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जिले में 40 प्रतिशत तक पहुंचा लाइनलॉस
Updated Sat, 17 Jun 2017 05:03 PM IST
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कुशीनगर। जनपद में बिजली संकट गहराता जा रहा है। इसके लिए आवश्यकतानुसार बिजली न मिलने और लाइनलॉस को बड़ी वजह बताई जा रही है। जनपद को मांग से 30 फीसदी कम बिजली मिल रही है, वहीं लाइनलॉस 40 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इन कमियों को पूरा करने के लिए विभाग बिजली कटौती का सहारा ले रहा है।
जनपद में बिजली संकट के कई प्रमुख कारण हैं, जिनके चलते उपभोक्ताओं को उमस भरी इस गर्मी में परेशान होना पड़ रहा है। बिजली विभाग की मानी जाए तो अकेले पडरौना डिवीजन में आने वाले शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को 160 से 170 मेगावाट बिजली चाहिए। कमोवेश इतनी ही बिजली कसया डिवीजन के लिए भी जरूरी है, लेकिन कभी वोल्टेज की समस्या तो कभी ऊपर से ही बिजली कम मिलने के चलते मांग के अनुरूप बिजली डिवीजन तक नहीं पहुंच पा रही है। विभाग के एक्सईएन का कहना है कि पडरौना विद्युत वितरण खंड के अंतर्गत आने वाले शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में डिमांड के सापेक्ष 70 फीसदी ही बिजली मिल रही है। इस वजह से भी शासन की मंशा के अनुरूप उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति में दिक्कत हो रही है।
उधर, इस बिजली संकट में रही सही कसर लाइनलॉस ने पूरी कर दी है। विभाग का मानना है कि जिले में लाइन लॉस 40 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिसके चलते उपभोक्ताओं को लगातार 18 से 20 घंटे बिजली देना संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसा अक्सर देखने को मिलता है कि 11 हजार वोल्ट के तार टूटकर जमीन पर गिरे कई दिन बीत जाते हैं, लेकिन बिजली विभाग उन्हें ठीक नहीं कराता। इसके चलते अक्सर बड़े हादसे होते रहते हैं। जर्जर और नीचे तक लटकते तार शहर से लेकर गांवों तक कहीं भी देखे जा सकते हैं, जो लाइन लॉस की प्रमुख वजह हैं।
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पडरौना विद्युत वितरण खंड के एक्सईएन संजय यादव का कहना है कि शासन की मंशा के अनुरूप शहरी क्षेत्र को 20 घंटे और ग्रामीण इलाकों को 18 घंटे लगातार बिजली उपलब्ध कराने के लिए पडरौना डिवीजन को 160 से 170 मेेगावाट बिजली की जरूरत है। परंतु इसमें 70 फीसदी यानी 115 मेगावाट के आसपास ही बिजली मिल रही है। यहां लाइनलॉस भी 40 प्रतिशत के करीब है। उन्होंने कहा कि कम बिजली उपलब्ध होने की दशा में निरंतर बिजली देना संभव नहीं हो पा रहा है। इसीलिए ब्रेकडाउन करके किस्तों में बिजली देनी पड़ रही है। इसके अलावा नए बिजली घर स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है। इस समस्या पर मशविरा के लिए बृहस्पतिवार को पावर कारपोरेशन के चेयरमैन ने लखनऊ में ट्रांसमिशन से जुड़े अफसरों के साथ बैठक भी की।
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जनपद में बिजली संकट के कई प्रमुख कारण हैं, जिनके चलते उपभोक्ताओं को उमस भरी इस गर्मी में परेशान होना पड़ रहा है। बिजली विभाग की मानी जाए तो अकेले पडरौना डिवीजन में आने वाले शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को 160 से 170 मेगावाट बिजली चाहिए। कमोवेश इतनी ही बिजली कसया डिवीजन के लिए भी जरूरी है, लेकिन कभी वोल्टेज की समस्या तो कभी ऊपर से ही बिजली कम मिलने के चलते मांग के अनुरूप बिजली डिवीजन तक नहीं पहुंच पा रही है। विभाग के एक्सईएन का कहना है कि पडरौना विद्युत वितरण खंड के अंतर्गत आने वाले शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में डिमांड के सापेक्ष 70 फीसदी ही बिजली मिल रही है। इस वजह से भी शासन की मंशा के अनुरूप उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति में दिक्कत हो रही है।
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उधर, इस बिजली संकट में रही सही कसर लाइनलॉस ने पूरी कर दी है। विभाग का मानना है कि जिले में लाइन लॉस 40 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिसके चलते उपभोक्ताओं को लगातार 18 से 20 घंटे बिजली देना संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसा अक्सर देखने को मिलता है कि 11 हजार वोल्ट के तार टूटकर जमीन पर गिरे कई दिन बीत जाते हैं, लेकिन बिजली विभाग उन्हें ठीक नहीं कराता। इसके चलते अक्सर बड़े हादसे होते रहते हैं। जर्जर और नीचे तक लटकते तार शहर से लेकर गांवों तक कहीं भी देखे जा सकते हैं, जो लाइन लॉस की प्रमुख वजह हैं।
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पडरौना विद्युत वितरण खंड के एक्सईएन संजय यादव का कहना है कि शासन की मंशा के अनुरूप शहरी क्षेत्र को 20 घंटे और ग्रामीण इलाकों को 18 घंटे लगातार बिजली उपलब्ध कराने के लिए पडरौना डिवीजन को 160 से 170 मेेगावाट बिजली की जरूरत है। परंतु इसमें 70 फीसदी यानी 115 मेगावाट के आसपास ही बिजली मिल रही है। यहां लाइनलॉस भी 40 प्रतिशत के करीब है। उन्होंने कहा कि कम बिजली उपलब्ध होने की दशा में निरंतर बिजली देना संभव नहीं हो पा रहा है। इसीलिए ब्रेकडाउन करके किस्तों में बिजली देनी पड़ रही है। इसके अलावा नए बिजली घर स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है। इस समस्या पर मशविरा के लिए बृहस्पतिवार को पावर कारपोरेशन के चेयरमैन ने लखनऊ में ट्रांसमिशन से जुड़े अफसरों के साथ बैठक भी की।