विषम परिस्थिति में भी प्रशासन की तरफ से न तो उन्हें कोई मदद दी गई और न ही कटान रोकने का अब तक प्रयास ही शुरू किया गया।
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उधर, इस संबंध में तमकुहीराज के तहसीलदार रामप्यारे का कहना है कि कटान से प्रभावित लोगों की सूची बनाकर उन तक राहत सामग्री पहुंचाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। विस्थापित हो रहे लोगों को भी शासन के निर्देशानुसार मदद पहुंचाई जाएगी।