फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kaushambi News ›   Women's empowerment, self-reliance threatened by MFI debt

Kaushambi News: एमएफआई के कर्ज में जकड़ा महिला सशक्तीकरण, आत्मनिर्भरता पर संकट

Mon, 06 Oct 2025 12:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी Updated Mon, 06 Oct 2025 12:31 AM IST
विज्ञापन
Women's empowerment, self-reliance threatened by MFI debt
महिला सशक्तीकरण का उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक रूप से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। सरकार ने इसके लिए स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और माइक्रो फाइनेंस योजनाओं को बढ़ावा दिया है। ये योजनाएं महिलाओं को छोटे व्यवसाय शुरू करने और आर्थिक स्वावलंबन के लिए प्रोत्साहित करती हैं लेकिन माइक्रो फाइनेंस संस्थानों (एमएफआई) के अधिक ब्याज से बढ़ते कर्ज के तले दबकर महिला सशक्तीकरण दम तोड़ने रही है।
विज्ञापन

चायल तहसील की रामसखी, सुलेखा, रामरती, फूलकली आदि महिलाओं बताया कि उन्होंने बकरी, भैंस पालन के लिए सोनाटा, कैशपार, उत्कर्ष, स्वतंत्र और बंधन माइक्रो फाइनेंस संस्थान से 19 से 26 प्रतिशत ब्याज पर कर्ज लिया है।
विज्ञापन

सुलेखा के मुताबिक, पहले 20 हजार, फिर 45 हजार रुपये कर्ज लिया था। जमा करने के बाद हाल ही में भैंस पालन के लिए एक लाख रुपये का का कर्ज लिया है। साप्ताहिक किस्त 1280 रुपये जमा करना है। 104 सप्ताह किस्त अदा करना है लेकिन बीमारी के कारण भैंस का काफी दवा इलाज करना पड़ा है। इस कारण्ज किस्त अदा नहीं हो पा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

फाइनेंस संस्थान के अधिक ब्याज दर और वसूली एजेंट के कर्ज चुकाने के दबाव ने उन्हें आर्थिक संकट में डाल दिया है। रोजाना की मजदूरी से मिले 125 रुपये से भी किस्त नहीं अदा हो पा रही है। वसूली एजेंट भैंस खोलने की धमकी दे रहा है। वहीं, जगेश्वरी देवी ने बताया कि 20 हजार रुपये कर्ज लेकर बकरी खरीदी थी। बीमारी से दोनो बकरियां मर गईं। मजदूरी कर किस्त अदा करनी पड़ रही है।
कर्ज का बन गया है चक्रव्यूह
ग्रामीण महिलाएं जानकारी और अनपढ़ होने के चलते आसानी से कर्ज के जाल में फंस रही हैं। कई महिलाओं ने एक कर्ज चुकाने के लिए दूसरे माइक्रो फाइनेंस संस्थान से कर्ज लिया है। हालत यह हो गई है कि महिलाओं पर तीन-तीन कंपनियों के कर्ज का चक्रव्यूह बन गया है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती चली जा रही है। ऐसे में उन्हे मानसिक तनाव के साथ-साथ वसूली एजेंट की प्रताड़ना भी झेलनी पड़ रही है।
गांवों में सैकड़ो महिलाओं ने ले रखा है ऋण
माइक्रो फाइनेंस संस्थानों का जाल गांव-गांव तक फैल चुका है। तकरीबन हर गांव में सैकड़ो महिलाओं ने ऋण ले रखा है। वसूली एजेंट साप्ताहिक ऋण की वसूली करते हैं। ऋण अदा नहीं करने पर महिलाओं को उनके मवेशियों को खोल ले जाने की धमकी देते हैं।

- महिलाओं को व्यवसाय के लिए स्वयं सहायता समूह के जरिये बैंक से कम ब्याज पर ऋण मिलता है। समूह के जरिये आवेदन करने पर अनुदान के साथ ही बैंक से ऋण दिलाने में मदद की जाएगी।- अजय श्रीवास्तव, एडीओ, आईएसबी चायल
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed