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शीतला के दरबार में उमड़े भक्त
अमर उजाला कौशाम्बी ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jun 2016 12:25 AM IST
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आषाढ़ मास की शीतला अष्टमी के दिन मां शीतला के दरबार में श्रद्धालु उमड़ पड़। भोर से गंगा स्नान कर भक्तों ने पालना, प्रसाद चढ़ाकर मां के दरबार में माथा टेका। शीतलाधाम कड़ा में आषाढ़ माह के पहले पक्ष में पंचमी से नवमी तक पांच दिवसीय मेला लगता है। यह मेला इस बार 25 जून से शुरू हुआ। मेले के बीच में पड़ने वाली अष्टमी को शीतला अष्टमी के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन मां शीतला के दर्शन-पूजन से व्यक्ति के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और उसके परिवार में सुख शांति आती है। इस दिन दूर दराज से आने वाले श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर मां के दरबार में पालना चढ़ाते हैं।
श्रद्धालुओं का मानना है कि उनके पालने में सवार होकर मां शीतला श्रावण मास का झूला झूलती हैं और मुक्त कंठ से आशीर्वाद देती हैं। महत्व को देखते हुए मंगलवार को शीतला अष्टमी पर जिले के अलावा गैर जनपद से आए श्रद्धालुओं ने पूजा की। दूर दराज से आए भक्तों ने तो सोमवार शाम से ही धाम में डेरा डाल दिया था। मंगलवार भोर में गंगा में डुबकी लगाना शुरू कर दिया। इसके बाद गंगाघाट से मां के दरबार में माथा टेकने पहुंचे। नारियल, चुनरी, रेवड़ी और कोकाबेली आदि का प्रसाद लेकर मां की दरबार में माथा टेका। बाजे-गाजे के साथ नाचते गाते भक्तों ने निशान और पालना भी चढ़ाया। लोगों की माने तो शीतला अष्टमी के दिन लगभग ढाई सौ पालना मां की दरबार में चढ़ा। मेले में जिले के अलावा मिर्जापुर, वाराणसी, भदोही, इलाहाबाद, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, रायबरेली, लखनऊ, पश्चिमी फतेहपुर और कानपुर से आने वाले भक्तों की भारी भीड़ रही।
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श्रद्धालुओं का मानना है कि उनके पालने में सवार होकर मां शीतला श्रावण मास का झूला झूलती हैं और मुक्त कंठ से आशीर्वाद देती हैं। महत्व को देखते हुए मंगलवार को शीतला अष्टमी पर जिले के अलावा गैर जनपद से आए श्रद्धालुओं ने पूजा की। दूर दराज से आए भक्तों ने तो सोमवार शाम से ही धाम में डेरा डाल दिया था। मंगलवार भोर में गंगा में डुबकी लगाना शुरू कर दिया। इसके बाद गंगाघाट से मां के दरबार में माथा टेकने पहुंचे। नारियल, चुनरी, रेवड़ी और कोकाबेली आदि का प्रसाद लेकर मां की दरबार में माथा टेका। बाजे-गाजे के साथ नाचते गाते भक्तों ने निशान और पालना भी चढ़ाया। लोगों की माने तो शीतला अष्टमी के दिन लगभग ढाई सौ पालना मां की दरबार में चढ़ा। मेले में जिले के अलावा मिर्जापुर, वाराणसी, भदोही, इलाहाबाद, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, रायबरेली, लखनऊ, पश्चिमी फतेहपुर और कानपुर से आने वाले भक्तों की भारी भीड़ रही।
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