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यमुना में बाढ़ फिर भी माइनरों से गायब है पानी
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Sun, 24 Jul 2016 12:30 AM IST
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यमुना का जल स्तर लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद दोआबा में किशुनपुर पंप कैनाल की माइनरें और रजबहों से धूल उड़ रही है। खरीफ की खेती के वक्त माइनरों से गायब पानी किसानों की मुसीबत बन गया है। पानी के अभाव में किसान अपने खेतों में धान की रोपाई नहीं कर पा रहा। यदि जल्द ही माइनरों में पानी नहीं छोड़ा गया तो खरीफ के सीजन में किसानों के खेत बंजर पड़े रह जाएंगे। ऐसा हुआ तो दूसरे का पेट भरने के लिए अनाज पैदा करने वाला किसान स्वयं भुखमरी की कगार पर खड़ा नजर आएगा।
दोआबा के आधे क्षेत्रफल में किशुनपुर पंप कैनाल की 28 माइनरों और छह रजबहों का मकड़जाल फैला हुआ है। नहर में आने वाला पानी इलाकाई किसानों के लिए कभी वरदान साबित होता था। लेकिन पिछले कई सालों से सिंचाई के समय पर इन माइनरों और रजबहों से पानी गायब हो जाता है। रबी की खेती में सूखे की मार झेलने के बाद दोआबा का किसान खरीफ से अपनी हालत सुधारने का प्रयास कर रहा था। इसके लिए नहरी क्षेत्र के किसानों ने भारी मात्रा में धान की नर्सरी कर रखी है लेकिन रोपाई के ऐन वक्त पर माइनरों से पानी गायब हो गया है। पखवारे भर से किसान माइनरों में पानी का इंतजार कर रहे थे। अब धीरे-धीरे रोपाई का समय भी खत्म हो रहा है।
इसे लेकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंचने लगी हैं। पर्याप्त बारिश न होने और माइनरों के सूख जाने से किसानों को कोई राह नहीं सूझ रही। ऐसे में खरीफ के मौसम में भी उनके खेतों के बंजर पड़े रह जाने का खतरा मंडराने लगा है। यहां पर किसानों में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में माइनरें और रजबहें सूखे क्यों हैं। यह बात लोगों को हजम नहीं हो रही है। कुछ भी हो नहरों में जल्द पानी न छोड़ा गया तो किसानों को खुद के लिए दाने-दाने के लाले पड़ते नजर आएंगे।
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तीन माइनरों में छह माह से नहीं आया पानी
किशुनपुर पंप कैनाल की तीन माइनरों में छह माह से पानी नहीं पहुंच सका है। म्योहर माइनर के किसान मुन्नू बाबू मिश्र, नन्हुक लाल सिंह की माने तो सिंचाई के वक्त माइनर में कभी भी पानी नहीं आता। यही हाल घोषिया और बंधुरी रसूलीपुर माइनर का है। बंधुरी रसूलीपुर माइनर के किसान बच्चा यादव का कहना है कि एक साल से न तो माइनर की सफाई हुई और न ही पानी छोड़ा गया। इससे नहर का कोई फायदा किसानों को नहीं मिल रहा है। यही हाल कनैनी और बेरौंचा माइनर का है। नहरों में पानी न आने से इलाके के किसानों का हाल बेहाल है। पानी न आने की वजह से अब किसान अपने-अपने खेतों में बाजरा, ज्वार और तिलहन की फसलों की बुवाई शुरू कर दिए हैं।
आठ की जगह चल रहे महज पांच पंप
किशुनपुर पंप कैनाल की माइनरों में पानी न पहुंचने का प्रमुख कारण दो तिहाई पंपों का बंद होना बताया जा रहा है। जानकारों की माने तो नहर में पानी छोड़े जाने के लिए कुल आठ पंप लगे हैं। लेकिन इनमें से तीन खराब हैं। महज पांच पंप से कैनाल में पानी छोड़ा जा रहा है। यही कारण है कि पानी की मात्रा पर्याप्त न होने की वजह से बड़ी नहर से पानी माइनरों में नहीं पहुंच पाता। दूसरा प्रमुख कारण यह है कि खरीफ की खेती के दौरान खेतों में पानी की खपत भी अधिक होती है। इसके अलावा कुछ किसान बड़ी नहर में पनचक्की लगाकर रास्ते में ही पानी सोख लेते हैं। ऐसे में कुछ दूरी के बाद बड़ी नहर में पानी आगे नहीं बढ़ पाता। कुछ भी हो यदि जल्द ही आठों पंप चालू नहीं किए गए तो वरदान साबित होने वाली किशुनपुर पंप कैनाल खरीफ की खेती में किसानों के लिए अभिशाप से कम नहीं साबित होगी।
खरीफ की खेती में पानी की खपत अधिक होती है। यमुना का जल स्तर बढ़ने के बाद तीन पंप खराब हो चुके हैं। उन्हें ठीक कराने में यमुना के पानी का अड़ंगा है। प्रयास सफल रहा तो जल्द ही पंप कैनाल पर्याप्त पानी उगलना शुरू कर देगी।
आरके निरंजन, एक्सईएन सिंचाई
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दोआबा के आधे क्षेत्रफल में किशुनपुर पंप कैनाल की 28 माइनरों और छह रजबहों का मकड़जाल फैला हुआ है। नहर में आने वाला पानी इलाकाई किसानों के लिए कभी वरदान साबित होता था। लेकिन पिछले कई सालों से सिंचाई के समय पर इन माइनरों और रजबहों से पानी गायब हो जाता है। रबी की खेती में सूखे की मार झेलने के बाद दोआबा का किसान खरीफ से अपनी हालत सुधारने का प्रयास कर रहा था। इसके लिए नहरी क्षेत्र के किसानों ने भारी मात्रा में धान की नर्सरी कर रखी है लेकिन रोपाई के ऐन वक्त पर माइनरों से पानी गायब हो गया है। पखवारे भर से किसान माइनरों में पानी का इंतजार कर रहे थे। अब धीरे-धीरे रोपाई का समय भी खत्म हो रहा है।
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इसे लेकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंचने लगी हैं। पर्याप्त बारिश न होने और माइनरों के सूख जाने से किसानों को कोई राह नहीं सूझ रही। ऐसे में खरीफ के मौसम में भी उनके खेतों के बंजर पड़े रह जाने का खतरा मंडराने लगा है। यहां पर किसानों में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में माइनरें और रजबहें सूखे क्यों हैं। यह बात लोगों को हजम नहीं हो रही है। कुछ भी हो नहरों में जल्द पानी न छोड़ा गया तो किसानों को खुद के लिए दाने-दाने के लाले पड़ते नजर आएंगे।
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तीन माइनरों में छह माह से नहीं आया पानी
किशुनपुर पंप कैनाल की तीन माइनरों में छह माह से पानी नहीं पहुंच सका है। म्योहर माइनर के किसान मुन्नू बाबू मिश्र, नन्हुक लाल सिंह की माने तो सिंचाई के वक्त माइनर में कभी भी पानी नहीं आता। यही हाल घोषिया और बंधुरी रसूलीपुर माइनर का है। बंधुरी रसूलीपुर माइनर के किसान बच्चा यादव का कहना है कि एक साल से न तो माइनर की सफाई हुई और न ही पानी छोड़ा गया। इससे नहर का कोई फायदा किसानों को नहीं मिल रहा है। यही हाल कनैनी और बेरौंचा माइनर का है। नहरों में पानी न आने से इलाके के किसानों का हाल बेहाल है। पानी न आने की वजह से अब किसान अपने-अपने खेतों में बाजरा, ज्वार और तिलहन की फसलों की बुवाई शुरू कर दिए हैं।
आठ की जगह चल रहे महज पांच पंप
किशुनपुर पंप कैनाल की माइनरों में पानी न पहुंचने का प्रमुख कारण दो तिहाई पंपों का बंद होना बताया जा रहा है। जानकारों की माने तो नहर में पानी छोड़े जाने के लिए कुल आठ पंप लगे हैं। लेकिन इनमें से तीन खराब हैं। महज पांच पंप से कैनाल में पानी छोड़ा जा रहा है। यही कारण है कि पानी की मात्रा पर्याप्त न होने की वजह से बड़ी नहर से पानी माइनरों में नहीं पहुंच पाता। दूसरा प्रमुख कारण यह है कि खरीफ की खेती के दौरान खेतों में पानी की खपत भी अधिक होती है। इसके अलावा कुछ किसान बड़ी नहर में पनचक्की लगाकर रास्ते में ही पानी सोख लेते हैं। ऐसे में कुछ दूरी के बाद बड़ी नहर में पानी आगे नहीं बढ़ पाता। कुछ भी हो यदि जल्द ही आठों पंप चालू नहीं किए गए तो वरदान साबित होने वाली किशुनपुर पंप कैनाल खरीफ की खेती में किसानों के लिए अभिशाप से कम नहीं साबित होगी।
खरीफ की खेती में पानी की खपत अधिक होती है। यमुना का जल स्तर बढ़ने के बाद तीन पंप खराब हो चुके हैं। उन्हें ठीक कराने में यमुना के पानी का अड़ंगा है। प्रयास सफल रहा तो जल्द ही पंप कैनाल पर्याप्त पानी उगलना शुरू कर देगी।
आरके निरंजन, एक्सईएन सिंचाई